Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Ek aisi mohabbat
    शेरो-शायरी

    एक ऐसी मोहब्बत | Ek aisi mohabbat | Poem in Hindi

    ByAdmin January 20, 2022

    एक ऐसी मोहब्बत ( Ek aisi mohabbat )     एक ऐसी मोहब्बत किये जा रहे है, अकेले ही हर ग़म सहे जा रहे है।   नही कोई शिकवा नही है शिकायत, हम अपने दरद को सहे जा रहे है।   नही कुछ कहेगे तेरा नाम लेकर, वफा या ज़फा ये हमारा करम है।  …

    Read More एक ऐसी मोहब्बत | Ek aisi mohabbat | Poem in HindiContinue

  • Isliye phool bheja nahi pyar ka
    शेरो-शायरी

    इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का | Ghazal

    ByAdmin January 19, 2022

    इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का! ( Isliye phool bheja nahi pyar ka )     इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का! है फ़रेबी भरा ख़ूब दिल  यार का   इसलिए ख़त लिख पाया नहीं हूँ उसे बेवफ़ा दिल है उस यार दिलदार का   रिश्ता रखना है तो रख वरना तोड़ दें यूं नहीं…

    Read More इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का | GhazalContinue

  • Kavita magarmach ke aansoo
    कविताएँ

    मगरमच्छ के आंसू | Kavita magarmach ke aansoo

    ByAdmin January 19, 2022

    मगरमच्छ के आंसू ( Magarmach ke aansoo )     दिखावे की इस दुनिया में लोग दिखावा करते हैं घड़ियाली आंसू बहाकर जनमन छलावा करते हैं   मगरमच्छ के आंसू टपकाते व्यर्थ रोना रोते लोग अपना उल्लू सीधा करते मतलब से करते उपयोग   भांति भांति के स्वांग रचाते रंग बदलते मौसम सा बात बात…

    Read More मगरमच्छ के आंसू | Kavita magarmach ke aansooContinue

  • निबंध : महिला सशक्तिकरण | Women empowerment essay in Hindi
    निबंध

    निबंध : महिला सशक्तिकरण | Women empowerment essay in Hindi

    ByAdmin January 19, 2022

    निबंध : महिला सशक्तिकरण ( Women empowerment : Essay in Hindi ) प्रस्तावना – महिलाओं को सशक्त होना बेहद जरूरी हो गया है। यदि वर्तमान पीढ़ी अपने अधिकारों को समझेगी, तभी आने वाली पीढ़ी में सुधार होगा और किसी भी सामाजिक संतुलित सामाजिक व्यवस्था के लिए विकास के क्षेत्र में महिला और पुरुष दोनों ही…

    Read More निबंध : महिला सशक्तिकरण | Women empowerment essay in HindiContinue

  • Shero shayari
    शेरो-शायरी

    कुछ रात ठहरी सी | Shero shayari

    ByAdmin January 19, 2022

    कुछ रात ठहरी सी ( Kuch raat gehri si )   कुछ रात ठहरी सी है , स्याह सी, गहरी सी है धुंध को ओढ़े सी है , कई राज समेटे सी है   सर्द सी , जर्द सी , सीने में अलाव लिए हुए कांपती, कंपाती सी , दिल को हाथ में थामे सी…

    Read More कुछ रात ठहरी सी | Shero shayariContinue

  • Buland hunkar ghazal
    कविताएँ

    बुलंद हुंकार | Poem Buland Hunkar

    ByAdmin January 18, 2022January 30, 2023

    बुलंद हुंकार ( Buland hunkar )   मझधार में डूबी नैया अब पार होनी चाहिए कवियों की भी संगठित सरकार होनी चाहिए   सत्ता को संभाले कविता लेखनी की धार बन मंचों से गूंज उठे वो बुलंद हूंकार होनी चाहिए   मातृभूमि को शीश चढ़ाते अमर सपूत सरहद पे महासमर में योद्धाओं की ललकार होनी…

    Read More बुलंद हुंकार | Poem Buland HunkarContinue

  • घटा घनघोर घन घन बरसे,दामिनी तडके है तड तड। धरा की प्यास मिटती, तन मे जगती प्यास है हर पल।
    कविताएँ

    शकुन्तला | Shakuntala kavita

    ByAdmin January 18, 2022January 19, 2022

    शकुन्तला ( Shakuntala kavita )   घटा घनघोर घन घन बरसे,दामिनी तडके है तड तड। धरा की प्यास मिटती, तन मे जगती प्यास है हर पल।   मिले दो नयन नयनो से, मचल कर कामना भडके। लगे आरण्य उपवन सा,अनंग ने छल लिया जैसे।   भींगते वस्त्र यौवन से लिपट कर, रागवृंत दमके। रति सी…

    Read More शकुन्तला | Shakuntala kavitaContinue

  • जीवन की प्रचंड धूप में मनुज तपता रहा दिन रात नयन कितने स्वप्न देखे कितनी शामें कितने प्रभात
    कविताएँ

    अंतिम यात्रा | Kavita antim yatra

    ByAdmin January 18, 2022

    अंतिम यात्रा ( Antim yatra )     जीवन की प्रचंड धूप में मनुज तपता रहा दिन रात नयन कितने स्वप्न देखे कितनी शामें कितने प्रभात   भाग दौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता रहा वो निष्काम चलता रहा मुसाफिर सा अटल पथिक अविराम   जीवन सफर में उतार-चढ़ाव सुख-दुख के मेले हंसते-हंसते जीवन बिता आज…

    Read More अंतिम यात्रा | Kavita antim yatraContinue

  • Shanti parva kavita
    कविताएँ

    शान्तिपर्व | Shanti parva kavita

    ByAdmin January 17, 2022

    शान्तिपर्व ( Shanti Parva )     करबद्ध निवेदन है तुमसे, अधिकार हमारा वापस दो। या तो प्रस्ताव सन्धि कर लो,या युद्ध का अब आवाहृन हो।   हे नेत्रहीन कौरव कुल भूषण, ज्ञान चक्षु पर केन्द्रित हो। या पुत्र मोह का त्याग करो, या भरत वंश का मर्दन हो।   मैं देवकीनंदन श्रीकृष्ण, पाण्डव  कुल …

    Read More शान्तिपर्व | Shanti parva kavitaContinue

  • Meethi meethi thandhak
    कविताएँ

    मीठी-मीठी ठण्डक | Kavita

    ByAdmin January 17, 2022January 17, 2022

    मीठी-मीठी ठण्डक ( Meethi meethi thandhak )   कांप रहे सब हाथ पांव, मौसम मस्त रजाई का। देसी घी के खाओ लड्डू, मत सोचो भरपाई का।   ठिठुर रहे हैं लोग यहां, बर्फीली ठंडी हवाओं से। धुंध कोहरा ओस आई, अब ठंड बढ़ गई गांवों में   गजक तिल घेवर बिकती, फीणी की भीनी महक।…

    Read More मीठी-मीठी ठण्डक | KavitaContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 636 637 638 639 640 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search