जख्म | Zakhm par Kavita
जख्म ( Zakhm ) दुखती रग पे हाथ रखा घाव हरे हो गये कल तक जो अपने थे बैरी हमारे हो गए घाव भरते नहीं कभी जो मिले कड़वे बोल से नासूर भांति दुख देते रह रहकर मखोल से जख्म वो भर जाएंगे वक्त की मरहम पाकर आह मत लेना कभी…
जख्म ( Zakhm ) दुखती रग पे हाथ रखा घाव हरे हो गये कल तक जो अपने थे बैरी हमारे हो गए घाव भरते नहीं कभी जो मिले कड़वे बोल से नासूर भांति दुख देते रह रहकर मखोल से जख्म वो भर जाएंगे वक्त की मरहम पाकर आह मत लेना कभी…
बेकाबू मन ( Bekaaboo mann ) बेकाबू मन मेरा बार बार, स्मरण तुम्हारा करता है। तर जाता जनम मरण मेरा यदि,ईश्वर मे ये रमता है। तुम मोह मेरे हरि मोक्ष रहे,मन जान नही ये पाता मेर। मन के संग प्रीत का मंथन है, हुंकार हृदय घबराता है। आशा में तनिक निराशा…
हम सबका अभिमान तिरंगा ( Ham sab ka abhiman tiranga ) आन बान शान तिरंगा देश का स्वाभिमान तिरंगा सबका अभिमान तिरंगा देशभक्ति गुणगान तिरंगा वीरों का यशगान तिरंगा आजादी का मान तिरंगा वंदे मातरम गान तिरंगा वतन की है शान तिरंगा बलिदानों का मान तिरंगा राष्ट्रधारा जयगान तिरंगा देश प्रेम…
पाठक मंच की गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां छिंदवाड़ा – साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद की जिला इकाई पाठक मंच (बुक क्लब ) छिंदवाड़ा द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती की पूर्व संध्या पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कौशल किशोर श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एकदा भारतवर्षे पुस्तक पर परिचर्चा व काव्य गोष्ठि का आयोजन छोटा…
शहर से ए यार लौटा गांव में ( Shahar se e yaar lauta gaon mein ) शहर से ए यार लौटा गांव में देखो अपने चैन मिलता गांव में छोड़ दी गलियां नगर की इसलिए रिश्ता नाता गहरा अपना गांव में सोचता हूँ मैं मिलूँ उससे चलो एक अपना दोस्त रहता…
परिश्रम का महत्व ( Importance of hard work : Hindi Essay ) परिश्रम ही सफलता की कुंजी होती है। बिना परिश्रम के सफलता हासिल नहीं की जा सकती। जिंदगी में तरक्की करने के लिए एक मुकाम हासिल करने के लिए हर इंसान को परिश्रम जरूर करना पड़ता है। भगवान ने परिश्रम करने का गुण…
आ रही है रोज यादें खूब है ( Aa rahi hai roj yaadein khoob hai ) आ रही है रोज़ यादें ख़ूब है ! रोज़ भीगी यार आँखें ख़ूब है घर नहीं आया वो वादा करके भी देखी उसकी रोज़ राहें ख़ूब है भूलकर नाराज़गी दिल से सभी फ़ोन पर उसनें की बातें…
ख्वाब और ख्वाहिशों के कैदी ( Khwab aur khwahishon ke kaidee ) विधा मनहरण घनाक्षरी ख्वाबों खयालों में तुम, समय मत गंवाओ। हुनर प्रतिभा दिखा, सफलता पाईये। स्वप्न सजाकर कोई, ख्वाहिशों के कैदी बने। हकीकत की धरा पे, संभल के जाइए। तमन्ना और ख्वाहिशों, के जाल बुनते रहे। सपने सुरीले कोई,…
महादान ( Mahadaan ) शैनेः शैनेः बढो सनातन, हिन्दू अपने शान मे। सवा रूपईया दान करो तुम,मन्दिर के निर्माण में। इक पत्थर ही लगवा देना,रामलला के धाम में। जैसे इक नन्ही सी गिलहरी,राम सेतु निर्माण मे। देने वाले ईश्वर है तो, भक्ति भाव गर्वित कर लो। जन्म सुधर जाएगा तेरा,जीवन की अर्पित…
मेरा सुकुं ( Mera sukoon ) मेरा सुकुं ओ नींद भी मेरी उड़ाई है जबसे जवानी , टूट के जो तुझपे आई है शोला बदन को देख के , गुलशन हुआ हैरां बूटे भी खिले , आग ये कैसी लगाई है यूं ही नहीं , गुलाब हुआ सुर्ख रू जालिम आरिज…