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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • तुम मेरे हो
    कविताएँ

    तुम मेरे हो | Geet

    ByAdmin July 24, 2021

    तुम मेरे हो ( Tum mere ho )   तुम मेरे हो तुम मेरे हो, सुंदर शाम सवेरे हो। जीवन की बगिया में तुम, खिलते फूल घनेरे हो।   मुस्कानों से मोती झरते, प्रेम उमड़ता सागर सा। महक जाता दिल का कोना, प्रेम भरी इक गागर सा।   मधुबन मन का खिलता जाता, प्रियतम तुम…

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  • रोज़ है इंतजार सावन का
    शेरो-शायरी

    रोज़ है इंतजार सावन का | Sawan par Shayari

    ByAdmin July 24, 2021February 6, 2023

    रोज़ है इंतजार सावन का ( Roz hai intezar sawan ka )   रोज़   है   इंतजार   सावन  का आकर बरसें अब प्यार सावन का   ऐसा बूंदों में  ही बजे सरगम  दिल  करे बेक़रार सावन का   भीगा जाये तन प्यार में इसके हो रहा दिल पे वार सावन का   फ़ूलों की ख़ुशबू सांसों…

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  • गुरु शिष्य का भाग्य संवारते
    कविताएँ

    गुरु शिष्य का भाग्य संवारते | Kavita

    ByAdmin July 24, 2021

    गुरु शिष्य का भाग्य संवारते ( Guru shishya ka bhagya sanwarte )   किस्मत का ताला खुल जाता, गुरु शिष्य का भाग्य विधाता। ज्ञान ज्योति जगा घट घट में, अंतर्मन उजियारा लाता।   शिल्पकार मानव निर्माता, शत शत वंदन हे गुण दाता। बुरे मार्ग से हमें बचाओ, प्रगति का मार्ग दिखलाओ।   गढ़कर नित नये…

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  • रोज़ रब से मैं यारों ख़ुशी मांगता हूँ
    शेरो-शायरी

    रोज़ रब से मैं यारों ख़ुशी मांगता हूँ | Ghazal

    ByAdmin July 24, 2021

    रोज़ रब से मैं यारों ख़ुशी मांगता हूँ ( Roz rab se main yaron khushi mangata hoon )     रोज़ रब से मैं यारों ख़ुशी मांगता हूँ! दूर हो दुख अच्छी जिंदगी मांगता हूँ   उम्रभर  साथ  मेरा  निभाये वफ़ा एक ऐसी  रब से दोस्ती मांगता हूँ   प्यार हो वावफ़ा से भरी हो…

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  • रात भर हम करवटें बदलते है
    शेरो-शायरी

    रात भर हम करवटें बदलते है | Ghazal Raat bhar

    ByAdmin July 23, 2021February 7, 2023

    रात भर हम करवटें बदलते है ( Raat bhar hum karvaten badalte hai )   रात भर हम करवट बदलते है ! याद में उसकी रोज़ जलते है   जिंदगी ग़म भरी है ये  इतनी हाँ ख़ुशी के लिये तड़फतें है   याद आती है साथ गुजरे दिन जब गली से उसकी निकलते है  …

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  • साजन
    छंद

    साजन | Virah

    ByAdmin July 23, 2021February 6, 2023

    साजन (Saajan  ) ( सायली छंद – विरह )   साजन सावन आया प्रेम ऋतु छाया पुरवा बयार हर्षाया   मेरा चंचल मन पिया अब आजा तडपत मनवा मचलत   रतिया कटती नाहीं विरह वेदना जाए याद करे पछताए   घबराए नाही आगे नन्द के लाल मदन गोपाल घनश्याम   कवि :  शेर सिंह हुंकार देवरिया…

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  • फूलों सा मुस्काता चल
    कविताएँ

    फूलों सा मुस्काता चल | Hindi Poetry

    ByAdmin July 22, 2021October 22, 2022

    फूलों सा मुस्काता चल ( Phoolon sa muskata chal )   फूलों सा मुस्काता चल, राही गीत गाता चल। मंजिल  मिलेगी  खुद, कदम  बढ़ाना  है।   आंधी तूफान आए, बाधाएं मुश्किलें आए। लक्ष्य  साध  पथ  पर, बढ़ते  ही जाना है।   नेह मोती बांट चलो, हंस हंस खूब मिलो। अपनापन  रिश्तो  में, हमको  फैलाना है।…

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  • तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से
    कविताएँ

    तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से | Kavita

    ByAdmin July 22, 2021

    तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से ( Tumhe chaha adhik sare jahan se )   तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से। मुकद्दर मैं मगर लाऊ कहां से।। ऐ  मेरी  जाने  गजल  तू  ही  बता, कौन हंसकर हुआ रूखसत यहां से।। किसी भी चीज पे गुरुर न कर, हाथ खाली ही आया है वहां से।। मैं …

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  • Jal Bin
    कविताएँ

    जल बिन | Kavita

    ByAdmin July 21, 2021

    जल बिन ( Jal Bin )   इकदिन समंदर भी सूख जाएगा व्यर्थ पानी बहाया जा रहा  घर-घर लगाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा    जहां थी जरूरत सभी को इक गिलास पानी की वहां चलाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा   पानी का कीमत इक दिन जाकर मैं मछलियों से पूछा, वो…

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  • शटर उठा दो
    कविताएँ

    शटर उठा दो | Kavita

    ByAdmin July 21, 2021

    शटर उठा दो ( Shatar utha do )   मेरे ख्याल रूपी ब्रेड पे बटर लगा दो। दिल का बन्द है दुकान तुम शटर उठा दो।   मिला के नयन नयनों से यू आँखे चार कर लो। पनीर तल के रखा है कि तुम मटर मिला दो।   पुलाव बन रही ख्यालों में थाली लगा…

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