• जिम्मेदार कौन | Zimmedar Kaun

    एक मंदिर में साईं बाबा की मूर्ति स्थापित की जा रही थी। ढोल नगाड़े बज रहे थे। साईं बाबा की मूर्ति शंकर भगवान के बगल में स्थापित करना था। ऐसे में महेश नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने विरोध किया। उसने कहा,-” भोले शंकर की मंदिर में साईं बाबा की मूर्ति नहीं स्थापित हो सकती…

  • रश्मिरथी | Rashmirathi

    रश्मिरथी ( Rashmirathi )    देख सखी दिनकर नहीं आए आहट सुन रश्मि रथियों ने खोली द्वारा निशाचर डींग हांक रहे थे जो वह दुम दबाकर गये भाग कल की रात्रि अति काली जो अब ना दे दिखाई सोच सखी उनके आने पर क्या क्या देगा दिखाई तेज स्वरूप- सिंहासन संपूर्ण क्षितिज सुनहरी छाई निशाचर…

  • आओ जी लें प्यार से कुछ पल | Aao Jee le Pyar se

    आओ जी लें प्यार से कुछ पल ( Aao jee le pyar se kuchh pal )   अंतस्थ वृद्धन अंतराल , निर्मित मौन कारा । व्याकुल भाव सरिता, प्रकट सघन अंधियारा । पहल कर मृदु संप्रेषण, हिय भाव दें रूप सकल । आओ, जी लें प्यार से कुछ पल ।। भीगा अंतर्मन संकेतन, जीवन पथ…

  • नौशाबा की कविताएँ | Naushaba Poetry

    अफ़सोस ज़िंदगी की राहों में,हर कोई तकलीफ़ों से गुज़रता है,तपता है गम की धूप मे कभीकभी देखता है स्वप्न खुशियों केमगर अफ़सोस !डसते हैं रात के अंधेरे बहुतभोर का उजाला भी ठहरता कहाँ है! सालते ही रहते हैंटूटे ख्वाबों के एहसासहर लम्हा बीती घड़ी का हिस्सा होता हैदूर दूर तक रहती हैं विरानियाँहर पल गुजरा…

  • अर्थ हीन | Arth-Heen

    अर्थ हीन ( Arth-Heen )    एक स्त्री के लिए अच्छा घर,अच्छा पति अच्छे बच्चे, सास ससुर और ,एक अच्छी खासी आमदनी भी तब,किसी काम की नही होती जब, उस पर लगा हो बंदिशों का पहरा किसी से भी बात न करने की मनाही उठती हुई शक की नजरों के साथ हर बात पर व्यंग…

  • श्री महर्षि गज अरविन्द | Sri Maharshi Gaj Arvind

    दिव्य जीवन पथ – प्रदर्शक संत — श्री महर्षि गज अरविन्द   संसार में कभी-कभी ऐसे दिव्य महापुरुषों का अवतरण होता है जिनके त्याग , समर्पण, प्रेम, करूणा , समता, सादगीपूर्ण जीवन लोगों के लिए प्रेरणा बन जाता है। उनका जीवन संसार के लिए एक संदेश होता है। ऐसे दिव्य महापुरुषों की श्रेणी में आते…

  • रक्षाबंधन का बसंत | Raksha Bandhan ka Basant

    रक्षाबंधन का बसंत  ( Raksha Bandhan ka Basant )    अब न रिस्तों का होगा अंत रक्षा बंधन का आया है ले लेकर खुशियों का बसंत अब न रिस्तों का होगा अंत।   रंग बिरंगे उन धागों का गुच्छ अनोखा अनुरागों का, गांठ बांध कर प्रीति सजाकर अरुण भाल पर तिलक लगाकर,   दीप जलाकर…

  • स्वयं का मोल | Swayam ka Mole

    स्वयं का मोल ( Swayam ka mole )    मिलन सारिता,प्रेम,लगाव आदि बेहद जरूरी है बावजूद इसके,आपको अपनी भी कीमत स्वयं ही निर्धारित करनी होगी.. आपका पद,रिश्ता,भूमिका आपको खुली छूट नही देता आप जहां,जिस जमीन पर ,जिसके साथ खड़े हैं ,वहां आपका कुछ मूल्य भी है… अधिक सस्ती या सुलभ उपलब्धता वस्तु हो या व्यक्ति…

  • परिंदा | Parinda

    परिंदा ( Parinda )    हवा न दो उन विचारों को जो लगा दे आग पानी मे जमीन पर खड़े रहना ही आकाश को छू लेना है… सीढियां ही पहुचाती हैं हमे उछलकर गगन नही मिलता भुला दो कुछ पन्नों को तुम हर पन्नों मे जीवन नही मिलता.. अंगुलियों को देख लिया करो जान लोगे…

  • गम छुपा यूं मुस्कुराते रहे | Gam ki Shayari Hindi

    गम छुपा यूं मुस्कुराते रहे ( Gam chhupa yun muskurate rahe )    हम हंसते रहे अधर गाते रहे। गम छुपा यूं हम मुस्कुराते रहे। घात लगाए बैठे जहां में कई। हम प्यार के मोती लुटाते रहे। अड़चनें विघ्न बाधा आते रहे। प्रगति पथ पे कदम बढ़ते रहे। हौसलों की उड़ानें भावन हुई। बुलंदियों को…