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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Badli ka Swag
    कविताएँ

    बदली का स्वैग | Badli ka Swag

    ByAdmin July 19, 2023July 19, 2023

    बदली का स्वैग ( Badli ka swag )    हवा के परों पर उड़ती हुई सी आई एक बदली- छोड़ सारे राग-रोग जम -ठहर गई रमा के जोग। आंँखों में है आकाश कर में बूँदों का पाश छलकेगी- बरसेगी देगी आज जीवन औ धरा को सांँस- इस उन्मत्त बदली को शायद है पता- उसके यूँ…

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  • Wah re Wah Tamatar
    कविताएँ

    वाह रे वाह टमाटर | Wah re Wah Tamatar

    ByAdmin July 18, 2023

    वाह रे वाह टमाटर ( Wah re wah tamatar )   वाह रे टमाटर क्या इज्जत पाई है। भाव भी ऊंचे शान तेरी सवाई है। टमाटर से गाल जिनके मिल जाए। खजाना भर माल चल पास आए। भाव उनके भी बढ़ जाते दुनिया में। लाल लाल टमाटर सा मुंह बनाएं। अब आलू नहीं टमाटर हो…

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  • Laddu Gopal
    कविताएँ

    लड्डू गोपाल | Laddu Gopal

    ByAdmin July 18, 2023

    लड्डू गोपाल ( Laddu Gopal )    ऐसी लागी नजर तुझे ओ लड्डू गोपाल सांवरे हो गए तेरे गोरे गाल लाल लाल यह काली घटाओं लट, घुंघराले तेरे बाल काली कमली वाले ने जैसे किया कमाल! तेरी तिरछी नजरिया लगे फिर भी प्यारी , तेरी टेढ़ी कमरिया पर सजे मुरली न्यारी ।। ऐसी लागी नजर…

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  • Hariyali Amavasya
    कविताएँ

    हरियाली अमावस्या | Hariyali Amavasya

    ByAdmin July 18, 2023

    हरियाली अमावस्या ( Hariyali amavasya )    मनाओं सभी हरियाली अमावस्या, सावन में प्रकृति लाई ढेरों खुशियाॅं। पर्व का उद्देश्य प्रकृति से प्रेम करो, हरे भरें खेत देखकर झूमें सखियाॅं।। जगह-जगह लगते मिठाई के ठेले, बागों में झूलें और बाजारों में मेले। सभी मनातें जश्न, त्योंहार परिवार, युवाओं के साथ झूमें गुरु एवं चेले।। गेहूं…

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  • Shiva ka darbar
    गीत

    शिव का सजा दरबार सावन में | Shiv ka Saja Darbar

    ByAdmin July 18, 2023

    शिव का सजा दरबार सावन में ( Shiv ka saja darbar sawan mein )    जल भर लोटा हाथों में सजा लो कावड़ भक्तों। भोले शिव का करो ध्यान उठा लो कावड़ भक्तों। हर-हर महादेव सब बोलो बढ़ते चलो वन वन में। त्रिनेत्र त्रिशूलधारी सदाशिव भोलेनाथ रखो मन में। शिव का सजा है दरबार सावन…

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  • Mitti ki Kaya
    कविताएँ

    है ये मिट्टी की काया | Mitti ki Kaya

    ByAdmin July 18, 2023

    है ये मिट्टी की काया! ( Hai ye mitti ki kaya )    मैंने खुद को तपा करके, जीवन को सजाया है। था कर्म मेरा अच्छा, तब जनम ये पाया है। कुदरत के आंगन में, बड़े मजे से खेला है। ये बीत गया जीवन, अब जाने की बेला है। पुरुषार्थ किया हमने, अब मोक्ष को…

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  • Mobile se Doori Banaye
    कविताएँ

    मोबाईल से दूरी बनाएं | Mobile se Doori Banaye

    ByAdmin July 18, 2023

    मोबाईल से दूरी बनाएं ( Mobile se doori banaye )    मोबाईल के इस शोख ने आज सबको हिला दिया, छोटे-बड़े बच्चें एवं बुड्ढे सबको नाच ये नचा दिया। टेलिविज़न रेडियों एवं एसटीडी को भी भुला दिया, पाश्चात्य संस्कार संस्कृति धीरे-धीरे ये छुड़ा दिया।। धूल-भरी है आज ज़िंदगी व सब जगह पर ‌गन्दगी, खो गई…

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  • Zindagi pe Shayari
    ग़ज़ल

    लम्हा भर है जिंदगी | Zindagi pe Shayari

    ByAdmin July 18, 2023

    लम्हा भर है जिंदगी ( Lamha bhar hai zindagi )    सबसे तू हँस बोल ले प्यारी भवर है जिंदगी साँस के बस एक झोंके का सफ़र है जिंदगी जिंदगी जी ले जी भर मत सोच ज्यादा अब इसे क्या पता वर्षों की है या लम्हा भर है जिंदगी खोज ले पल हसरतों के कुछ…

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  • Aazma ke Dekh liya
    ग़ज़ल

    आज़मा के देख लिया | Aazma ke Dekh liya

    ByAdmin July 18, 2023July 18, 2023

    आज़मा के देख लिया ( Aazma ke dekh liya )    ख़ुदा बना के तुझे, सर झुका के देख लिया अना को ताक पे रख, सब भुला के देख लिया हुस्न ए मतला बड़े ख़ुलूस से उनको बुला के देख लिया हरेक नाज़ भी उनका उठा के देख लिया जुनून तोड़ चुका दम, वफा निभाने…

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  • Swabhavik
    कविताएँ

    स्वाभाविक | Swabhavik

    ByAdmin July 18, 2023

    स्वाभाविक ( Swabhavik )    हर रात अंधेरे का ही प्रतीक नही होती तीस रातों मे एक रात होना स्वाभाविक है उजाले के दिनकर को भी होता है ग्रहण हर किसी मे कुछ कमी होना स्वाभाविक है कभी टटोलकर देखिए खुद के भीतर भी आपमे भी कमी का होना स्वाभाविक है पूर्णता की तलाश मे…

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