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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Shatranj par Kavita
    कविताएँ

    शतरंज | Shatranj par Kavita

    ByAdmin February 2, 2023

    शतरंज ( Shatranj )    भारत देश के पुरानें खेलों में से एक यह शतरंज, जिसकी उत्पत्ति यही हुई जिसे कहते थें चतुरंग। लेख व आलेख मिलेंगे जिसके भारतीय ग्रंथों में, आगे चलकर ये चतुरंग खेल कहलाया शतरंज।। पहले जिसको खेला करते थें वो राजा महाराजा, जिसमें भरपूर-बुद्धि का यह प्रयोग किया जाता। उब चुके…

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  • Ghazal on Life in Hindi
    शेरो-शायरी

    तुम्हारे पांव की बेड़ी तुम्हें ही काटनी होगी | Ghazal on Life in Hindi

    ByAdmin February 2, 2023

    तुम्हारे पांव की बेड़ी तुम्हें ही काटनी होगी ( Tumhare paon ki bedi tumhen hi katni hogi )   बुजुर्गों के चरण-वंदन में जब तक सर नहीं आते। नये इतिहास रचने के सुखद अवसर नहीं आते मधुर व्यवहार ही कश्ती किनारे तक लगाती है समंदर से तो पत्थर तैरकर बाहर नहीं आते । मजारों पर…

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  • Kavita Dhalti Jawani
    कविताएँ

    ढ़लती जवानी | Kavita Dhalti Jawani

    ByAdmin February 2, 2023

    ढ़लती जवानी ( Dhalti jawani )    मेंरे भाई अब यह उम्र ढ़लती जा रही है, इन हड्डियों से माॅंस अब कम हो रहा है। ये बाल भी काले रंग से सफ़ेद हो रहें है, टांगों में भी दर्द अब यह शुरु हो रहा है।। अब भागना और दौड़ना दूर की बात है, पैदल चलने…

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  • Kaan par Kavita
    कविताएँ

    मैं कान हूॅं | Kaan par Kavita

    ByAdmin February 2, 2023

    मैं कान हूॅं ( Main kaan hooain )    हाॅं जनाब मैं कान हूॅं लेकिन आजकल परेशान हूॅं, मेरी समस्याऍं बहुत सारी है इसीलिए मैं हैरान हूॅं। मुझको जिम्मेदारियाॅं सिर्फ सुनने की ही दी गई है, इसीलिए ताली गाली अच्छा बुरा सुनता रहता हूॅं।। मैं अपना दुःख व दर्द किसी को नहीं बता सकता, न…

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  • Geet Vartman mein
    गीत

    वर्तमान में जी नहीं पाया | Geet Vartman mein

    ByAdmin February 2, 2023February 2, 2023

    वर्तमान में जी नहीं पाया ( Vartman mein jee nahin paya )   भविष्य के भंवर में भटका, वर्तमान में जी नहीं पाया। सुख की ठौर रहा ढूंढता, पल भर का भी चैन ना आया। कालचक्र व्यूह जाल में, घटनाक्रम क्या-क्या समाया। जो सच का आभास कराएं, नैनो ने वही भरम बताया। वर्तमान में जी…

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  • Laghu Katha Anpadh charwaha
    कहानियां

    अनपढ़ चरवाहा | Laghu Katha Anpadh charwaha

    ByAdmin February 2, 2023February 2, 2023

    अनपढ़ चरवाहा ( Anpadh charwaha )    “अरे छिगनू काका!” “आप खाना बना रहे हो ?” “यह काम तो घर की औरतों का है, फिर आप क्यों ?” स्कूल से घर जाति प्रिया ने आश्चर्य से पूछा। “बेटा, हम घुमक्कड़ लोग है। हमारा काम गाय, भेड़ और ऊँटों को घूमते हुए पालना व उन्हें बेचकर…

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  • Vasant Aagman par Kavita
    कविताएँ

    वसंत आगमन | Vasant Aagman par Kavita

    ByAdmin February 1, 2023February 1, 2023

    वसंत आगमन ( Vasant aagman )    कानन कुंडल घूँघर बाल ताम्ब कपोल मदनी चाल मन बसंत तन ज्वाला नज़र डगर डोरे लाल। पनघट पथ ठाढ़े पिया अरण्य नाद धड़के जिया तन तृण तरंगित हुआ करतल मुख ओढ़ लिया। आनन सुर्ख मन हरा उर में आनंद भरा पलकों के पग कांपे घूंघट पट रजत झरा।…

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  • Tatrakshak Bal par Kavita
    कविताएँ

    तटरक्षक बल | Tatrakshak Bal par Kavita

    ByAdmin February 1, 2023

    तटरक्षक बल ( Tatrakshak bal )    समुद्री सेवा प्रदान करता है तटरक्षक, डूबते की जान बचाता है तटरक्षक। तटरक्षक बल है सशस्त्र बल के ही जैसा, समुद्री कानून की रक्षा करता है तटरक्षक।   करता है नौसेना का वो महानिदेशक नेतृत्व, तालमेल से अपना फर्ज निभाता है तटरक्षक। तटरक्षक जहाज होता है नौ सेना…

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  • Poem Sath Nibhane ka Wada
    कविताएँ

    देखो साथ निभाने का वादा किया है तुमने | Poem Sath Nibhane ka Wada

    ByAdmin February 1, 2023

    देखो साथ निभाने का वादा किया है तुमने ( Dekho sath nibhane ka wada kiya hai tumne )    दिलो जान से भी ज्यादा चाहा दिल से हमने। देखो साथ निभाने का वादा किया है तुमने। तुम्हारी अदाएं प्यारी सी वो भोली सी सूरत। उतर आया हो धरती पर चांद कोई खूबसूरत। महका महका चमन…

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  • Kavita Samay ke Sang
    कविताएँ

    समय के संग कैसे दौड़ू | Kavita Samay ke Sang

    ByAdmin February 1, 2023February 1, 2023

    समय के संग कैसे दौड़ू ( Samay ke sang kaise daudoon )    वक्त निकला जा रहा तीव्र गति के साथ समय संग कैसे दौड़ू बोलो हे मेरे नाथ   शनै शनै यूं बीत रहे पल प्रतिपल दिन रात कालचक्र भी घूम रहा है बदल रहे हालात   नियति खेल निराले भांडा अभाग्य कैसे फोडूं…

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