Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Hindi kavita on motivation
    कविताएँ

    अब ख़ुद ही निखरना है | Hindi kavita on motivation

    ByAdmin November 26, 2022November 26, 2022

    अब ख़ुद ही निखरना है ( Ab khud hi nikharna hai )   अपनें आपको तपाकर अब ख़ुद ही निखरना है, उलझनों को सुलझाकर आगे बढ़ते ही रहना है। राह भले ही मुश्किलों की हो पर चलतें जाना है, अब यें कीमती वक्त स्वयं पर ही ख़र्च करना है।।   साहस एवं हिम्मत से हर…

    Read More अब ख़ुद ही निखरना है | Hindi kavita on motivationContinue

  • Kavita jeene ke liye
    कविताएँ

    जीने के लिए | Kavita jeene ke liye

    ByAdmin November 26, 2022

    जीने के लिए  ( Jeene ke liye )    कक्षा में बिल्कुल पीछे पिछले सीट पर मैला कुचैला निराश उदास बैठा सबसे दूर, न कापी न कलम न पढ़ने का मन, मैंने डांटा धमकाया पर दबा दबा सा मुझे देखा देखता रहा अंततः कुछ न बोला, फिर प्यार से स्नेह और दुलार से पूछा, उसने…

    Read More जीने के लिए | Kavita jeene ke liyeContinue

  • Ghar par kavita
    कविताएँ

    घर | Ghar par kavita

    ByAdmin November 26, 2022

    घर ( Ghar )   सोने बैठने रहने का ठिकाना है सबसे सुंदर आशियाना है घर।। जहां मां बाप भाई हैं बेटा बेटी और लुगाई है जहां अपने है जीवन के सपने हैं जहां हर तरह का बहाना है ऐसा ठिकाना है घर….. थक हार कर जब स्कूल से आते हैं घर पर ही आराम…

    Read More घर | Ghar par kavitaContinue

  • Kavita salika sikhayenge
    कविताएँ

    सलीका सिखाएँगे | Kavita salika sikhayenge

    ByAdmin November 26, 2022November 26, 2022

    सलीका सिखाएँगे! ( Salika sikhayenge )   हम सिर्फ जिन्दा रहे,तो मर जाएँगे, देश के लिए जिएँ, तो जी जाएँगे। मुबारक हो उन्हें जो सोते रुपयों पे, हम तो वहाँ खाली हाथ जाएँगे।   तुम खफा न हो जमीं-आसमां से, हम सितारे जमीं पे उतार लाएँगे। अपने बसेरों से पंछी लौट न जाएँ, हम उनका…

    Read More सलीका सिखाएँगे | Kavita salika sikhayengeContinue

  • Samvidhan divas par kavita
    कविताएँ

    संविधान दिवस | Samvidhan Divas par Kavita

    ByAdmin November 26, 2022November 26, 2023

    संविधान दिवस ( Samvidhan divas )  ( 2 )   प्रेरणा पुंज आभा में, हिंद धरा अभिजागर यथार्थ स्वतंत्रता परम प्रहरी, हर नागरिक हित रक्षक । शासन प्रशासन उत्तम सेवा, अंकुश राष्ट्र संसाधन भक्षक । लिखित प्रथम वैश्विक पटल, सांविधिक समाहर्ता महासागर । प्रेरणा पुंज आभा में, हिंद धरा अभिजागर ।। अनूप प्रयास अंबेडकर, सर्व…

    Read More संविधान दिवस | Samvidhan Divas par KavitaContinue

  • Poem ghanta ghar ki char ghadi
    कविताएँ

    घंटाघर की चार घड़ी | Poem ghanta ghar ki char ghadi

    ByAdmin November 26, 2022November 26, 2022

    घंटाघर की चार घड़ी ( Ghanta ghar ki char ghadi )   घंटाघर की चार घड़ी, चारो में जंजीर पड़ी। जब वो घंटा बजता था, रेल का बाबू हंसता था।।   हंसता था वो बेधड़क, आगे देखो नई सड़क। नई सड़क मे बोया बाजरा, आगे देखो दिल्ली शाहदरा।।   दिल्ली शाहदरा में लग गई आग,…

    Read More घंटाघर की चार घड़ी | Poem ghanta ghar ki char ghadiContinue

  • Hindi muktak
    कविताएँ

    शीत | Hindi muktak

    ByAdmin November 25, 2022

    शीत ( Sheet )   सर्द हवाएं ठंडी ठंडी तन ठिठुरन सी हो जाती है कंपकंपी छूटती तन बदन में सर्दी खूब सताती है ठंडा माह दिसंबर का सर्दी का कोप बड़ा भारी कोहरा धुंध ओस छा जाये बर्फबारी हो जाती है।   बस दुबके रहो रजाई में अलाव कहीं जला देना स्वेटर मफलर कोट…

    Read More शीत | Hindi muktakContinue

  • Jeevan par Hindi kavita
    कविताएँ

    जीवन की परिभाषा | Jeevan par Hindi kavita

    ByAdmin November 25, 2022

    जीवन की परिभाषा ( Jeevan ki paribhasha )   हां! हम हर बात को बोलते है डंके की चोट, नही है हमारे मन में किसी प्रकार की खोट। पीठ- पीछे बोलें ऐसी आदतें नही है हमारी, चाहें रुठ जाऐ दुनियां अथवा बांटे हमें नोट।।   सही को सही एवं गलत को गलत है कहते, समझने…

    Read More जीवन की परिभाषा | Jeevan par Hindi kavitaContinue

  • Geet in Hindi
    कविताएँ

    क्या चाहती हो सुन्दर नारी | Geet in Hindi

    ByAdmin November 25, 2022November 25, 2022

    क्या चाहती हो सुन्दर नारी ( Kya chahti ho sundar nari )   क्या चाहती हो सुंदर नारी विश्वास प्रेम से भरी हुई तुम राग प्रीत की मूरत हो जग को जीवन देने वाली क्यूं पीले पात सुखी आशा दामन में अपने रखती हो क्यूं जुगनू सी धीमे चलकर हर पल आगे तुम बढ़तीहो क्यूँ…

    Read More क्या चाहती हो सुन्दर नारी | Geet in HindiContinue

  • Darpan par kavita
    कविताएँ

    दर्पण कभी झूठ नही बोलता | Darpan par kavita

    ByAdmin November 24, 2022November 24, 2022

     दर्पण कभी झूठ नही बोलता ( Darpan kabhi jhooth nahi bolta )    दर्पण कभी कोई झूठ नही बोलता, पक्षपात यें किसी से भी ना करता। जैसा है वैसा यें प्रतिबिम्ब दिखाता, जो इसमें देखता ‌इठलाता-शर्माता।।   सामनें आकर सभी इसके सॅंवरता, बहुत ही गहरा इससे सबका नाता। अनेंको चेहरे यह बनाकर दिखाता, दर्पण कभी…

    Read More दर्पण कभी झूठ नही बोलता | Darpan par kavitaContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 540 541 542 543 544 … 835 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search