Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Poem Holi Ke Din
    कविताएँ

    होली के दिन | Poem Holi Ke Din

    ByAdmin March 18, 2022

    होली के दिन ( Holi ke din )   छोड़िए शिकवे गिले खटपट सभी होली के दिन। अच्छी  लगती  है  नहीं ये बेरुखी होली के दिन।। वो  हमारे  पास आकर कान में ये कह गये, आदमी को मानिए न आदमी होली के दिन।। चार  दिन  की  जिन्दगी ही पाई है हमने, सभी, इश्क के रंग…

    Read More होली के दिन | Poem Holi Ke DinContinue

  • Poem Holi Hai
    शेरो-शायरी

    होली है | Poem Holi Hai

    ByAdmin March 18, 2022March 11, 2023

    होली है ( Holi Hai )   चादँ ने पूछा चादँनी से क्या है आज चाँदनी बोली होली है चन्दन की खुशबू लाई सुबह हवा आज गुलाल से हर फरद सरशारे रवाँ आज दुश्मन को भी गले लगाये आज ऊँच नीच का भेद मिटाये आज सबमे प्यार व मोहब्बत जगाये आज।। होली मुबारक🌹🌹   लेखिका…

    Read More होली है | Poem Holi HaiContinue

  • Geet aayi holi mastani
    कविताएँ

    आई होली मस्तानी | Geet aayi holi mastani

    ByAdmin March 18, 2022

    आई होली मस्तानी ( Aayi holi mastani )   सबके दिल को जीता, सबके मन को भा गया। यू.पी. में लो फिर से, अब योगी राज आ गया। खुशियां ले चेहरे पर, छाया रंग होली का सारा। मधुर तराने गीत गूंजे, बोले तुन तुन तारा रा रा। जोगीरा सा रा रा रा,जोगीरा सा रा रा…

    Read More आई होली मस्तानी | Geet aayi holi mastaniContinue

  • kaliyon si muskan
    कविताएँ

    कलियों की मुस्कान | Poem kaliyon si muskan

    ByAdmin March 17, 2022

    कलियों की मुस्कान ( Kaliyon si muskan )   कलियों की मुस्कान भी देती आनंद अपार। नव ऊर्जा संचार कर लब लाती नई बहार। सुंदरता में चार चांद जड़ दे एक मुस्कान। सारा जहां अपना लगे प्यारा हर इंसान।   बगिया सारी महक उठे बस एक मुस्कान से। खिल उठे चेहरे सारे मुस्कुराते एक इंसान…

    Read More कलियों की मुस्कान | Poem kaliyon si muskanContinue

  • Bhakt prahlad chhand
    छंद

    भक्त प्रह्लाद | Bhakt Prahlad

    ByAdmin March 17, 2022January 29, 2023

    भक्त प्रह्लाद ( Bhakt prahlad )     होलिका भी जल गई, प्रह्लाद को भर गोद, हर्ष जग में छा गया, सब होली मनाइए।   सद्भाव की घटाएं भी, लाई रंगों की बहार, घट घट हर्ष छाया, मस्त होकर गाइए।   सच्चे भक्त प्रह्लाद जो, प्रभु का करते ध्यान, दीनानाथ रक्षा करें, हरि ध्यान लगाइए।…

    Read More भक्त प्रह्लाद | Bhakt PrahladContinue

  • Poem holika dahan
    कविताएँ

    होलिका दहन | Poem Holika Dahan

    ByAdmin March 17, 2022March 24, 2024

    होलिका दहन ( Holika Dahan ) ( 2 )  करना है काम एक आज होलिका दहन में जलानी है कमी एक जो भि है निज के मन में अधर्म पर धर्म की जीत का प्रमाण समक्ष होगा करें दूर कल क्यों, आज के दिन हि प्रत्यक्ष होगा तब हि इन शुभ कामनाओं का कोई अर्थ…

    Read More होलिका दहन | Poem Holika DahanContinue

  • Wafa ghazal
    शेरो-शायरी

    मुझे कब मगर वो वफ़ा दे गया | Wafa ghazal

    ByAdmin March 17, 2022

    मुझे कब मगर वो वफ़ा दे गया ( Mujhe kab magar wo wafa de gaya )     मुझे कब मगर वो वफ़ा दे गया वफ़ा में मुझे वो दग़ा दे गया   जिसे रात दिन चाह मैंनें बहुत मुझे हिज्र की वो सजा दे गया   ख़ुशी के दिये फूल उसको बहुत मुझे वो…

    Read More मुझे कब मगर वो वफ़ा दे गया | Wafa ghazalContinue

  • Poem Rangotsav Holi
    कविताएँ

    रंगोत्सव होली | Poem Rangotsav Holi

    ByAdmin March 17, 2022

    रंगोत्सव होली ( Rangotsav Holi )   जोश जुनून उमंग जगाता, तन मन को हर्षाता। रंगों का त्योहार होली, सद्भाव प्रेमरस बरसाता।   गाल गुलाबी दमकते, गोरी के गुलाल लगाकर। पीला रंग प्रेम झलकाता, घर में खुशियां लाकर।   स्वाभिमान शौर्यता लाता, रक्तवर्ण महावीरों में। तलवारों का जोश उमड़ता, जोशीले रणधीरों में।   सुखद अनुभूति…

    Read More रंगोत्सव होली | Poem Rangotsav HoliContinue

  • Kavita bolti aankhen
    कविताएँ

    बोलती आंँखें | Kavita bolti aankhen

    ByAdmin March 16, 2022March 16, 2022

    बोलती आंँखें ( Bolti Aankhen )   बोलती आंँखें सब बातें, मन के भावों को दर्शाती। हर्ष और आनंद मौज में, झूम झूमकर इठलाती।   आंँख दिखाते आज बेटे, बुड्ढे मांँ और बाप को। संस्कारों को भूलकर, वो बड़ा समझते आपको।   मांँ की आंखों में नेह की वर्षा, हो रही आज भी। उमड़ रहा…

    Read More बोलती आंँखें | Kavita bolti aankhenContinue

  • राजगुरु सुखदेव भगत सिंह | Kavita Rajguru Sukhdev Bhagat Singh
    कविताएँ

    राजगुरु सुखदेव भगत सिंह | Kavita Rajguru Sukhdev Bhagat Singh

    ByAdmin March 16, 2022

    राजगुरु सुखदेव भगत सिंह ( Rajguru Sukhdev Bhagat Singh )     हिम्मत बुलंद अपनी, पत्थर सी जान रखते हैं। दिल में बसाए हम, प्यारा हिंदुस्तान रखते हैं।   क्या आंख दिखाएगा कोई, हमवतन परस्तों को। हम सर पे कफन हथेली पे, अपनी जान रखते हैं।   रख हिमालय सा हौसला, सागर सी गहराई है।…

    Read More राजगुरु सुखदेव भगत सिंह | Kavita Rajguru Sukhdev Bhagat SinghContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 619 620 621 622 623 … 833 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search