Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
TheSahitya – द साहित्य
  • Poem in Hindi on Mahaj
    कविताएँ

    महज | Poem in Hindi on Mahaj

    ByAdmin March 20, 2023

    महज ( Mahaj )    महज रख देते हाथ कंधों पे, दर्द ए पीर सब हवा हो जाती, ना गम का होता ठिकाना कहीं, ना हालत कहीं ये बिगड़ पाती। महज तेरे आ जाने से ही सही, खुशियां भी मेरे घर चली आई, खिल उठा दिल का सारा चमन, मन की बगिया सारी हरसाई। महज…

    Read More महज | Poem in Hindi on MahajContinue

  • Poem in Hindi on Phagun
    कविताएँ

    फागुन पर कविता | Poem in Hindi on Phagun

    ByAdmin March 20, 2023

    फागुन पर कविता ( Phagun Par Kavita )    देखो फागुन आया है छटा में रंग छाया है खिली पलाश पर योवन आया है। गीत बसंत का हर दिल ने गाया है। सेमल, टेसू ने वन उपवन सजाया है बोर लगे आम ने तोरण द्वार बनाया है। लहलहाती फसलो ने फागुन को बुलाया है। बेर…

    Read More फागुन पर कविता | Poem in Hindi on PhagunContinue

  • Kavita Maun Nimantran
    कविताएँ

    मौन निमंत्रण | Kavita Maun Nimantran

    ByAdmin March 19, 2023

    मौन निमंत्रण  ( Maun nimantran )    मुझे क्या पता!  वह सामने था लिए कुछ भाव भरा संदेश खड़ा, किंतु मैं पूछ पड़ा तुम कौन यहां ? क्या कर रहा है? भला, मुझसे क्या चाहते हो? या मुझे बताना चाहते हो! कुछ अंतर्मन में लिए भाव भरा। वह मौन था पर कौन था यह  था…

    Read More मौन निमंत्रण | Kavita Maun NimantranContinue

  • Gangaur Tyohar
    कविताएँ

    गणगौर त्योहार | Gangaur Tyohar par Kavita

    ByAdmin March 19, 2023

    गणगौर त्योहार ( Gangaur tyohar )    ईसर गौरी की पूजा होती पावन गणगौर का त्योहार। गोरी सज धज शिव शंकर को वंदन करती बारंबार। कुंवारी कन्याएं सोलह दिन गौरी पूजन कर आती। जल दूब अर्पण शिव गौरी गौर गौर गोमती गाती। सिंदूर मेहंदी चूड़ा चढ़ाती कर गोरी सोलह सिंगार। मनचाहा वर दो शिव भोले…

    Read More गणगौर त्योहार | Gangaur Tyohar par KavitaContinue

  • Kaise ho
    कविताएँ

    कैसे हो | Hasya Ras ki Kavita

    ByAdmin March 19, 2023

    कैसे हो ( Kaise ho )    दांत में दर्द हो रहा बेशुमार चला गया डॉक्टर के द्वार इलाज करवाना है पैसे दो उखाड़े दांत बोला कैसे हो परीक्षा पेपर मिला तेजतर्रार परीक्षक भी मिला होशियार हल हो पाए प्रश्न जैसे तैसे दो बाहर से टीचर बोला कैसे हो शादी बड़ी धूमधाम से मन रही…

    Read More कैसे हो | Hasya Ras ki KavitaContinue

  • Poem main Pyar Bunta Hoon
    कविताएँ

    मैं प्रीत बुनता हूं मैं प्यार बुनता हूं | Poem main Pyar Bunta Hoon

    ByAdmin March 19, 2023

    मैं प्रीत बुनता हूं मैं प्यार बुनता हूं ( Main preet bunta hoon main pyar bunta hoon )    मैं प्रीत बुनता हूं मैं प्यार बुनता हूं। गीतो भरे तराने रसधार बुनता हूं। महकती हवाएं मस्त बहार चुनता हूं। सदाबहार बोल सुरीले गीत सुनता हूं। लोकतंत्र का स्तंभ उम्मीदवार चुनता हूं सच्चाई पे खरे मिले…

    Read More मैं प्रीत बुनता हूं मैं प्यार बुनता हूं | Poem main Pyar Bunta HoonContinue

  • Poem Jaate Hue Lamhe
    कविताएँ

    जाते हुए लम्हें | Poem Jaate Hue Lamhe

    ByAdmin March 19, 2023

    जाते हुए लम्हें! ( Jaate hue lamhe )    ख्वाहिशों की ये बारिश देर तक नहीं टिकती, रितु चाहे हो कोई देर तक नहीं टिकती। लूटो नहीं दुनिया को चार दिन का मेला है, गिनकर दिया साँसें देर तक नहीं टिकती। आँखें उसकी हिरनी-सी पागल कर देती है, जवानी की ये खुशबू देर तक नहीं…

    Read More जाते हुए लम्हें | Poem Jaate Hue LamheContinue

  • Geet Aa Rahe Shri Ram Hamare
    गीत

    आ रहे श्रीराम हमारे | Geet Aa Rahe Shri Ram Hamare

    ByAdmin March 19, 2023March 19, 2023

     आ रहे श्रीराम हमारे ( Aa rahe shri ram hamare )   जन जन की आंखों के तारे, आ रहे श्रीराम हमारे। घट घट वासी रघुवर प्यारे, अवधपुरी राज दुलारे। आ रहे श्रीराम हमारे दशरथ नंदन जय श्रीराम, रघुपति राघव राजाराम। लीला अपरंपार धनुर्धर, तिर जाते पत्थर धर नाम। दुष्ट दलन आए अवतारी, बड़े-बड़े दानव…

    Read More आ रहे श्रीराम हमारे | Geet Aa Rahe Shri Ram HamareContinue

  • Geet Rang Roop aur Gun
    गीत

    रंग रूप और गुण | Geet Rang Roop aur Gun

    ByAdmin March 19, 2023

    रंग रूप और गुण ( Rang roop aur gun )    रंग रूप और गुण मिले जुड़े हैं दिलों के तार। अपनापन अनमोल मिले हृदय उमड़ता प्यार। धरती अंबर जब मिले बहती भावों की रसधार। उतरे चांद जमीन पे चांदनी खुशियों की फुहार। हृदय उमड़ता प्यार रंग मिले रोशन हो चेहरे, रुप मिले निखार आए।…

    Read More रंग रूप और गुण | Geet Rang Roop aur GunContinue

  • Poem Jaag Musafir
    कविताएँ

    त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर | Poem Jaag Musafir

    ByAdmin March 19, 2023March 19, 2023

    त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर ( Tyag nidra jaag musafir )   बीती रात ,हुआ सवेरा पक्षी कुल का, हुआ बसेरा कैसे लक्ष्य,तय होगा फिर त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर,   सोकर कौन? कर पाया क्या? बैठ करके,खोया ना क्या? खोते वक्त, मत जा आखिर, न सोवो उठ,जाग मुसाफिर।   अपने आप, समझता क्यों न? होके सबल, सभलता क्यों…

    Read More त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर | Poem Jaag MusafirContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 483 484 485 486 487 … 839 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
Search