• रवीन्द्र कुमार रौशन “रवीन्द्रोम “ की कविताएं | Ravindra Kumar Poetry

    मैं बिहार हूं दुनिया का पहला गणराज्यमुझे ही माना जाता है ,एशिया का पहला श्रेष्ठ शिक्षा केंद्रनालंदा ही कहलाता है । धर्म , साधना के लिएदुनिया को बुद्ध , जैन दिए ,भौतिक ज्ञान से निकालकरअध्यात्म का सबको नैन दिए । राजनीति सिखाने वालेचाणक्य ज्ञानवान दिए ,राम कथा लिखने वालेबाल्मीकि महान दिए । जोड़ , घटाव…

  • ताजदार करना है

    ताजदार करना है वफ़ा की राह को यूँ ख़ुशग़वार करना हैज़माने भर में तुझे ताजदार करना है भरम भी प्यार का दिल में शुमार करना हैसफ़ेद झूठ पे यूँ ऐतबार करना है बदल बदल के वो यूँ पैरहन निकलते हैंकिसी तरह से हमारा शिकार करना है ये बार बार न करिये भी बात जाने कीअभी…

  • अय्याशी

    अपने छोटे से कमरे के कोने में रखे लकड़ी के टेबल के ऊपर अभी हाल में मिले हुए द्वितीय विजेता सर्टिफिकेट और मोमेंटो देख कर राधिका देवी दीवान में लेटी लेटी मुस्कुराने लगी । आवाज कानों में गुंजने लगे जब माइक से मंच पर विजेता का नाम में राधिका देवी पुकारा गया था । फिर…

  • नयी रोशनी

    नयी रोशनी अंधेरों की बाहों से छूटकर आई है,एक उम्मीद की किरन जो जगमगाई है।थमी थी जो राहें, अब चल पड़ी हैं,दिलों में नयी रोशनी जो घर बसाई है। खामोशियों की परतें अब पिघलने लगीं,अधूरी सी कहानियां अब संवरने लगीं।हर कोना जो सूना था, वो चमक गया,नयी सुबह की आहट दिल को छूने लगी। दिकु,…

  • उड़ान | Udaan

    उड़ान पक्षी अपने गीत के बदले तोड़ लेता है धान की दो बालियाँ लौट जाता है आसमान के घने घोंसले में अनपहुँच अन्वेषा की आँखें क्षितिज के विराग को छूकर लौट आती हैं फिर से अपने अभीष्ट के अन्तिम आश्रय में डैने सन्तुलित करते हैं दूर से दूर खिसकती नीलिमा की उदार सान्द्रता और फिर…

  • तुम उस शर्वरी पढ़ते

    तुम उस शर्वरी पढ़ते खत मेरा अंततः तक,काश ! तुम उस शर्वरी पढ़ते,प्रेम का एक नव रूप,काश ! तुम विभावरी गढ़ते।तुम अगर पढ़ते तो शायद,फैसले आज कुछ और होते,देह से भले विलग रहते,किन्तु ह्रदय से एक रहते।प्रिय ! निर्णय तुम्हारा सहजरूपी,निर्मित ताज होता,शीश मैं झुकाती,पूर्ण सब अभिषेक होते।सोपान उस दिन प्रणय का,काश ! तुम दो…

  • आओ रोएँ

    आओ रोएँ ०जिसको खोया उसे याद कर बिलखें कलपें नयन भिगोएँआओ रोएँ०जो न खो गए उनको भूलेंखुशी दफ़्न कर, मातम वर लेंनंदन वन की जमीं बेचकरझट मसान में बसने घर लेंसुख-सपनों में आग लगाकरदुख-दर्दों के बीजे बोएँआओ रोएँ०पक्ष-विपक्ष नयन बन जाएँभूले से मत हाथ बँटाएँसाथ न चलकर टाँग अड़ाएँफूटी आँख न साथी भाएँनहीं चैन से…

  • उसका मज़ा ले

    उसका मज़ा ले गुलों सी ज़िन्दगी अपनी खिला लेजो हासिल हो रहा उसका मज़ा ले मुहब्बत हो गई है तुझको मुझसेनिगाहें लाख तू अपनी चुरा ले खरा उतरूंगा मैं हर बार यूँहींतू जितना चाहे मुझको आज़मा ले लुटा दूँगा मैं चाहत का समुंदरकिसी दिन चाय पर मुझको बुला ले घटा छाती नहीं उल्फ़त की हर…

  • शब्दाक्षर राजस्थान के तत्वावधान में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ काव्य अनुष्ठान

    शब्दाक्षर राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था राजस्थान के तत्वावधान में गायत्री मंदिर परिसर में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्दाक्षर राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष प्रसि़द्ध वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ दयाशंकर जांगिड ने की। मुख्य अतिथि सह प्रांतपाल रामावतार सबलानिया थे। विशिष्ट अथिति डाॅ कैलाश शर्मा सीताराम वर्मा सीताराम…

  • मिरे पास ग़म के तराने बहुत है

    मिरे पास ग़म के तराने बहुत है गुल-ए-दर्द के से ख़ज़ाने बहुत हैं।मिरे पास ग़म के तराने बहुत है। न हो पाएगा तुम से इनका मुदावा।मिरे ज़ख़्मे-ख़न्दां पुराने बहुत हैं। जो आना है तो आ ही जाओगे वरना।न आने के दिलबर बहाने बहुत हैं। कहां तक छुपाऊं में चेहरे को अपने।तिरे शहर में जाम-ख़ाने बहुत…