• इन्सान तेरे-मेरे में उलझ जाता है

    ‘इन्सान तेरे-मेरे में उलझ जाता है’ हे इन्सान तू अकेला ही आता है,तथा अकेला जहाँ से चला जाता है।तू यहाँ सदैव कुछ खोता व पाता है,नित तेरे-मेरे में उलझता जाता है। हे इन्सान तू स्वयं का भाग्य-विधाता है,साँसों की चलती रहती है कहानी।मिलते तथा बिछड़ते हैं इस पथ में,तू छोड़ जाता है अपनी निशानी। केवल…

  • भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’ की कविताएं | Bhagwan Das Sharma Poetry

    मां भारती के सपूत राष्ट्र सेवा में समर्पित,दीप बनकर मैं जलूं।तुम भी सेवा भाव रखो,देश दीपक में बनूं।। बनूं दीपक भारती के,पुण्य वैभव गान का।जन्म पावन इस धरा पे,ईश्वरीय वरदान का।। कामना पुनः जन्म लूं तो,देश भारत में जनूं।तुम भी सेवा भाव रखो,देश दीपक मैं बनूं।। सजग प्रहरी बन खड़े जो,देश का अभिमान है।हो गए…

  • माँ का भय

    माँ का भय मैंने बेटा जनाप्रसव पीड़ा भूल गयी वह धीरे-धीरे हँसने-रोने लगामैंने स्त्री होना बिसरा दिया उसने तुतली भाषा में माँ कहामैं हवा बनकर बहने लगी वह जवान हुआमैं उसके पैरों तले की मिट्टी वारती फिरूँ उसके सिर सेहरा बंधामुझे याद आयामैं भी एक रोज ब्याहकर आयी थीइसके पिता संग कुछ दिनों बाद मैंने…

  • ग्रहों का कुंभ

    ग्रहों का कुंभ नीलाभित नभ में लगा, कुंभ ग्रहों का मीत।रूप राशि शशि को पुलक शुक्र निहारे रीत।। दिनकर हँस स्वागत करे, उषा रश्मि शुभ स्नान।सिंहासन आसीन गुरु, पा श्रद्धा-सम्मान।। राई-नौन लिए शनि, नजर उतारे मौन।बुध सतर्क हो खोजता, राहु-केतु हैं कौन? मंगल थानेदार ने, दिया अमंगल रोक।जन-गण जमघट सितारे, पूज रहे आलोक।। हर्षल को…

  • इतिहास बदल कर रख दूंगा

    इतिहास बदल कर रख दूंगा माना अभी नहीं उछला है,सिक्का मेरी किस्मत का,पर जिस दिन ये उछलेगा, इतिहास बदल कर रख दूंगा. पत्थर पर पत्थर लगते हैं,सपने टूटा करते हैं.खुद से रोज बिखर जाते हैं,खुद हीं जुटा करते हैं. बादल, बिजली, तूफानों को,झेल – झेल कर बड़े हुए.काल कर्म की चक्की में,अक्सर हम कूटा करते…

  • हमारे नेता जी

    हमारे नेता जी 23 जनवरी 1897 को कटक उड़ीसा में जन्म हुआ,जो पढ़ लिखकर अपने कला कौशल से अंबर छुआ।पिता जानकी नाथ बोस मां प्रभावती का पुत्र था जो,आजाद हिंद फौज बनाई और जय हिंद का नारा दिया।। देखकर भारत मां की दुर्दशा को बौखला गए नेताजी,1942 में आजाद हिंद फौज का गठन किए नेताजी…

  • राम के ही जाप से

    राम के ही जाप से है अवध बलिहारी, पधारे है धनुर्धारी,दूर है अब अयोध्या, वियोग के शाप से, राम हैं पधारे जब, धन्य हुआ जग सब,गूँज उठा जयकारा, नगाड़े के थाप से, मान और नाम मिला, फूल सा जीवन खिला,भाग्य मेरे खुल गए, राम के ही जाप से। कर जोर भजूं राम, पावन तुम्हारा नाम,करना…

  • कागा काव्य किरन | Kaga Kavya Kiran

    मज़दूर दिस एक मई मज़दूर दिवस मोज मस्ती से मनायें,अपना भविष्य मज़दूर दिवस शानो शोक्त से मनाये। करते ख़ून पसीने की कमाई हाढ़ तोड़ ह़लाल,तपती धूप दुपहरी में अपनी अच्छी बस्ती बनायें। सर्दी में ठिठुर अलाव पर हाथ पैर तपाते,तन बदन पर पहने फट्टे चीत्थड़े हस्ती बनायें। धूल भरी चलती आंधियां सरपट लू के थपेड़े,बरसे…

  • सुभाष चंद्र बोस : Poem on Subhash Chandra Bose

    सुभाष चंद्र बोस शायद सदियों में होती हैंपूरी एक तलाश,शायद विश्वासों को होतातब जाकर विश्वास। शायद होते आज वो जिंदाभारत यूं ना होता,शायद दुश्मन फूट-फूट करखून के आँसू रोता। आजादी की भेंट चढ़ गयेहुआ अमर बलिदान,श्रद्धा पूर्वक नमन आपकोहे वीरों की शान। मोल असल इस आजादी कीआपने हीं समझाया,दिया जवाब हर इक ईंटों कापत्थर बन…

  • भारत कहलाता है

    भारत कहलाता है धर्म-जात का भेद भुलाके , नागरिक हाथ मिलाता है, मुस्लिम-हिन्दू-सिख-इसाई का कोई नहीं कहलाता है । सभी जन को सिर्फ भारतवादी कहा जाता है, ऐसा किस्सा जनाब सिर्फ मेरे भारत में देखा जाता है। जहां अत्यंत हुबियाली से गणतंत्रता-स्वतंत्रता को मनाया जाता है, 21 तोपों की सलामी देकर भारतीय तिरंगा लहराया जाता…