• देश पाल सिंह राघव ‘वाचाल’ की कविताएं | Deshpal Singh Poetry

    क्या हुआ आजतक जो भी किए वादों का क्या हुआसंग में चलने के इरादों का क्या हुआ उठ गए उस शाम काँधे से झटक के सरखट्टी-मीठी उन सभी यादों का क्या हुआ जिनके बहकावे में आकर रूठ गए थेआड़े-टेढ़े उन सभी प्यादों का क्या हुआ अल्लाह के दरबार में मांगी थीं जो कभीउन दुआओं और…

  • युवा शक्ति की प्रेरणा

    युवा शक्ति की प्रेरणा विश्व पटल पर आपसे, बढ़ा देश का मान।युवा विवेकानंद थे, भारत का अभिमान॥ युवा विवेकानन्द नें, दी अद्भुत पहचान।युवा शक्ति की प्रेरणा, करे विश्व गुणगान॥ जाकर देश विदेश में, दिया यही संदेश।धर्म, कर्म अध्यात्म का, मेरा भारत देश॥ अखिल विश्व में है किया, हिन्दी का उत्कर्ष।हिंदी भाषा श्रेष्ठ है, है गौरव,…

  • खोज रहे मकरंद

    खोज रहे मकरंद कवित्त (मनहरन घनाक्षरी) कैसा ये अजीब रोग,कैसे मतिमारे लोग।दुष्ट मांसाहार भोग,ढूंढ़ रहे गैया में। मुस्कुरा के मंद-मंद,गढ़ रहे व्यर्थ छंद।खोज रहे मकरंद,ग़ैर की लुगैया में। रहा नहीं दया-धर्म,बेच खाई हया-शर्म।डूबने के हेतु कर्म,पोखरी तलैया में। आफ़तों से खेल रहे,मुसीबतें झेल रहे।ख़ुद को धकेल रहे,शनि जी की ढैया में। देशपाल सिंह राघव ‘वाचाल’गुरुग्राम…

  • मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगी

    मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगी मुझे अपने काबिल बना ज़िन्दगीनहीं ऐसे ठोकर लगा ज़िन्दगी हमें भी तो जीना सिखा ज़िन्दगीनई राह कोई दिखा ज़िन्दगी किसी रोज़ उनसे मिला ज़िन्दगीपता उनका मुझको दिला ज़िन्दगी बने बुत हैं बैठे मेरे ईश तोउन्हें हाल मेरा सुना ज़िन्दगी मिली ही नही है जिसे छाँव कलउसे धूप से मत डरा…

  • यह जग की रीत पुरानी है

    यह जग की रीत पुरानी है यह जग की रीत पुरानी हैयह जग की जीत पुरानी हैजो ना पाया बौराया हैजो पाया सो रोया हैयह जग की रीत पुरानी हैयह जग की गीत पुरानी है तेरे रह गुजर में हम नवीनकुछ यूं टूट पड़ेआंख से आंसू ना छलकापर जख्म बहुत गहरा हैयह जग की रीत…

  • “प्रेशर”

    शिक्षक-अभिभावक मीटिंग में एक पिता अपने बेटे को पीट रहा था। प्रिंसिपल सर ने उस व्यक्ति से पूछा- “क्या हुआ? बेटे को क्यों मार रहे हो?” “क्यों न मारू इसे? पूरे साल ट्यूशन पर हजारों रुपए खर्च किये लेकिन इसके दिमाग में कुछ घुसता ही नहीं है। देखो, इसके वार्षिक परीक्षा में कितने कम नंबर…

  • “हमारी हिंदी” प्रतियोगिता का आयोजन

    विश्व हिंदी परिषद, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ मध्य प्रदेश द्वारा विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में 10 जनवरी को विषय अंतर्गत बच्चों के मध्य ” हमारी हिंदी” प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । जिसमें छात्र-छात्राओं को 200 शब्दों में अपने विचार आलेख रूप में प्रस्तुत करने थे । भारत के विभिन्न राज्यों…

  • भर भर दुआ देने लगे

    भर भर दुआ देने लगे हम बुज़ुर्गों पर तवज्जो जब ज़रा देने लगेवो मुहब्बत से हमें भर-भर दुआ देने लगे घर के आँगन में खड़ी दीवार जब से गिर गयीनाती पोतों के तबस्सुम फिर मज़ा देने लगे मिट गये शिकवे गिले जब भाइयों के दर्मियाँएक दूजे के मरज़ में वो दवा देने लगे आ रहींं…

  • हिन्दी बोलें हिन्दी पढ़ें

    हिन्दी बोलें हिन्दी पढ़ें तहजीब हमारी है हिंदीतस्वीर हमारी है हिंदीहर हिंदुस्तानी के रग रग में,बहती जो धार वो है हिंदी। संस्कृत से संचित है हिंदी,हर जन में बसती है हिंदी,हिन्दी का क्या मैं गुड़गान करूं,हर भाषा से प्यारी है हिन्दी। कवियों की भाषा में हिन्दी,शुक्ल की आशा है हिन्दी,हिन्दी पढ़कर मिलता है रस,भावों की…

  • हिंदी का गुणगान करें

    हिंदी का गुणगान करें पंक्ति-नीर क्षीर कर ग्रहे सार को, शुचि हिंदी का गुणगान करें। भारत माता के भाल बिंदी,अब एक नवीन मुस्कान भरे।नीर क्षीर कर ग्रहे सार को, शुचि हिंदी का गुणगान करें। ताल सुरों का संगम इसमें, बहे रस छंद की धारा है।सात सुरों से शोभती हिंदी, संगीत इसने निखारा है।आओ हम सब…