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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Varsha bhaiya bhari
    कविताएँ

    वर्षा भैया भारी | Varsha bhaiya bhari

    ByAdmin July 13, 2022October 22, 2022

    वर्षा भैया भारी ( Varsha bhaiya bhari )   शाम  शाम  के  होन  लगी  है  वर्षा  भैया भारी, जगह जगह पे छिपन लगे है सबरे नर और नारी।   कहीं हवाये, कहीं है बिजली, कहूँ बरसो है भारी, एसो  मौसम  देख  देख  के  हमरो  दिल है भारी।   हो रहो हैरान किसान हमारो आंतक मच…

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  • Bhagyaheen
    कविताएँ

    भाग्यहीन | Poem bhagyaheen

    ByAdmin July 13, 2022

    भाग्यहीन ( Bhagyaheen )   कहाँ गए रणछोड द्रौपदी, पर विपदा अब भारी है। रजस्वला तन खुले केश संग,विपद में द्रुपद कुमारी है।   पूर्व जन्म की इन्द्राणी अब,श्रापित सी महारानी है। पांच महारथियों की भार्या, धृत की जीती बाजी है।   हे केशव हे माधव सुन लो,भय भव लीन बेचारी है। नामर्दो की खुली…

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  • Dil ka bahakna
    छंद

    दिल का बहकना | Dil ka bahakna | Chhand

    ByAdmin July 13, 2022October 12, 2022

    दिल का बहकना ( Dil ka bahakna )   मनहरण घनाक्षरी   दिलकश हो नजारे, कोई हमको पुकारे। लगे स्वर्ग से सुंदर, महकती वादियां।   दिल दीवाना हो जाए, दिल कहीं पे खो जाए। प्रीत के तराने गाये, मन भाये शादियां।   झूम उठे तार सारे, बोल मीठे प्यारे प्यारे। दिल की धड़कनों में, बज…

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  • Poem man ho jab
    कविताएँ

    मन हो जब | Poem man ho jab

    ByAdmin July 12, 2022

    मन हो जब ( Man ho jab )   मन हो जब खोल लेना दरवाज़े आंखों के दिल के खड़ी दिखूंगी यूं ही इस पार फकीरन (जोगन) सी हाथ फैलाए रख देना कुछ लफ्ज़ महोब्बत के नफ़रत के रख लूंगी हाथ की लकीर समझ बिना मोल किये . . . इंतज़ार तो खत्म होगा… लेखिका…

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  • Nawalgarh ke sahityakar kavi Ramakant Soni
    साहित्यिक गतिविधि

    नवलगढ़ के साहित्यकार कवि रमाकांत सोनी की कृति काव्य के स्वर्णिम अक्षर शीघ्र ही प्रकाशित

    ByAdmin July 9, 2022July 9, 2022

    जिज्ञासा प्रकाशन गाजियाबाद से प्रकाशित काव्य कृति काव्य के स्वर्णिम अक्षर का नवलगढ़ के साहित्यकार कवि रमाकांत सोनी पुस्तक का शीघ्र ही विमोचन करेंगे। शुभचिंतकों व मित्रों ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। कवि रमाकांत सोनी वीर रस, देश भक्ति गीत, दोहा, छंद, मुक्तक आदि विधाओं में लेखन करते हैं।वे राष्ट्रीय साहित्यिक मंच शब्दाक्षर में…

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  • Dil ki mehfil sajaye baithe hain
    कविताएँ

    दिल की महफिल सजाए बैठे हैं | Dil ki mehfil sajaye baithe hain

    ByAdmin July 9, 2022July 9, 2022

    दिल की महफिल सजाए बैठे हैं ( Dil ki mehfil sajaye baithe hain )   भरी बरसात में आके आज हम नहाए बैठे हैं दिलवाले दिल की ये महफिल सजाए बैठे हैं   सुना दो गीत प्यारा सा तराना छेड़ो मनभावन मोती प्यार के बरसे आया उमड़ घुमड़ सावन वादियां महक गई सारी चमन महकाये…

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  • Soch samajh kar bol
    कविताएँ

    सोच समझकर बोल | Soch samajh kar bol | Geet

    ByAdmin July 8, 2022

    सोच समझकर बोल ( Soch samajh kar bol )   सोच समझकर बोल रे बंदे सोच समझकर बोल तिल का ताड़ बना मत बंदे मन की आंखें खोल   मीठी वाणी लगती प्यारी मधुरता से रिश्ता नाता है मधुर बोल दुनिया दीवानी तोता पिंजरे में आता है हंगामा खड़ा मत करना प्यारे मत करना रमझोल…

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  • Jidhar dekho lahoo bikhra hua hai
    शेरो-शायरी

    जिधर देखो लहू बिखरा हुआ है | Ek ghazal

    ByAdmin July 6, 2022July 5, 2022

    जिधर देखो लहू बिखरा हुआ है ( Jidhar dekho lahoo bikhra hua hai )   जिधर देखो लहूँ बिखरा हुआ है नगर में आज फ़िर दंगा हुआ है   लगी है आग नफ़रत की दिलों में यहाँ हर आशियाँ उजड़ा हुआ है   बहुत नजदीक था मेरे कभी जो उसी से ख़त्म हर रिश्ता हुआ…

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  • Insan ki pehchan
    कविताएँ

    इंसान की पहचान | Insan ki pehchan | Kavita

    ByAdmin July 5, 2022

    इंसान की पहचान ( Insan ki pehchan )   इंसान की पहचान, मानव रे जरा जान। औरों के दुख दर्द की, परवाह कीजिए।   मानव धर्म जान लो, कर्म को पहचान लो। इंसानियत ही धर्म, शुभ कर्म कीजिए।   करुणा प्रेम बरसे, हृदय सारे हरसे। होठों पे हंसी सबको, मुस्काने भी दीजिए।   दुख दर्द…

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  • Sach kamjor ho raha hai
    कविताएँ

    सच कमजोर हो रहा है | Sach kamjor ho raha hai

    ByAdmin July 4, 2022

    सच कमजोर हो रहा है ( Sach kamjor ho raha hai )   सच में , सच कमजोर हो रहा है । झूठ का ही चारो तरफ शोर हो रहा है।।   कदम कदम पर लोग खूब झूठ बोले झूठ और लूट में ईमान सबका डोले। सच का किसे ज्ञान है, झूठ का ही ध्यान…

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