• डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर | Dr. Bhimrao Ambedkar par Kavita

    डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ( Dr. Baba Saheb Bhimrao Ambedkar )   देश विदेश में बुद्धजीवियों के मध्य बाबा साहेब ने धाक जमाया था देश विदेश के विश्व विद्यालयों से सबसे सर्वोच्च बहुत डिग्री पाकर शिक्षा के क्षेत्र में प्रसिद्धि पाया था भारत में जारी छुआछूत,असमानता को दूर भगाया था दलितों,पिछड़ों, गरीब सवर्णों और…

  • हमारे वृद्ध | Hamare Briddh

    हमारे वृद्ध ( Hamare Briddh )    बुजुर्गों के हाथ आशीर्वाद के लिए उठे तो अच्छे लगे यह दौलत, शोहरत ,नाम यही छूट जाना है रहना है सिर्फ इंसानियत और इंसान यह चिंतन मनन और मंथन अनुभव, तजुर्बा, गहनता वृद्ध फलदार वृक्ष की तरह हंसते, मुस्कुराते आशीष देते तटस्थता, सहजता, सरलता प्रकृति से सब कुछ…

  • भवंर | Bhanwar

    भवंर ( Bhanwar )    चित्त का भवंरजाल भावनाओं की उथलपुथल एक बवंडर सा अन्तस में और हैमलेट की झूलती पक्तियां टू बी और नाॅट टू बी जद्दोजहद एक गहन.. भौतिक वस्तुएं आस पास रहते लोग सामाजिक दर्जे और हैसियत क्षणिक और सतही खुशी के ये माध्यम नही करवा पाते चित्त को आनन्द की अनुभूति……

  • आरक्षण : एक अभिशाप या वरदान

    आजकल आरक्षण का मुद्दा काफी उठ रहा है । कुछ का कहना है कि इसके वजह से देश में काबिलियत की कमी आ रही है तो कुछ का कहना है आरक्षण की वजह से शोषित वर्ग को ऊपर उठने का मौका मिल रहा है। अभी हाल ही में हमारे पड़ोस में रहने वाले मिश्रा जी…

  • कर्मफल | Karmaphal

    कर्मफल ( Karmaphal )   आपके चतुर्विध सोच और कर्म का निष्कर्ष ही कहलाता है कर्मफल यही है आपका भाग्य या प्रारब्ध…. कर्मों का परिणाम उदित होता है समय अनुसार ही जिसके प्रभाव ही करते हैं संचालित आपके वर्तमान को और आप बढ़ते है कल की ओर…. भाग्य ,आपका भविष्य नही वर्तमान भी पूर्ण नही…

  • ले गया सकूँ | Sukoon Shayari in Hindi

    ले गया सकूँ ( Le gaya sukoon )    न रही उसको अब उल्फ़त है ? ले गया सकूँ सब राहत है चोट लगी ऐसी दग़ा की कल अब उल्फ़त दिल से रुख़सत है गुल न लिया चाहत का उसने टूटी दिल की ही हसरत है उल्फ़त में ऐसा टूटा दिल न यहाँ दिल को…

  • नई संसद का श्री गणेश | Nai Sansad

    नई संसद का श्री गणेश ( Nai sansad ka shree ganesh )    नई संसद का श्री गणेश, नारी शक्ति वंदन से नव संसद नवल सत्र, अद्भुत अनुपम व विशेष । अथाह मुदित हिंद धरा, रज रज खुशियां अशेष । द्वि सदन अहम बिल पारित, सहर्ष बहुमत आभा मंडन से । नई संसद का श्री…

  • दिल की अभिलाषा | Dil ki Abhilasha

    दिल की अभिलाषा ( Dil ki abhilasha )    चाह नहीं मैं चाहत बनकर प्रेमी-युगल को तड़पाऊं चाह नहीं, खिलौना बनकर टूटू और बिखर जाऊं चाह नहीं, पत्थर बनकर निर्मम,निष्ठुर कहलाऊं चाह नहीं, बंधन में पड़कर स्पंदन की प्रीत जगाऊं चाह मेरी है धड़कन बनकर रहूं सदा कुर्बान और तिरंगे में लिपट कर हो जाऊं…

  • बूंद जो सागर से जा मिली | Prem ki Kahani

    सायंकल का वक्त गोधूलि बेला में सूरज की लालिमा वातावरण में मिलकर चलने की तैयारी में है। फूलों की सुगंधों से चारों ओर का माहौल मदमस्त हो रहा है। ऐसे में पवन देव ने भी कृपा की मंद मंद मधुर हवाएं चलने लगी तो साथ ही वर्षा की टप टप करती बूंदे भी पड़ने लगी…

  • विश्व शांति दिवस | Poem on World Peace Day in Hindi

    विश्व शांति दिवस ( Vishwa shanti divas )    शुचिता के प्रसून खिलते,शांति के उपवन में तन मन पुनीत पावन, अलौकिक मृदु अहसास । पटाक्षेप सघन तम, दर्शित चहुं दिशा उजास । रग रग अथाह मंगलता, मोहक सुरभि पवन में । शुचिता के प्रसून खिलते,शांति के उपवन में ।। शमन पथ अग्रसर, क्रोध वैमनस्य उग्र…