Poem zameer

ज़मीर | Poem zameer

ज़मीर

( Zameer )

 

आज फिर से ज़मीर का इक सवाल उठाती हूं
मंचासीन के कानों तक ये आवाज़ पहुंचाती हूं

 

उनके स्वार्थ से बुझ गए हैं कुछ दीप खुशियों के
ज़रा ठहरो कि पहले उनकी ज्योत जलाती हूं।

 

बना कर कुटुम्ब विशाल फिर क्यूँ आपस में लड़ते हो
जिम्मेदारियाँ निभाने की बजाय क्यूँ चाल चलते हो

 

बंद करो अब तो समाज सेवा का ये राग अलापना
हड़पकर भी तख्त फिर क्यूँ औरों की मेहनत से जलते हो।

 

❣️

बी सोनी 

( आविष्कारक )

यह भी पढ़ें :-

प्रकृति | Prakriti par Kavita

Similar Posts

  • कथा रिटायरमेंट की

    कथा रिटायरमेंट की ( हास्य ) .लाली जी कर घोषणा, हुई रिटायर आज।सब सुन लो खुद ही करो, अपना अपना काज।।मैं न करूँ अब काम कुछ, मलो हाथ अरु पैर।मेरे काम सभी करो, तभी मनेगी खैर।।लालू चौके में गए, पुलक पकाई खीर।छौंका राई-हींग से, लाली भईं अधीर।।लल्ला ने सोचा करें, मम्मा को इम्प्रैस।सिंथेटिक साड़ी बिछा,…

  • तब्दीली | Tabdeeli

    तब्दीली ( Tabdeeli )   आपके शब्द , नीयत और कर्म समय की दीवार से टकराकर लौटते ही हैं आप तक यहां आपका बाली या सामर्थ्य कोई मायने नहीं रखता मजबूर के मुंह से बोल नही फूटते किंतु,उसकी आह जला देती है किसी के भी सामर्थ्य को वक्त किसी को माफ नही करता चट्टानें भी…

  • खुशियों की फुलझड़ी जलाओ | Deepawali ke geet

    खुशियों की फुलझड़ी जलाओ ( Khushiyon ki phuljhadi jalao )   आई दिवाली नाचो गाओ खुशियों की फुलझड़ी जलाओ दीप प्रेम के रोशन करते स्वागत में सब घर सजाओ खुशियों की फुलझड़ी जलाओ   प्यार के मोती जग लुटाओ स्नेह सुधारस खूब बहाओ दीन हीन को गले लगाकर मानवता का धर्म निभाओ खुशियों की फुलझड़ी…

  • कैसे हो | Hasya Ras ki Kavita

    कैसे हो ( Kaise ho )    दांत में दर्द हो रहा बेशुमार चला गया डॉक्टर के द्वार इलाज करवाना है पैसे दो उखाड़े दांत बोला कैसे हो परीक्षा पेपर मिला तेजतर्रार परीक्षक भी मिला होशियार हल हो पाए प्रश्न जैसे तैसे दो बाहर से टीचर बोला कैसे हो शादी बड़ी धूमधाम से मन रही…

  • अग्निपथ पर अग्निवीर | Agnipath par Agniveer

    अग्निपथ पर अग्निवीर ( Agnipath par agniveer )    भारतीय सेना के तीनों अंगों में युवाओं की भर्ती, ४६ हजार नव-युवक होंगे हर साल में यह भर्ती। बेहतर प्रदर्शन वालों को होगा स्थाई ‌का अवसर, पदक-सम्मान भी मिलेगा नौजवानों देखो भर्ती।। अब कहने को कोई शब्द नही आज हमारे पास, ख़्वाब सबका पूरा होगा और…

  • रैग पिकर और फैशनपुतला | Kavita Ragpicker

    रैग पिकर और फैशनपुतला पहने हो अति सुंदर कपड़े, पुतले बन कर खड़े हुए । फैशन की इस चकाचौंध में, भरमाने पर अड़े हुए ।। मैंने कचरे से बीना है, बोरा परिधान देख लो । मैं नंगा भी तुमसे सुंदर, ध्यान लगा मुझे देख लो।। तुम में मुझमें फर्क यही तुम, प्राणहीन मैं जीवित नर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *