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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Hindi katha
    कहानियां

    अनोखा रिश्ता | Hindi katha

    ByAdmin May 26, 2022May 26, 2022

    अनोखा रिश्ता ( Anokha rista : Hindi kahani )   कुर्सी पर बैठी 50 वर्षीय निता आग बबूला थी और गुस्से में बडबडा़ रही थी – ” इतनी मजाल कि मेरी बेटी पर हाथ उठाया? क्या समझता है अपने आप को?  मैंने कभी हाथ नहीं उठाया और ये दो साल में ही मेरी फूल सी…

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  • Kahin kisi roz
    कविताएँ

    कहीं किसी रोज | Kahin kisi roz | Kavita

    ByAdmin May 26, 2022

    कहीं किसी रोज ( Kahin kisi roz )   आओ हम चले कहीं मिले कभी किसी रोज। महफिल जमाकर बैठे मौज से करेंगे भोज। पिकनिक भ्रमण करें घूमे हसी वादियो में। झूमे नाचे गाए हम जा बेगानी शादियों में। सैर सपाटा मौज मस्ती आनंद के पल जीये। खुशियों के मोती वांटे जीवन का रस पीये।…

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  • Marwadi sahitya
    कविताएँ

    साळी दैव ओळमो | Marwadi sahitya

    ByAdmin May 26, 2022May 27, 2022

    साळी दैव ओळमो   कदे जलेबी ल्यायो ना हंस हंस क बतलायो ना वार त्योहारां आयो ना हेतु घणों बरसायो ना   मैळो कदे दिखायो ना गाड़ी म घुमायो ना घूमर घालैण आयो ना गीत सुरीला गायों ना   साळी बोली हां र जीजा आव ओळमो तन दयू जीजी रा भरतार बता दें क्यां पै…

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  • Chahe tumse bhi batiyana
    कविताएँ

    चाहें तुमसे भी बतियाना | Chahe tumse bhi batiyana | Kavita

    ByAdmin May 25, 2022

    चाहें तुमसे भी बतियाना ( Chahe tumse bhi batiyana )   नये पौधों को पानी देकर, बूढ़े बरगद को भी जाना । बूढ़े है वो अपने घर के, चाहें तुमसे भी बतियाना ।।   माना कि अब फल ना देंगे,पर अनुभव की खान है बूढ़े तेरी जो हस्ती है आज, उसकी ही पहचान है बूढ़े…

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  • Payal kavita
    कविताएँ

    पायल | Payal kavita

    ByAdmin May 25, 2022May 25, 2022

    पायल ( Payal )   कहीं सीमा का बंधन देखो कहीं रात अलबेली है पैरों की पायल है मेरी या जंजीर की बेडी है   रुके रुके कदमों से देखो अठखेली ये करती है रुनझुन रुनझुन करते करते सांझ सलोनी कटती है   छम छम करता बचपन बीता झनक झनक करते यौवन छनक छनक सी…

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  • kabhi us shahar kabhi is shahar
    कविताएँ

    कभी उस शहर कभी इस शहर | kabhi us shahar kabhi is shahar

    ByAdmin May 25, 2022

    कभी उस शहर कभी इस शहर ( Kabhi us shahar kabhi is shahar )   कभी उस शहर कभी इस शहर गरजते, बरसते आखिर कुछ बादल मेरे शहर भी आकर छा ही गये कुछ देर ही सही गरज कर बरस भी गये हवा कि चलो कुछ तल्खी कम हुई खुश्की नम हुई मौसम के बिगड़े…

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  • Nyaya harayeko desh
    विवेचना

    न्याय हराएको देश | Nepali Sahityik Rachana

    ByAdmin May 25, 2022May 25, 2022

    न्याय हराएको देश ( Nyaya harayeko desh )     यो आमा बुवा ले दिएको संकार को हार हो, यो व्यक्ति को मात्रै हार हैन, सम्पूर्ण मानव सभ्यता, यो सत्य को, यो विश्व व्यापी न्याय को, समय को, जिवन दर्शनका साथ साथै शास्वत नियम को पनि हार हो। यो एउटा निर्मला, एउटा सुष्मिता को मात्रै…

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  • Mehnat ek sadhana
    कविताएँ

    मेहनत एक साधना | Mehnat ek sadhana | kavita

    ByAdmin May 24, 2022

    मेहनत एक साधना ( Mehnat ek sadhana )   साधना और तपस्या है मेहनत खून पसीना है। कड़ा परिश्रम हौसलों से श्रम से खाना पीना है।   मेहनत एक साधना प्यारे मेहनत ही रंग लाती है। मंजिले मिलती मनोहर मुस्कान लबों पर छाती है।   हर आंधी तूफानों को जो सहज पार कर जाते हैं।…

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  • Ghazal mushkilon mein
    शेरो-शायरी

    मुश्किलों में | Ghazal mushkilon mein

    ByAdmin May 24, 2022May 24, 2022

    मुश्किलों में हर पल ही ये वुजूद रहता है ( Mushkilon mein har pal hai ye wajood rahata hai )     मुश्किलों में हर पल ही ये वुजूद रहता है दर्द शाइरी में दिल का नूमूद रहता है   रास्ता नहीं आता है नजर ख़ुशी कोई सच कहूँ यहाँ ग़म का ख़ूब  दूद रहता…

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  • Pyaas bujhe to bujhe kaise
    कविताएँ

    प्यास बुझे तो बुझे कैसे | Pyaas bujhe to bujhe kaise | Kavita

    ByAdmin May 23, 2022

    प्यास बुझे तो बुझे कैसे ( Pyaas bujhe to bujhe kaise )     प्यास बुझे तो बुझे कैसे , जो आग लगी है पानी से।   मर  रहा  इंसानियत  यहां, धर्म मजहब की कहानी से।   रो-रो  के  जिंदा  है  परिंदा, अपनी आंखों के पानी से।   घर  का  बुजुर्ग  शर्मिंदा  है, अपने बच्चों…

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