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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Babul kavita
    कविताएँ

    बाबुल | Babul kavita

    ByAdmin March 16, 2022

    बाबुल ( Babul )   बाबुल याद घणी सताये, बाबुल मन मेरा घबराये। जिस आंगन में पली-बढ़ी, आंखों में उतर आए रे। बाबुल मन मेरा घबराये, बाबुल मन मेरा घबराये।   मां की सीख हर्ष भर देती,घर संसार सुख कर देती। आंगन की तुलसी तेरे, खुशियों से झोली भर लेती।   मेरा रूठना और मनाना,…

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  • Kavita holi aayi
    कविताएँ

    होली आई | Kavita holi aayi

    ByAdmin March 16, 2022

    होली आई  ( Holi Aayi )   होली आई, होली आई रंग-बिरंगी ख़ुशियाँ लाई ।   हाथों में लें लो पिचकारी, रंग डालने की करो तैयारी ।   पानी से भर रखें हैं ग़ुब्बारें दिल में उठे प्रेम की फुहारें ।   सबके चेहरे रंगों से भरे हैं, मस्ती में सब झूम रहे हैं ।…

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  • Tilak Bridge Ke Cactus
    व्यंग्य

    तिलक ब्रिज के कैक्टस | Vyang

    ByAdmin March 15, 2022

    तिलक ब्रिज के कैक्टस ( Tilak Bridge Ke Cactus ) साहित्यकार रचना लिख कर केवल रचना दान में पटक कर रखे तो किसी को आपत्ति नही होती है पर रचना लिख कर गरम मेल की तरह वलात कानों में पकड कर उढ़ेले तो हत्या या आत्मा करने को मन होता है। पर जब दोनो नही…

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  • Holi ke chhand
    छंद

    होली | मनहरण घनाक्षरी | Holi ke chhand

    ByAdmin March 15, 2022October 12, 2022

    होली ( Holi )   गोरा गोरा गाल गोरी, राधा रंग ले आओ जी, आओ खेलें संग होली, रंग बरसाइये।   फूलों की होली भावन, मत रंग लगाओ जी, रंगीलो फागुन आयो, मस्ती भर गाइये।   हंसी-खुशी मस्ती छाई, होली आज मनाओ जी, झूम झूम नाचो गाओ, त्योहार मनाइये।   ले पिचकारी रंग की, मोहन…

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  • Ghazal in hindi
    शेरो-शायरी

    फूलों की मगर वो ही बौछार नहीं करता | Ghazal in hindi

    ByAdmin March 15, 2022

    फूलों की मगर वो ही बौछार नहीं करता ( Phoolon ki magar wo hi bauchhar nahi karta )     फूलों की  मगर वो ही बौछार नहीं करता इक़रार मुहब्बत वो ही यार नहीं करता   वो तल्ख़ करे है  बातें ख़ूब मगर मुझसे वो  यार ज़रा भी मुझसे प्यार नहीं करता   पर भेज…

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  • Holi par muktak
    कविताएँ

    होली मुक्तक | Holi par Muktak

    ByAdmin March 14, 2022March 7, 2023

    होली मुक्तक  ( Holi par Muktak )   रंगों का त्योहार आया सबके दिलों पे छा गया। रंगीला फागुन आया मस्ताना मौसम आ गया।   खिल गए हैं चेहरे सारे खुशियों का आलम छाया। मस्तानी हुई फागुनी बयार रंग होली का भा गया।   प्यार के तराने उमड़े रंगों की जब छटा आई। फागुन हर्षाता…

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  • Phagun par kavita
    कविताएँ

    फागुन | Kavita phagun

    ByAdmin March 14, 2022March 15, 2022

    फागुन ( Phagun )   फागुन की दिन थोड़े रह गए, मन में उड़े उमंग। कामकाज में मन नहीं लागे, चढ़ा श्याम का रंग।   रंग  बसंती  ढंग  बसंती,  संग  बसंती  लागे। ढुलमुल ढुलमुल चाल चले,तोरा अंग बसंती लागे।   नयन से नैन मिला लो हमसे, बिना पलक झपकाए । जिसका पहले पलक झपक जाए,…

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  • Kavita pyaar mein takrar
    कविताएँ

    प्यार में तकरार | Kavita pyaar mein takrar

    ByAdmin March 14, 2022

    प्यार में तकरार ( Pyaar mein takrar )   तेरे प्यार में पागल फिरता, सारी दुनिया घूमता। नाम  तेरा  ले  लेकर मैं, हर डाली पत्ता चूमता।   प्यार तेरा पाकर खिला, चमन मेरे घरबार का। दिल से दिल के तार जुड़े, नाम कहां तकरार का।   तेरे सारे नाजो नखरे, हर अदा मनभावन लगती। चार…

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  • Ghazal siyasat
    शेरो-शायरी

    सियासती बुरके पहनकर,वो बग़ावत कर रहे हैं | Ghazal

    ByAdmin March 14, 2022

    सियासती बुरके पहनकर,वो बग़ावत कर रहे हैं ( Siyasati burka pahan kar wo bagawat kar rahe hain )   सियासती बुरके पहनकर,वो बग़ावत कर रहे हैं !!– हर तरह से इस वतन में,रोज वहशत भर रहे हैं !!–   कहते – करना चाहते हैं, रहते लोगों की भलाई जुल्म सहते लोग उनसे,पर हिकारत कर रहे…

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  • samajik vikas seva samiti saradhana
    साहित्यिक गतिविधि

    सामाजिक विकास सेवा समिति सरधना (मेरठ) द्वारा एक शानदार कवि सम्मेलन का आयोजन

    ByAdmin March 13, 2022

    सामाजिक विकास सेवा समिति सरधना (मेरठ) द्वारा होली के पावन महोत्सव पर दिनांक 12 मार्च को एक शानदार कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। समिति के संरक्षक श्री राम अवतार त्यागी जी, अध्यक्ष श्री मनमोहन त्यागी जी, उपाध्यक्ष श्री उमेश शर्मा जी एवं वक्ता व सलाहकार श्री दीपक शर्मा जी का प्रयास सराहनीय रहा। जिसमें…

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