• प्यारी हिंदी

    प्यारी हिंदी मैं मिथिला का वो बेटा हूं, जिसे हिंदी से है यारी।मैं भाषी मैथिली हूं, फिर भी हिंदी प्राणों से है प्यारी।।मेरे धड़कन में लहरे हिंदी की बो गूंज है न्यारी।जिसे गाने को लालायित है दुनियां की हर नर नारी।। 1 कहीं हुंकार है दिनकर जी का है पंत से यारी।कहीं चौहान की गर्जन…

  • हिन्दी सजीव भाषा

    हिन्दी सजीव भाषा हिन्दी हमारी मातृभाषा हैहिन्दी हमारी राजभाषा हैहिन्दी से व्यवसाय हमाराहिन्दी हमारी लोकभाषा है । हिन्दी की है छाती चौड़ीसब भाषा इनके ओर दौड़ीसभी भाषा के शब्दों कोपरिवार जैसे अपनाया है । आराम , अफसोस…फारसी हैअमीर , गरीब…. अरबी हैचाय , पटाखा…. चीनी हैतोप , तलाश……तुर्की हैस्कूल, कॉलेज…अंग्रेजी हैआदि शब्दों को समाया है…

  • ग़ज़ल – हिंदी

    ग़ज़ल – हिंदी हिंदी गाँधी के सपनों का अभियान हैइसके विस्तार में सबका सम्मान है सूर तुलसी ने सींचा इसे प्यार सेजायसी और रसखान की जान है राम सीता हैं इसमें हैं राधा किशनमीरा के प्रेम का भी मधुर गान है चाहे कविता लिखो या कहानी लिखोइसकी शैली में सब कुछ ही आसान है हिंदी…

  • हिंदी हमारी प्यारी प्यारी

    हिंदी हमारी प्यारी प्यारी हिंदी हमारी प्यारी प्यारीहमारी राष्ट्रभाषा है न्यारीसाहित्य की है फुलवारीसरल सुबोध पर है भारी अंग्रेजी से जंग है जारीसम्मान की है अधिकारीहिंदी है पहचान हमारीये मातृभाषा है हमारी जन-जन की है भाषा हिंदीभारत की है आशा हिंदीहिंदुस्तान का गौरवगाथा हिंदीएकता की अनुपम परंपरा है हिंदी जिसके बिना हिंद थम जाएऐसी जीवन…

  • मेरी प्यारी हिन्दी

    मेरी प्यारी हिन्दी हिंदी भाषा का गुणगान कैसे करूं,हिंदी भाषा का बखान कैसे करूं।अपरिभाषित है मेरी हिंदी भाषा,परिभाषा ही नहीं परिभाषित कैसे करूं।। सबको मान व सम्मान हिंदी देती है,अपना नया रूप एक छोटी सी बिंदी देती है।हलन्त, पदेन, रेफ का महत्व होता है,गद्य पद्य के रूप नए-नए शब्द गढ़ देती है।। हिंदी अपनी सीमा…

  • जग से निराला लगे,

    जग से निराला लगे रूप घनाक्षरीमनमीत-8,8,8,8चरणांत -21 जग से निराला लगे,सबसे ही प्यारा लगे,छेड़े जब प्रेम धुन,वह राग मनमीत । मुख आभा लगे ऐसी,पूनम के चाॅ॑द जैसी,मुख शोभित लालिमा,ज्यों रजनी चाॅ॑दप्रीत । दीप उजियार करे,घर की है शोभा बढ़े,दमक रहे जुगनू,ऐसे लगे नैन जीत । अजब सी लीला देखो,प्रेम रस जरा चखो,कहे फिर सारा जग,है…

  • चोरी कर के लिखता हूँ मैं

    चोरी कर के लिखता हूँ मैं क्या लूटा है मैंने बतला, झूठे क़िस्से गढ़ा ना करजन्मजात दौलत वाला हूँ, तौहमत यूँ ही मढ़ा ना कर भूखा-नंगा था ये कह कर, मियां बेइज्जती करता क्योंतू भी रंग जा मेरे रँग में, तिल का ताड़ बड़ा ना कर पहले ही से मैं बेचारा, मुश्किलात में घिरा हुआज़ख़्मों…

  • तिरंगा काव्य मंच : कवि सम्मेलन और मुशायरे की विस्तृत रिपोर्ट/प्रतिवेदन

    तिरंगा काव्य मंच के 54वें ऑन लाइन मासिक कवि सम्मेलन और मुशायरे का संयुक्त आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार /संपादक डॉ कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड और वरिष्ठ मशहूर शायर विनय सागर जायसवाल,बरेली की अध्यक्षता में किया गया महेन्द्र सिंह प्रखर और अमिता गुप्ता के संचालन में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ चंचल हरेंद्र वशिष्ट द्वारा…

  • देख लो तुम भी आईना फिर से

    देख लो तुम भी आईना फिर से देख लो तुम भी आईना फिर सेलौट ये पल न पायेगा फिर से चाहते क्या होके जुदा फिर सेबन न पाओगे तुम खुदा फिर से मुझको होना नहीं फ़ना फिर सेरात दिन माँगता दुआ फिर से यूँ न निकलो सँवर के तुम बाहरहो न जाये कहीं खता फिर…

  • ऐ सर्द हवा

    ऐ सर्द हवा ऐ सर्द हवा का झोंका,अब तो,शांत हो जा,तू भी कहीं जाकर और आराम से सो जा।। जग को क्यों इतना परेशान कर रहा है,काहे जग के लिए तू शैतान बन रहा है।। बूढ़े, बच्चे सब तो परेशान हो गए हैं,बताओ, आप किसकी सुध में खो गए हैं।। पेड़ पौधे भी तो अब…