Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Nazar pher kar chale kahan
    कविताएँ

    नजर फेर कर चले कहां | Nazar pher kar chale kahan

    ByAdmin July 17, 2022

    नजर फेर कर चले कहां ( Nazar pher kar chale kahan )   महक रही मस्त हवाये चमन खिले हम मिले जहां ओ मनमौजी छोड़ हमें नजर फेरकर चले कहां   याद करो पल सुहाने मनमीत मिले तो चैन मिले इक दूजे के नयन दमकते नैन मिले तो रैन खिले   दिल की हसरतें ख्वाब…

    Read More नजर फेर कर चले कहां | Nazar pher kar chale kahanContinue

  • Kavita ki jhankar
    कविताएँ

    कविता की झंकार | Kavita ki jhankar

    ByAdmin July 16, 2022

    कविता की झंकार ( Kavita ki jhankar )   तुकबंदी करते-करते कविता भी करनी आई अल्फाजों ने जादू फेरा मन में उमंग जगाई   शब्दों की माला पिरोता महके महफिल सारी गीतों की लड़ियों से गूंजती वो केसर क्यारी   भाव भंगिमा सुरताल साज बाज अल्फाज काव्य धारा में बह जाए अंतर्मन छिपे राज  …

    Read More कविता की झंकार | Kavita ki jhankarContinue

  • Kavita main aur woh aasha
    कविताएँ

    मैं और वो आशा | Kavita main aur woh aasha

    ByAdmin July 16, 2022

    मैं और वो आशा ( Main aur woh aasha )   मैं जूझ रहा तूफानों में आंधी और वीरानो में रेतीले धोरों में उंची घाटियों और चट्टानों में   एक आशा की किरण मुझे साहस संबल दे रही राह की बाधाएं मेरी पग पग पे परीक्षा ले रही     मन में आस जगाए मैं…

    Read More मैं और वो आशा | Kavita main aur woh aashaContinue

  • Parvat parvat shikhar shrinkhala
    कहानियां

    पर्वत पर्वत शिखर श्रृंखला | Parvat parvat shikhar shrinkhala

    ByAdmin July 16, 2022

    पर्वत पर्वत शिखर श्रृंखला ( Parvat parvat shikhar shrinkhala )   पर्वत पर्वत शिखर श्रृंखला, मेघ दिखे घनघोर घटा। अवनि को अम्बर ने देखा,प्रेम मिलन की प्रथम छंटा। आएगी ऋतु बार बार पर, प्रियतम बोलो कब आओगे, कल कल छल छल निर्मल जल,सागर मे मिलती खोल जटा।   उपरोक्त कविता सुनने के लिए ऊपर के…

    Read More पर्वत पर्वत शिखर श्रृंखला | Parvat parvat shikhar shrinkhalaContinue

  • Sabse juda apni ada
    कविताएँ

    सबसे जुदा अपनी अदा | Sabse juda apni ada | Kavita

    ByAdmin July 16, 2022

    सबसे जुदा अपनी अदा ( Sabse juda apni ada )   सबसे जुदा अपनी अदा लगे मनभावन सी। इठलाती बलखाती और बरसते सावन सी।   हंसता मुस्कुराता चेहरा अंदाज निराला है। खुशियों में झूमता सदा बंदा मतवाला है।   मदमस्त चलता चाल मनभावन से नजारे हैं। सारी दुनिया से हटकर नखरे उसके न्यारे हैं।  …

    Read More सबसे जुदा अपनी अदा | Sabse juda apni ada | KavitaContinue

  • Poem waqt
    कविताएँ

    वक्त | Poem waqt

    ByAdmin July 16, 2022October 22, 2022

    वक्त ( Waqt )   वक्त से ना बड़ा कोई पहले हुआ, वक्त से ना बड़ा कोई हो पायेगा। वक्त से कोई पहले हँस ना सका, वक्त से कोई पहले ना रो पायेगा।।   ना किसी के लिए रुका है कभी ना किसी के लिए झुका है कभी उसके अंतस में क्या है समझ न…

    Read More वक्त | Poem waqtContinue

  • Poem aayi mast baharen
    कविताएँ

    आई मस्त बहारें | Poem aayi mast baharen

    ByAdmin July 14, 2022July 14, 2022

    आई मस्त बहारें ( Aayi mast baharen )   लो आई मस्त बहारें, गली-गली द्वारे द्वारे। सावन के झूले लगे, झूम झूम नाचे सारे।   हर हर महादेव, हे सब देवों के देव। जग के है करतार, वो भोलेनाथ हमारे।   सावन बरसे पानी, रिमझिम झड़ी लगे। घटाएं गगन छाए, मस्तानी चले बयारें।   उर…

    Read More आई मस्त बहारें | Poem aayi mast baharenContinue

  • Kitne kar chukaye
    कविताएँ

    कितने कर चुकाये | Kitne kar chukaye

    ByAdmin July 14, 2022

    कितने कर चुकाये ( Kitne kar chukaye )   आयकर खाय कर खरीद कर पक गए आम आदमी यहां कर चुकाते थक गए   भूमिकर मकान कर संग दुकान कर दे दिया कितना कमाया उसका भी कर ले लिया   खरीद कर बेच कर सेवा कर रुक गए कितने कर चुकाये कर चुकाते थक गए…

    Read More कितने कर चुकाये | Kitne kar chukayeContinue

  • Poem rugn jeevan
    कविताएँ

    रुग्ण जीवन | Poem rugn jeevan

    ByAdmin July 14, 2022

    रुग्ण जीवन ( Rugn Jeevan )   इस रूग्ण जीवन का मेरे विस्तार है, हर शक्स ही मेरा यहाँ उस्ताद है।   समझो अगर तो वाह ना तो आह है, अब जिन्दगी से जंग ही किताब है॥   जो कागजो पे ना लिखा वो बात हैं, शिक्षा बिना भी क्या कोई इन्सान है।   कर…

    Read More रुग्ण जीवन | Poem rugn jeevanContinue

  • Guru par kavita
    कविताएँ

    गुरु नमन | Guru par kavita

    ByAdmin July 13, 2022

    गुरु नमन ( Guru Naman )   गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है। सारे जहां की खुशी मिल गई है।। अनमोल मोती भरा सिंधु सारा। दमकता सूरज गुरु भाग्य सितारा।। मिले वरदहस्त किस्मत खुल गई है। गुरु क्या मिले जिंदगी मिल गई है।। अंगुली पकड़कर रास्ता दिखलाया। दुनिया का अनुभव हमें बतलाया।। जलाया ज्ञान…

    Read More गुरु नमन | Guru par kavitaContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 583 584 585 586 587 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search