• लागत | Laagat

    लागत ( Laagat )    महज कामयाबी के स्वप्न से ही कामयाबी नहीं मिलती जीवन तो सफर है गाड़ी सा जो बिना ईंधन नही चलती.. माना की ख्वाब आपके ऊंचे हैं सोच और विचार भी उज्जवल जुनून और प्रयास के अभाव मे रेत के महल से अधिक कुछ नहीं… सुंदरता मे आकर्षण तो है किंतु,पाने…

  • लंगूर के मुँह में अंगूर | Langoor ke Muh mein Angoor

    “लंगूर के मुँह में अंगूर”   एक बंदे ने शायर दोस्त को घर पर बुलाया , अपनी निहायती खूबसूरत बीवी से मिलाया। दोस्ती पक्की है बीवी को एहसास दिलाया , शायरी में ही अपने दोस्त का परिचय बताया। सुनो मेरा दोस्त एक मल्टीटैलेंटेड कलाकार है , शायरी कविता का इस पर शुरू से भूत सवार…

  • मनजीत सिंह की कविताएँ | Manjit Singh Poetry

    सावन की फुहार मैं यहाँ खड़ा हूँऔर अपनी खिड़की के बाहरबारिश को गिरते हुए देख रहा हूँ।कई दिनों से बारिश नहीं हुई है,लेकिन जब होती है,तो क्या रात में नहीं होती?हर पौधा और हर फूलइस गर्मी की बारिश के लिए बहुत आभारी है।मैं लोगों को बिना एहसास किएभीगे हुए बालों के साथ देखता हूँ।वे अपने…

  • अनटोल्ड स्टोरी | Untold Story

    अनटोल्ड स्टोरी ( Untold story )    ओ मेरा सब कुछ;मैं उसकी अनटोल्ड स्टोरी अचानक मेरी जिंदगी में एक शख़्स आता है जो मेरा दोस्त भी नही,हम सफर भी नहीं,लेकिन मुझे बहुत भाता है कुछ तो है दरमियां हमारे जिससे बंधी है हम दोनों के बीच बंधन की डोरी ओ मेरा सब कुछ; मैं उसकी…

  • रेत का ताजमहल | Ret ka Taj Mahal

    रेत का ताजमहल ( Ret ka taj mahal )    दरअसल था महल रेत का ढह गया ताजमहल रेत का स्वप्न है या असल कि पुनः बन गया ताजमहल रेत का प्रेम-मोहब्बत पर पलल खा रहल बड़ा भाव ताजमहल रेत का धनकुबेरो का करें खूब सारिका सेवा-टहल ताजमहल रेत का   डॉ. सारिका देवी अमेठी…

  • जोकर | Laghu Katha Joker

    भीड़ खचाखच थी। रंगमंच आधुनिक रंगों से सज़ा था। गांधी पर ‘ शो’ चल रहा था लेकिन बहुत अधिक मनभावन दृश्य न होने से घंटे भर में ही लोग झपबकाने लगे। उसने इसलिए नहीं कि श्रोताओं को मानसिक संतुष्टि नहीं मिल रही थी बल्कि कुछ के सोने का समय हो रहा था और कुछ टकटकी…

  • नहीं पचा पाओगे | Nahi Pacha Paoge

    नहीं पचा पाओगे ( Nahi pacha paoge )    हम क्या तार्किक या नास्तिक बुद्धि वाले या तुम्हारे पोंगापंथ की बखिया उधेड़ने वाले आतंकवादी लगते हैं तुम्हें नक्सलवादी या आईएसआईएस के उन्मादी ? ये तुम्हारा धर्म ये तुम्हारा मजहब ये तुम्हारा पंथ या ये तुम्हारे ईश्वर, पैगम्बर या गॉड या ये तुम्हारे मानवीय काले दिल…

  • बेख़बर हूं | Bekhabar Hoon

    बेख़बर हूं ( Bekhabar Hoon )    जलता है खैरलांजी, जलता है मेरा मन गोहाना की राख सुलगती है अब भी मेरे लहू में, गोधरा की ट्रेन से झांकती वे मासूम आंखें करती हैं मेरा पीछा, बदायूं के बगीचे में शान से खड़े पे़ड़ पर टंगी दो लाशें दुपट्ट्टे पर खून के धब्बे, धब्बों में…

  • दिव्यांश मौर्य की कविताएँ | Divyansh Maurya Poetry

    मैं कविताएं तब लिखता हूं। मैं कविताएं तब लिखता हूं, जब मेरा मन रोने लगता। जीवन के दुःख दर्दों को जब , मन अश्रु से धोने लगता। मैं कविताएं तब लिखता हूं, जब मेरा मन रोने लगता। बोल नहीं जब मैं कुछ पाता, पर मन ही मन हूं चिल्लाता। जब मन भावुक हो जाता है,…

  • मैं हूं प्रयागराज | Prayagraj

    मैं हूं प्रयागराज ( Main Hoon Prayagraj )    इतिहास के पृष्ठों पर स्तंभ-अभिलेखों पर पथराई नजरों से ठंडे हाथों से नदी-नालों का खेत-खलिहानों का शहर-नगरी में तपती दुपहरी में संगम के तट पर कण-कण छानते हुए देख अतीत के अपने रूप-नक्शे दिखा इलाहाबाद उदास! उदास! उदास बोला उदास मन से रखना मेरे अतीत को…