• रंग दे पिया मोहे रंग दे पिया | Kavita Mohe Rang de Piya

    रंग दे पिया मोहे रंग दे पिया ( Rang de piya mohe rang de piya )    रंग दे पिया मोहे रंग दे पिया भर पिचकारी रंग खेले पिया फागुनी मौसम फिजाएं खिली मदमस्त मस्तानी हवाएं चली लबों पे तराने दिल खिलने लगे हैं सुर संगीत के प्रिय मिलने लगे हैं मोती बरसने लगे सनम…

  • अदावत है | Poem Adawat Hai

     अदावत है! ( Adawat hai )    रूस से अमेरिका की पुरानी अदावत है, दुनिया की शांति के साथ ये बगावत है। कितनी उम्र तक लड़ना चाहेगा अमेरिका, बताओ,यू.एन.ओ. किस तरह की अदालत है। नकेल नहीं कस पाया उसकी जरूरत है क्या, कहीं न कहीं वो भी विश्व के लिए मुसीबत है। नाइंसाफी हो रही…

  • सांवलिया सेठ है दयालु | Sanwaliya Ji par Kavita

    सांवलिया सेठ है दयालु ( Sanwaliya seth hai dayalu )   देश के कोने-कोने से जहां पर आतें है कई श्रद्धालु, रोग-कष्ट सबका हर लेते वह सांवरिया सेठ दयालु। विश्व प्रसिद्ध मन्दिर है वह राजस्थान-चित्तौड़गढ़ में, जहां विराजे कृष्ण-अवतार सांवलिया सेठ कृपालु।। जिनका सम्बन्ध बताया जाता है भक्त मीरा बाई से, वें है गिरधर गोपाल…

  • मैं हूं मोबाइल | Kavita Main Hoon Mobile

    मैं हूं मोबाइल ( Main hoon mobile )   मैं हूं एक प्लास्टिक का बॉक्स, आ जाता एक पॉकिट में बस। कोई रखता मुझे शर्ट पाॅकिट, कोई रखता है पेंट की पाॅकिट।। मेरे बिन कोई काम ना चलता, हाथ में नही दिमाग़ ना चलता। सुबह से लेकर शाम हो जाएं, उंगलियाँ मानव लगाता रहता।। मुझको…

  • धरा | Dhara par Kavita

    धरा ( Dhara )    धरा मुस्कुराई गगन मुस्कुराया खिल गए चेहरे चमन महकाया रंगों से रोशन हुई ये अवनी सारी धरती पे खुशियों का मौसम छाया खेतों में सरसों लहराई पीली ओढ़ ली धरा ने चुनरिया रंगीली महका मधुमास मदमाता आया मस्ती में झूमे समां हरसाया गुलशन सारे लगे फिर महकने प्रेम के मोती…

  • कोरोना | Corona par Kavita

    कोरोना ( Corona )    कोरोना से सबको है लड़ना, लेकिन इससे बिलकुल न डरना। मिलकर हमें इसको है हराना, कोरोना मुक्त भारत देश बनाना।। कोरोना है एक महामारी, आफत आ गई ये बड़ी भारी। जोश-होश से काम सभी लेना, हाथ साफ, दूरी, मास्क लगाना।। इन सब बातों को है अपनाना, पास नही आएगा यह…

  • पिता | Pita ke Upar Kavita

    पिता ( Pita )  ( 4 ) पिता एक उम्मीद है एक आस है , परिवार की हिम्मत और विश्वास है । बाहर से सख्त अंदर से नर्म है, उनके दिल में दफन कई मर्म है। पिता संघर्ष के आंधियों में हौसलों की दीवार है, परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है। बचपन में…

  • मैं अनभिज्ञ कब तक रहूं | Geet main Anabhigy Kab Tak Rahoon

    मैं अनभिज्ञ कब तक रहूं ( Main anabhigy kab tak rahoon )   मुश्किलें सर पे छाये, अपने मुझसे रुठ जाए। वाणी के तीर चलाए, बोलो मैं कब तक सहूं। मैं अनभिज्ञ कब तक रहूं मार्ग सब अवरुद्ध हो जाए, पग-पग पे तूफां आए। कोई रहे कमियां टटोलता, बात का बतंगड़ बनाए। मंझधार में अटकी…

  • दर्पण | Darpan par Chhand

    दर्पण ( Darpan )   गोरा गोरा गाल गोरी, दर्पण रही निहार। सांवरी सूरत मोहि, मोहन रिझाइए। हाथों में ले गगरिया, गांव चली गुजरिया। दर्पण सा मन मेरा, प्रियतम आइए। चाल चले मतवाली, चंचल नैनो वाली। मन में हिलोरें लेती, आईना दिखाइए। दर्पण दिखा देता है, मन में छिपे भावों को। फागुन महीना आया, फाग…

  • भारत महान | Kavita Bharat Mahan

    भारत महान ! ( Bharat Mahan )    तुम नफरतों से कितना नुकसान कर गए, हिन्दुस्तान थे क्यों पाकिस्तान बन गए। मोहब्बत की मिट्टी का नाम है हिन्दुस्तान, मगर दिये तुम्हारे घाव निशान बन गए। दौलत की हो बारिश ऐसा खुदा करे, लेकिन तू जख्मों की खान बन गए। तरक्की पसंद मुल्क है भारत महान,…