Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • हिन्दू राष्ट्र | Kavita Hindu Rashtra
    कविताएँ

    हिन्दू राष्ट्र | Kavita Hindu Rashtra

    ByAdmin April 3, 2022December 18, 2023

    हिन्दू राष्ट्र ( Hindu rashtra )   इसे राम मन्दिर का ना बस निर्माण समझो, यह स्वर सनातन सत्य का आधार है।   हम हिन्दू है आर्यो के वशंज भारतीय, भय हीन हिन्दू राष्ट्र का निर्माण है।   फिर से समागम होगा इस खण्डित धरा का, यह शेर के विश्वास की हुंकार है।   भगवा…

    Read More हिन्दू राष्ट्र | Kavita Hindu RashtraContinue

  • Poem sanatan nav varsh
    कविताएँ

    सनातन नववर्ष | Poem sanatan nav varsh

    ByAdmin April 2, 2022

    सनातन नववर्ष ( Sanatan nav varsh )   हर हर महादेव गूंजे सब रामनाम जय कार करे। श्रद्धा  और विश्वास  भरकर  हर हिंदू हूंकार भरे।   वर्ष नया हो हर्ष नया हो घटा प्रेम की छाई हो। जय श्री राम के नारों से गूंज रही अमराई हो।   आस्था विश्वास हृदय में भावो की बहती…

    Read More सनातन नववर्ष | Poem sanatan nav varshContinue

  • Upwas chhand
    छंद

    उपवास | Upwas chhand

    ByAdmin April 2, 2022October 12, 2022

    उपवास ( Upwas ) मनहरण घनाक्षरी   नेम धर्म व्रत करे विश्वास श्रद्धा भाव से प्रभु सुमिरन कर उपवास कीजिए   जब तप योग ध्यान सर्व शक्ति हरि मान दुर्गुण दोष मन से त्याग सुधा दीजिए   मन से करें जो पूजा व्रत निराहार रख कामना पूरी कर दे माला जप लीजिए   उपवास बड़ा…

    Read More उपवास | Upwas chhandContinue

  • Kavita dharti ke bhagwan
    कविताएँ

    धरती के भगवान | Kavita dharti ke bhagwan

    ByAdmin April 2, 2022

    धरती के भगवान ( Dharti ke bhagwan )   आज धरा पर उतर आए धरती के भगवान। मारना नहीं काम हमारा हमतो बचाते जान।   जीवनदाता जनता का कातिल कैसे हो सकता है। जान फूंके मरीज में अन्याय कैसे सह सकता है।   राजनीति का मोहरा सतरंजी चाले मत खेलो। जिंदगी देने वाले को मौत…

    Read More धरती के भगवान | Kavita dharti ke bhagwanContinue

  • Kavita gangaur
    कविताएँ

    गणगौर | Kavita gangaur

    ByAdmin April 2, 2022

    गणगौर ( Gangaur )   शिव गौरी की पूजा होती ईसर गणगौर मनाती है। अखंड सौभाग्य दे माँ कन्या मनचाहा वर पाती है।   आस्था प्रेम का पर्व भावन राजस्थान की शान है। चैत्र मास में तीज त्योहार मनाते आलीशान है।   उंँट घोड़े सज धजकर सुंदर सी झांकी चलती है। कर सोलह सिंगार नारियां…

    Read More गणगौर | Kavita gangaurContinue

  • हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामना
    कविताएँ

    हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामना | Hindu New Year Poem in Hindi

    ByAdmin April 1, 2022March 21, 2023

    हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामना ( Hindi nav varsh ki hardik shubhkamnaye )     हर मस्तक पर तिलक सजे और, हर इक घर में ध्वाँजा लगे। हर  मुख  निकले  राम  नाम  और, हर इक घर में गाय रहे।   तुलसी चौरा दीप जले, मन्दिर में घण्ट घडिय़ाल बजे। हर कन्या में राधारानी , और…

    Read More हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामना | Hindu New Year Poem in HindiContinue

  • Parhit Saris Dharam Nahi Bhai
    कविताएँ

    परहित सरिस धर्म नहिं भाई | Kavita Parhit Saris Dharam Nahi Bhai

    ByAdmin April 1, 2022

    परहित सरिस धर्म नहिं भाई ( Parhit Saris Dharam Nahi Bhai )     मोहिनी मूरत हृदय समाई, परहित सरिस धर्म नहिं भाई।   पीर हरे जाकी रघुवीरा, तरहीं पार सिंधु के तीरा।   जाके घट व्यापहीं संतापा, सुमिरन रामनाम कर जापा।   प्रेम सुधारस घट रघुराई, परहित सरिस धर्म नहिं भाई।   मन मलीन…

    Read More परहित सरिस धर्म नहिं भाई | Kavita Parhit Saris Dharam Nahi BhaiContinue

  • Poem maryada ki hani
    कविताएँ

    मर्यादा की हानि | Poem maryada ki hani

    ByAdmin April 1, 2022October 27, 2022

    मर्यादा की हानि ( Maryada ki hani )   मर्यादा में बाधा पड़ी जब आधा राम ने बाली को चोरी से मारा। सुनो रघुनाथ अनाथ क्यूं अंगद पूछत बाली क्या पाप हमारा।।   कौन सी भूल भई सिय से केहीं कारण नाथ ने कानन छोड़ा। जाई समाई गई वसुधा में श्रीराम से नेह का नाता…

    Read More मर्यादा की हानि | Poem maryada ki haniContinue

  • Prasad par kavita
    कविताएँ

    प्रसाद | भोग | Prasad kavita

    ByAdmin April 1, 2022April 1, 2022

    प्रसाद | भोग ( Prasad | Bhog )   छप्पन भोग चढ़े सांवरा रुचि रुचि भोग लगाओ। मीरा गाए भजन बैठकर प्यारे माधव मुस्काओ।   भक्ति भाव से भक्त तिहारे मोदक प्रसाद लगाए। माखन मिश्री कृष्णा प्यारा ठुमक ठुमककर खाए।   खीर चूरमा भोग चढ़े जय बजरंगबली हनुमान। संजीवन लेकर पवनसुत लक्ष्मण के बचाए प्राण।…

    Read More प्रसाद | भोग | Prasad kavitaContinue

  • Kavita sarhad ki zindagi
    कविताएँ

    सरहद की जिंदगी | Kavita sarhad ki zindagi

    ByAdmin March 31, 2022

    सरहद की जिंदगी ( Sarhad ki zindagi )   सीमा पे जांबाज सिपाही बारूद से बतियाते हैं। आंधी तूफानों में चलते जा शत्रु से भिड़ जाते हैं।   हिमालय सा रख हौसला पराक्रम दिखला देते। सरहद के रखवाले जो बैरी के छक्के छुड़ा देते।   समर के महा सेनानी रण में जौहर दिखलाते। रणयोद्धा संग्राम…

    Read More सरहद की जिंदगी | Kavita sarhad ki zindagiContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 618 619 620 621 622 … 838 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search