• सोच और समझ | Soch aur Samajh

    कभी कभी ना हम खुद बस यही सोचते है कि जितना भी गलत हो रहा सब हमारे ही साथ हो रहा, बाकी सबके जीवन में कोई परेशानी नहीं, कोई दुख नहीं। लेकिन ये हमारा बस वहम है, क्योंकि बिना परेशानियों और दुखों के जीवन कुछ भी नहीं। जबतक हम परेशानियों का सामना नहीं करेंगे हमें…

  • शान तिरंगा | Shaan Tiranga

    शान तिरंगा ( Shaan tiranga )    जान तिरंगा शान तिरंगा ? है मेरा तो मान तिरंगा भारत की शान बनेंगे हम है अपनी पहचान तिरंगा लड़ जाऊंगा हर दुश्मन से वो मेरी है जान तिरंगा फ़हरा हूँ रोज़ हिमालय पर है मेरा अरमान तिरंगा सुर भारत के इतने अच्छे होठों पर है गान तिरंगा…

  • ओ भैया प्यारे | O Bhaiya Pyare

    मैं नटखट चंचल हूं बहना   मैं नटखट चंचल हूं बहना भैया की प्यारी हूं बहन एक हाँथ में बाधू राखी दूजे से उपहार है लेना सारे राज छुपा रखे हैं कह दूंगी फिर ना कहना रोज रूठती रोज मनाते झगड़े अपने क्या कहना आज नहीं लडूंगी तुमसे ऐसे ही मुस्कुराते रहना टीका करूं रोली…

  • अरे पीयूष पहचाना मुझे | Pehchana Mujhe

    बात बहुत पुरानी हैं, मैं वृंदावन में बाँके बिहारी के दर्शन करने के लिये अकेला ही जा रहा था,सामने से आ रही एक बहुत सुंदर सी गाड़ी जिसको एक महिला चला रही थी, अचानक मेरे पास आ कर रुकी, शीशा नीचे करके बोली आप पीयूष हैं ना, मैं बोला, हाँ मैं पीयूष हूँ । उसने…

  • आडंबर | Adambar

    आडंबर ( Adambar )    पुकारता वह रह गया भाई कोई बचा लो मुझे, भीड़ व्यस्त थी बहुत किन्तु वीडियो बनाने में! ठंड में बेहद ठिठुर रहे थे बेतहाशा गरीब, लोग थे मशगूल फिर भी चादरें चढ़ाने में! मर गया भूख से अखिर तड़प तड़प कर, फेंक रहे थे बचा हुआ खाना कूड़ेदान में! खाली…

  • रक्षा बंधन पर्व शोभित | Raksha Bandhan Parv

    रक्षा बंधन पर्व शोभित ( Raksha bandhan parv sushobhit )    रक्षा बंधन पर्व शोभित, भाई बहन अथाह गर्व अंतर्संबंध अपनत्व प्रवाह, बहन पावन पूज्य स्थान । सुशोभित निज संस्कृति, कर रक्षा संकल्प आह्वान । घर द्वार चहक महक, जन पटल दर्श भाव कर्व । रक्षा बंधन पर्व शोभित,भाई बहन अथाह गर्व ।। उर श्रृंगार…

  • दिलवाले दिल के | Dil Wali Shayari

    दिल वाले दिल के ( Dilwale dil ke )    लोग मिले हैं काले दिल के किसने देखे छाले दिल के ? देखें तेरे दिल में क्या है ? खोल कभी तो ताले दिल के सोचा तुझको हरदम अपना अरमाँ यूँ भी पाले दिल के मक्कारों की इस दुनिया में हम हैं भोले भाले दिल…

  • अपना रक्षा बंधन | Poem on Raksha Bandhan in Hindi

    अपना रक्षा बंधन ( Apna Raksha Bandhan )  राखी के दिन माँ सुबह तड़के उठ जाती थी द्वार पर पूजने को सोन सैवंईयो की खीर बनाती थी लड़कियाँ घर की लक्ष्मी होती हैं इस लिए वह द्वार पूजा हमसे करवाती थी दिन भर रसोई में लग बूआओं की पसंद का खाना बनाने में वो खुद…

  • उजाले की ओर | Ujale ki Aur

    मनीष और उसकी बहन साक्षी दोनों ही शिक्षक हैं। उनमें समाज में व्याप्त मूढताओं पर अक्सर बहस किया करते थे। उन्हें लगता था कि बच्चों को स्कूल में यदि हम रोजाना कुछ न कुछ अंधविश्वास के बारे में जानकारी देते हैं तो वे धीरे-धीरे उनमें असर होने लगेगा। अगले दिन जब मनीष विद्यालय गया तो…

  • उड़ान की ख्वाहिशों मे | Udaan ki Khwahishon me

    उड़ान की ख्वाहिशों मे ( Udaan ki khwahishon me )    उड़ान की ख्वाहिशों मे छोड़नी पड़ जाती है जमीन भी कभी कभी महज हौसलों के करीब ही हर मंजिल नही होती…. मौका भी देता है वक्त आ जाते हैं आड़े उसूल तो जमाना कभी कामयाबी के सफर मे तोड़ने भी होते हैं सिद्धांत लोगों…