पुस्तक | Pustak
पुस्तक ( Pustak ) गिरने मत दो झुकने मत दो गिरे अगर तो उसे उठा लो, मुड़ने मत दो फटने मत दो मुड़े अगर तो उसे सधा लो, भीग भीग कर गल न जाए जल वर्षा से उसे बचा लो, कट ना…
पुस्तक ( Pustak ) गिरने मत दो झुकने मत दो गिरे अगर तो उसे उठा लो, मुड़ने मत दो फटने मत दो मुड़े अगर तो उसे सधा लो, भीग भीग कर गल न जाए जल वर्षा से उसे बचा लो, कट ना…
गुस्ताखी ( Gustakhi ) कलियों के भीतर यूं ही , आ नही जाती महक समूचे तने को ही , जमीं से अर्क खींचना होता है चंद सीढ़ियों की चढ़ाई से ही, ऊंचाई नही मिलती अनुभवों के दौर से गुजर कर ही, सीखना होता है सहयोग के अभाव मे कभी, मंजिल नही मिलती अकेले के…
अपनें घर का वैद्य ( Apne ghar ka vaidya ) इन घरेलू नुस्खों को सब लोग आजमाकर देखना, अपने अपने घर का वैद्य आप ख़ुद ही बन जाना। हालात चाहें कैसे भी हो न बीमारियों से घबाराना, सवेरे जल्दी-उठकर हल्के व्यायाम ज़रुर करना।। खाॅंसी में काली-मिर्च और शहद मिलाकर चाटना, जलने पर मैथीदानें का…
बेवफ़ाई किसलिए ( Bewafai kis Liye ) बेवज़ह ये बेवफ़ाई किसलिए इश्क़ की शम्मा बुझाई किसलिए। दिल हमारा कैद में जब रख लिया दे रहे हो फ़िर रिहाई किसलिए। जानते हैं असलियत हम आपकी हमसे आख़िर पारसाई किसलिए। हिज़्र ही हासिल फ़कत इसमें हुआ कर रहे हम आशनाई किसलिए। याख़ुदा बेख़ौफ़ हैं मुजरिम यहां…
नीमरू जब 12– 13 वर्ष का था तभी उनके पिताजी उसे छोड़ कर चले गए। वैसे तो उनका नाम सुरेंद्र कुमार था लेकिन दुबले-पतले होने के कारण उन्हें निमरू ही कहते थे । बचपन में वह अपने मामा के घर रहते थे। मामा के घर उनकी खूब दादागिरी चलती थी। दुबला पतला है तो क्या…
चिंता में किसान बा! ( Chinta me kisan ba ) बिना बारिश के खेतवा सूखान बा, चिंता में किसान बा ना। कइसे होई अब रोपाई, जेब -पइसा ना पाई, महंगे डीजल से जनता परेशान बा, चिंता में किसान बा ना। बिना बारिश के खेतवा सूखान बा, चिंता में किसान बा ना। नदी-नाले सब सूखे,…
परम आदरणीय सुधीजनो सादर प्रणाम आज मैं जिस विषय पर अपना चिंतन आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं जिसमे आम लोगो के मन में उठने वाले प्रश्नों के उत्तर हो सकते हैं l मेरे लेख से किसी भी धर्म या धार्मिक व्यक्ति के हृदय को ठेस लगती है l उसके लिए मैं क्षमा…
खामोशी ( Khamoshi ) नहीं कुछ भी है कहने को तो ओढ़ी आज खामोशी ज़रा सुनिए तड़पते दिल की है आवाज़ खामोशी। समंदर सी है गहरी जलजले कितने समेटे है छुपाए है हज़ारों ग़म हज़ारों राज़ खामोशी। नहीं लब से कहा उसने मगर सब कुछ बयां करती वो उसका हाले दिल बदले हुए अंदाज़…
आमिर इंडिया गरीब भारत ( Amir India Garib Bharat ) अमीर इंडिया में खुश है गरीब भारत में जल रहा । तरक्की हो रही इंडिया वालों की और कहते हैं भारत बदल रहा ।। अमीरों का इंडिया में बोलबाला है गरीबो का तो भगवान रखवाला है । सारी खुशियां हैं अमीरों के लिए गरीबों…
बस हमें ख़बर नहीं ( Bas hamen khabar nahin ) देख पाये जो उसे ,ऐसी हर नज़र नहीं हर जगह है वो ख़ुदा ,बस हमें ख़बर नहीं सब मरेंगे एक दिन ,बात है ये लाज़मी कोई इस जहान में, दोस्तो अमर नहीं दिल मिला है गर तुझे ,तो मिलेगा दर्द भी दर्द से तो…