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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Mrityu bhoj par kavita
    कविताएँ

    मृत्यु का भोज | Mrityu bhoj par kavita

    ByAdmin November 29, 2022November 29, 2022

    मृत्यु का भोज ( Mrityu ka bhoj )    मानों बात आज नव युवक लोग, बन्द कर दो यह मृत्यु का भोज। चला रहें है इसको ये पुराने लोग, आज तुम सभी पढ़े-लिखे लोग।।   जीवित पिता  को एक रोटी नही, मृत्यु पर जिमाते आप लोग कई। अपना समय तुम सभी भूल गये, खिलाते थें…

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  • Hanuman ji kavita
    कविताएँ

    राम दूत हनुमान | Hanuman ji kavita

    ByAdmin November 29, 2022

    राम दूत हनुमान ( Ram doot hanuman )    शंकर भोलेनाथ के आप ग्यारवें रूद्र अवतार, मंगलवार व शनिवार ये दोनों है आपके वार। जो नर-नारी श्रृद्धा से यह लेता आपका नाम, बन जातें है बिगडे़ हुऐ उसके सारे वह काम।।   माता अंजनी के पुत्र और श्रीराम प्रभु के दूत, बचपन में सूरज को…

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  • Pyar bhari kavita in Hindi
    कविताएँ

    कमल पुष्प पल्लवित हो | Pyar bhari kavita in Hindi

    ByAdmin November 29, 2022November 30, 2022

    कमल पुष्प पल्लवित हो ( Kamal pushp pallavit ho )    मंद पवन का सरगम हो जल की सतह स्थिर हो खामोशी का आलम हो जल के अंदर हलचल हो पंछियों का कलरव हो भागी भागी जिंदगी से दो पल तेरा साथ हो ना मैं बोलूं ना तू बोले चट्टानों पर बैठ कभी प्रकृति का…

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  • Sita ram vivah par kavita
    कविताएँ

    श्री राम सिया विवाह | Sita ram vivah par kavita

    ByAdmin November 28, 2022November 28, 2022

    श्री राम सिया विवाह ( Shree ram siya vivah )   सम्पूर्ण रामचरित मानस का पाठ करें, श्री रामसिया विवाह का गुणगान करें। यह पारिवारिक जीवन सुखमय बनाएं, भगवान राम सिया की आराधना करें।   भव्य मण्डप सजा था विवाहोत्सव का, शुभमुहूर्त मार्ग शीर्ष शुक्ल पंचमी का। माता जानकी का आशीर्वाद ले जाना, दशरथ नन्दन…

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  • Essay in Hindi on India and Human Rights
    निबंध

    निबंध : भारत एवं मानवाधिकार | Essay in Hindi on India and Human Rights

    ByAdmin November 28, 2022February 26, 2023

    निबंध : भारत एवं मानवाधिकार ( Essay in Hindi on India and Human Rights )  मानवाधिकार की पृष्ठभूमि ( Human rights background in Hindi ) :-   हर साल 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के तौर पर मनाया जाता है। मानवाधिकार की अवधारणा भले ही नयी लगती हैं लेकिन इसकी अवधारणा मानवजाति के लिए काफी…

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  • Poem on parindey
    कविताएँ

    अब रहते नहीं परिन्दे | Poem on parindey

    ByAdmin November 28, 2022November 28, 2022

    अब रहते नहीं परिन्दे ( Ab rahte nahi parindey )    क्यों ख़त्म कर रहे हो मेरे खुशबुओं का डेरा, अब रहते नहीं परिन्दे, उनका नहीं बसेरा। सब कुछ दिया है हमने, लेना मुझे न आता, मेरी पेड़ की है दुनिया,तू क्यों मुझे रुलाता? चंदा की चाँदनी भी देखो हुई है घायल, वादी सिसक रही…

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  • Humsafar par kavita
    कविताएँ

    हमसफर | Humsafar par kavita

    ByAdmin November 28, 2022

    हमसफर ( Humsafar )    दो अजनबी बन गए हमसफर चल पड़े नई डगर प्यार के पंख ले सिलसिले चल पड़े एक दूसरे को वो बखूबी समझते रहे एक दूसरे का सम्मान आपस में करते रहे जीवन में रिश्तो के हर रंग भरते रहे कदम दर कदम आगे बढ़ते रहे कुछ मैंने कहा वह उसने…

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  • Chhand pulkit
    छंद

    पुलकित | Chhand pulkit

    ByAdmin November 28, 2022

    पुलकित ( Pulkit )  जलहरण घनाक्षरी   कोना कोना पुलकित, सौंधी चली पुरवाई, नव पल्लव बगिया छाई उमंगे भावन। घट घट उल्लास हो, महकती फुलवारी, नजारे मनभावन, चहक उठा सावन। खुशहाली आनंद से, सबकी झोली भरता, गीत बने अधरों पे, ईश्वर नाम पावन। लहर लहर नदी, सागर उमड़ा आता, मनमोहक मुस्कान, पुलकित रहे मन।  …

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  • Kavita acha hua dost
    कविताएँ

    अच्छा हुआ दोस्त | Kavita acha hua dost

    ByAdmin November 28, 2022November 28, 2022

    अच्छा हुआ दोस्त ( Acha hua dost )    अच्छा हुआ दोस्त, जो भ्रम टूट गया साथ होने का तेरा वादा, जो अब छूट गया ।। तुझे बादशाही मुबारक तेरे शहर की, मुझे मेरे गांव का मुसाफिर ही रहने दे ।। अच्छा हुआ चलन नहीं रहा अब किसी के विश्वास का खुद के खुदा को…

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  • Kavita patthar
    कविताएँ

    पत्थर | Kavita patthar

    ByAdmin November 28, 2022

    पत्थर ( Patthar )    उकेरते जाते हैं अक्स, तो सितम ढाती हैं छैनी यहां दर्द की परिभाषा मेरी ,जाने भला कौन हूं मोन ही बस मोन।।   बिखरी पड़ी है इमारतों पर कई सालो से भाषाओं की , उकेरी गई हर प्रतिलिपि यहां मेरी दर्द की तस्वीर की तरह ।।   में तराशा गया…

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