• ख़ुशी से आज़म बदनसीब है | Badnaseeb shayari

    ख़ुशी से आज़म बदनसीब है ( Khushi se azam badnaseeb hai )   ख़ुशी से आज़म बदनसीब है बड़ा  जिंदगी  में  ग़रीब  है   वफ़ा में दग़ाबाज सब मिले नहीं कोई सच्चा  हबीब  है   चला  दूर मैं इसलिए आया यहाँ कौन  मेरा  रकीब  है   वही  दिल दुखा अब रहा मेरा रहा  जिसके हर…

  • तपन | Kavita Tapan

    तपन ( Tapan )   कितनी प्यारी सी तपन भरी थी उनकी मुस्कान में फरिश्ता  सी  लगने  लगी हमें भीड़ भरे जहान में   मदद को बढ़ा दिए हाथ साथ दे दिया जीवन में उनके प्यार की तपन से खिल गए फूल चमन में   महकी फुलवारी सारी प्रीत भरी बयार बहने लगी सद्भावों की…

  • युग | Kavita yug

    युग ( Yug )   युगो युगो से परिवर्तन की आंधी चलती आई हम बदलेंगे युग बदलेगा सब समझो मेरे भाई   सत्य सादगी सदाचरण जीवन में अपनाओ युग निर्माण करने वालों प्रेम सुधा बरसाओ   त्रेतायुग में रामचंद्रजी मर्यादा पुरुष कहलाए द्वापरयुग में द्वारिकाधीश माखन मिश्री खाए   कलयुग में महापुरुषों ने शुभ कर्म…

  • कालरात्रि | Chhand kalratri

    कालरात्रि ( Kalratri ) मनहरण घनाक्षरी   काली महाकाली दुर्गा, भद्रकाली हे भैरवी। चामुंडा चंडी रुद्राणी, कृपा मात कीजिए।   प्रेत पिशाच भूतों का, करती विनाश माता। सिद्धिदात्री जगदंबे, ज्ञान शक्ति दीजिए।   अग्नि ज्वाला से निकले, भयानक रूप सोहे। खड्ग खप्पर हाथ ले, शत्रु नाश कीजिए।   रूद्र रूप कालरात्रि, पापियों का नाश करें।…

  • वफ़ा करके | Ghazal wafa karke

    वफ़ा करके ( Wafa karke )   वफ़ा करके भी कुछ भी तो नहीं मुझको हुआ हासिल हुई  है बस  मुझे  हर  पल यहाँ तो हर जफ़ा हासिल   रहा हूँ ढूंढ़ता मैं तो हर किसी में ही वफ़ा मैं तो वफ़ाए भी हुई मुझको मगर यारों कहा हासिल   यहाँ तो जख़्म मिलते है…

  • कमरे की घुटन | Kavita kamare ki ghutan

    कमरे की घुटन ( Kamare ki ghutan )   बंद कमरे में सिमट कर रह गई दुनिया सारी टूट रहे परिवार घरों से बिखर गई है फुलवारी   मनमर्जी घोड़े दौड़ाए बड़ों का रहा लिहाज नहीं एकाकी सोच हो गई खुलते मन के राज नहीं   बंद कमरों की घुटन में नर रहने को मजबूर…

  • शोर | Shor

    शोर ( Shor ) बिरहा की लंबी साधना के बाद प्रिय के साक्षात दर्शन होंगे। मन के किसी कोने में एक अज्ञात सुख की वर्षा होगी जब प्रिय के दर्शन होंगे। चिड़िया का चहचहाने का शोर मानो मुझे प्रियतम के आने की सूचना दे रहा हो। निंद्रा से जगा रहा है, मानो चिड़िया मुझसे कह…

  • शबरी के प्रभु राम | Kavita Shabri Ke Prabhu Ram

    शबरी के प्रभु राम ( Shabri Ke Prabhu Ram ) दीनबंधु दुखहर्ता राम अब वन को चले अभिराम सबके संकट हरने वाले भजो शबरी के प्रभु राम   भक्तवत्सल रामचंद्र प्रभु दयानिधि दया के सागर मंझधार में अटकी नैया पार लगाते करूणाकर रोम रोम में राम बसे घट घट में बसे जय श्रीराम रामनाम में…

  • रामनवमी | Ram navmi kavita

    रामनवमी ( Ram navmi )   रघु कुल में उत्पन्न दशरथ लाल राम कोशल्या की कोख से दशरथ लाल राम सनातन में शुभ दिवस नवमी राम जन्म अवध नगरी जगमग हुआ राम का जन्म घर में हर्ष अपार सजी आंगन रंगोली नगर में ख़ुशी छाई ढोल बजाता ढोली थाल भर मोतियों दासियां कर रही दान…

  • बाल अपराध | Kavita bal apradh

    बाल अपराध ( Bal apradh )   क्या लिखूं मैं उस मासूमियत के लिए , जिसे सुन हाथों से कलम छूट जाती है। हृदय मेरा सहम जाता है। उनकी चीखें गूंज रही मेरे इन कानों में क्योंकि हर बच्चे के अश्रु ये कहते हैं यूं ही नहीं होता कोई बच्चा बाल अपराध का शिकार, कुछ…