• जीने के लिए | Kavita jeene ke liye

    जीने के लिए  ( Jeene ke liye )    कक्षा में बिल्कुल पीछे पिछले सीट पर मैला कुचैला निराश उदास बैठा सबसे दूर, न कापी न कलम न पढ़ने का मन, मैंने डांटा धमकाया पर दबा दबा सा मुझे देखा देखता रहा अंततः कुछ न बोला, फिर प्यार से स्नेह और दुलार से पूछा, उसने…

  • घर | Ghar par kavita

    घर ( Ghar )   सोने बैठने रहने का ठिकाना है सबसे सुंदर आशियाना है घर।। जहां मां बाप भाई हैं बेटा बेटी और लुगाई है जहां अपने है जीवन के सपने हैं जहां हर तरह का बहाना है ऐसा ठिकाना है घर….. थक हार कर जब स्कूल से आते हैं घर पर ही आराम…

  • सलीका सिखाएँगे | Kavita salika sikhayenge

    सलीका सिखाएँगे! ( Salika sikhayenge )   हम सिर्फ जिन्दा रहे,तो मर जाएँगे, देश के लिए जिएँ, तो जी जाएँगे। मुबारक हो उन्हें जो सोते रुपयों पे, हम तो वहाँ खाली हाथ जाएँगे।   तुम खफा न हो जमीं-आसमां से, हम सितारे जमीं पे उतार लाएँगे। अपने बसेरों से पंछी लौट न जाएँ, हम उनका…

  • संविधान दिवस | Samvidhan Divas par Kavita

    संविधान दिवस ( Samvidhan divas )  ( 2 )   प्रेरणा पुंज आभा में, हिंद धरा अभिजागर यथार्थ स्वतंत्रता परम प्रहरी, हर नागरिक हित रक्षक । शासन प्रशासन उत्तम सेवा, अंकुश राष्ट्र संसाधन भक्षक । लिखित प्रथम वैश्विक पटल, सांविधिक समाहर्ता महासागर । प्रेरणा पुंज आभा में, हिंद धरा अभिजागर ।। अनूप प्रयास अंबेडकर, सर्व…

  • घंटाघर की चार घड़ी | Poem ghanta ghar ki char ghadi

    घंटाघर की चार घड़ी ( Ghanta ghar ki char ghadi )   घंटाघर की चार घड़ी, चारो में जंजीर पड़ी। जब वो घंटा बजता था, रेल का बाबू हंसता था।।   हंसता था वो बेधड़क, आगे देखो नई सड़क। नई सड़क मे बोया बाजरा, आगे देखो दिल्ली शाहदरा।।   दिल्ली शाहदरा में लग गई आग,…

  • शीत | Hindi muktak

    शीत ( Sheet )   सर्द हवाएं ठंडी ठंडी तन ठिठुरन सी हो जाती है कंपकंपी छूटती तन बदन में सर्दी खूब सताती है ठंडा माह दिसंबर का सर्दी का कोप बड़ा भारी कोहरा धुंध ओस छा जाये बर्फबारी हो जाती है।   बस दुबके रहो रजाई में अलाव कहीं जला देना स्वेटर मफलर कोट…

  • जीवन की परिभाषा | Jeevan par Hindi kavita

    जीवन की परिभाषा ( Jeevan ki paribhasha )   हां! हम हर बात को बोलते है डंके की चोट, नही है हमारे मन में किसी प्रकार की खोट। पीठ- पीछे बोलें ऐसी आदतें नही है हमारी, चाहें रुठ जाऐ दुनियां अथवा बांटे हमें नोट।।   सही को सही एवं गलत को गलत है कहते, समझने…

  • क्या चाहती हो सुन्दर नारी | Geet in Hindi

    क्या चाहती हो सुन्दर नारी ( Kya chahti ho sundar nari )   क्या चाहती हो सुंदर नारी विश्वास प्रेम से भरी हुई तुम राग प्रीत की मूरत हो जग को जीवन देने वाली क्यूं पीले पात सुखी आशा दामन में अपने रखती हो क्यूं जुगनू सी धीमे चलकर हर पल आगे तुम बढ़तीहो क्यूँ…

  • दर्पण कभी झूठ नही बोलता | Darpan par kavita

     दर्पण कभी झूठ नही बोलता ( Darpan kabhi jhooth nahi bolta )    दर्पण कभी कोई झूठ नही बोलता, पक्षपात यें किसी से भी ना करता। जैसा है वैसा यें प्रतिबिम्ब दिखाता, जो इसमें देखता ‌इठलाता-शर्माता।।   सामनें आकर सभी इसके सॅंवरता, बहुत ही गहरा इससे सबका नाता। अनेंको चेहरे यह बनाकर दिखाता, दर्पण कभी…

  • जाड़ा आया | Kavita Jada aaya

    जाड़ा आया  ( Jada aaya )   आया जाड़ा की ऋतु प्यारा बदल गया है मौसम सारा फसल पाकि गय कटि गय धान ढोंइ अनाज लइ जाय किसान पड़य शीत खूब ठरै बयार कबहूं पाला कबहुं तुषार शीत ठरै कापैं पशु पक्षी धूप लगै तब तन को अच्छी जाड़े की हैं बात निराली धूप लगे…