उदासी | Udasi par Kavita
उदासी ( Udasi ) बादल जैसी छाई उदासी । घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।। दिन-दिन बढ़ती ही जाती है । जैसे हो महंगाई उदासी ।। सूने दिल में बजती जैसे । दूर कहीं शहनाई उदासी ।। सागर की लहरों सी खुशियां सागर की गहराई उदासी ।। शमा जली …
उदासी ( Udasi ) बादल जैसी छाई उदासी । घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।। दिन-दिन बढ़ती ही जाती है । जैसे हो महंगाई उदासी ।। सूने दिल में बजती जैसे । दूर कहीं शहनाई उदासी ।। सागर की लहरों सी खुशियां सागर की गहराई उदासी ।। शमा जली …
जेवर ( Jewar ) रत्न जड़ित आभूषण जेवर मनमोहक लगते रखड़ी बाजूबंद बोरला गले में सुंदर हार सजते छम छम पांवों की पायल नथली के नखरे न्यारे हाथों में मुद्रिका मनोहर कानों में झुमके प्यारे स्वर्ण आभूषण जड़ित कंगना भी कहर ढहाते हैं जेवर जो आकर्षण भर पिया के मन को भाते…
क्योंकि मैं पराया धन हूं ( Kyon ki main paraya dhan hoon ) मां बेटे की हर पिड़ा पे तेरा दिल पिघलता है। और मेरी पिड़ा पर जरा भी दिल नहीं दहलता है। क्योंकि मैं पराया धन हूं। बेटी की विदाई पर दिल पर पत्थर रख देती है। बेटा शाम तक घर ना…
अभिमन्यु का शौर्य अमर है ( Abhimanyu ka shaurya amar hai ) एक असाधारण योद्धा अर्जुन नंदन कहलाता वो सुभद्रा दुलारा शूरवीर जा तूफ़ानों से टकराता जो चक्रव्यूह तोड़ा रण में डगमगा जाता महासमर है महाभारत वीर योद्धा अभिमन्यु का शौर्य अमर है युद्धवीर रणधीर वो महारथी कांपने लगते सारे दुर्योधन शकुनि…
उठ रही ख़ुशबू फ़ूलों से ख़ूब है ( Uth rahi khushboo phoolon se khoob hai ) उठ रही ख़ुशबू फ़ूलों से ख़ूब है बस रहा कोई सांसों में ख़ूब है देखते है कर लिए उसपे यकीं धोखा उसके हर वादों में ख़ूब है किस तरह मिलनें उसी से मैं जाऊं हाँ लगा…
खुशी के आंसू ( Khushi ke aansu : Kavita ) खुशियों के बादल मंडराये हृदय गदगद हो जाए भावों के ज्वार उमड़े खुशियों से दिल भर आए नैनों में खुशी के आंसू मोती बनकर आ जाते हैं हर्षित मन के आंगन में आनंद के पल छा जाते हैं उत्साह उमंगों का…
मुझे अच्छाई का रास्ता दिखाता है! ( Mujhe acchai ka rasta dikhata hai ) मुझे अच्छाई का रास्ता दिखाता है! जमीर मेरा मुझे आइना दिखाता है कभी पूरे जो नहीं पायेगे जीवन में ही निगाहों में ख़्वाब ऐसे नया दिखाता है झूठा है दिल वो बड़ा मगर अपने यारों मगर मुझे…
तुम अजीज हो ( Tum aziz ho ) तुम अजीज हो खास हमारे एहसास हो गया दूर होकर भी हो पास हमारे विश्वास हो गया अल्फाज आपके दिला देते हैं एहसास आपका शब्दों का जादू ऐसा की मन का उजास हो गया यह फासले यह दूरियां अब बाधक नहीं है यार…
वक्त नहीं लोगों के दामन में ( Waqt nahi logon ke daman mein ) वक्त नहीं लोगों के दामन में, भागमभाग है सारी। महंगाई ने पैर पसारे, डरा रही हमें नित महामारी। चकाचौंध दिखावा ज्यादा, वादे प्रलोभन सरकारी। आटा दाल आसमान छूते, बीत रही जिंदगी सारी। दिनभर की दौड़ धूप से,…
अंतिम सांस तक ( Antim saans tak ) सोनू से प्रेम है उससे मुझे प्रेम है कुछ-कुछ स्वर्णाभ अक्षत सा है….. कुन्दन सा खरा शाश्वत है स्वयं से प्रकाशित आभाषित ईश्वरत्व की सत्यता जैसा जो हमारे प्रेम पर आकर रुक जाती है और बस रुकी ही रहती है अंतिम साँस तक ……………….