गुलशन में ही शबनम ए दौर नहीं है | Gulshan shayari
गुलशन में ही शबनम ए दौर नहीं है ( Gulshan mein hi shabnam e daur nahin hai ) गुलशन में ही शबनम ए दौर नहीं है शाखों पर ही फूल खिला और नहीं है महंगाई में दाल ख़रीदे क्या आटा आया अच्छा ही यारों दौर नहीं है छोड़ फ़कीर है मांगे …










