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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • पर्यावरण
    कविताएँ

    पर्यावरण | Paryaavaran par kavita

    ByAdmin June 5, 2021

    पर्यावरण ( Paryaavaran ) वृक्ष धरा का मूल भूल से इनको काटो ना , नदी तालाब और पूल भूल से इनको  पाटो ना! वृक्षों  से हमें फल मिलता है  एक सुनहरा कल मिलता है पेड़ रूख बन बाग तड़ाग , सब धरती के फूल …     भूल से इनको  काटो ना   ..  इनकी करो…

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  • अपनी खुशियों को पंख लगाते हैं
    कविताएँ

    अपनी खुशियों को पंख लगाते हैं | Kavita

    ByAdmin June 5, 2021

    अपनी खुशियों को पंख लगाते हैं ( Apni  khushiyon ko pankh lagaate hain )   चलो अपनी खुशियों को जरा पंख लगाते हैं।?️ फिर से दोस्तों की गलियों में छुप जाते हैं।? फिर वही अल्हड़ पन? अपनाते हैं। कुछ पल के लिए अपनी जिम्मेदारियों से जी चुराते हैं।? फिर वही बचपना अपनी आंखों में लाते…

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  • आओ हम सब मिलकर के ऑक्सीजन बनातेहैं
    कविताएँ

    आओ हम सब मिलकर के ऑक्सीजन बनातेहैं | Kavita

    ByAdmin June 5, 2021

    आओ हम सब मिलकर के ऑक्सीजन बनातेहैं ( Aao hum sab milkar ke oxigen banate hai )   आओ हम सब मिलकर के कसम खाते हैं, अपने अपने जन्मदिन पर वृक्ष लगाते हैं, हम सब अपनी जिंदगी बिता रहे रो रो के आओ बच्चों का जीवन खुशहाल बनाते हैं   जंगलों को काट हम सब…

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  • अन्नपूर्णा हो तुम घर की
    कविताएँ

    अन्नपूर्णा हो तुम घर की | Kavita

    ByAdmin June 2, 2021

    अन्नपूर्णा हो तुम घर की ( Annapurna ho tum ghar ki )   संस्कार संजोकर घर में खूब ख्याल रखे घर का अन्नपूर्णा हो तुम घर की घर लगता तुमसे स्वर्ग सा   मधुर विचारों से सुसज्जित महके घर का कोना कोना नारी कर कमलों से ही प्यारा लगे घर सलोना   स्वच्छ धुले हाथों…

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  • रात का नशा था
    शेरो-शायरी

    रात का नशा था | Raat ka Nasha Shayari

    ByAdmin May 31, 2021February 7, 2023

    रात का नशा था ( Raat ka nasha tha )   रात का नशा था खुमारी कुछ तन्हाई की सर चढ़ी यूँ पैमाना कोई मय सा आलम यह कैसा मैं मैं न रही तू हो गई कब रात से सुबह हो गई आलम यह कैसा सामने था जो अँधेरा वो हो गया सवेरा कुछ तेरा…

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  • सीमाएं
    कविताएँ

    सीमाएं | Poem in Hindi on Seema

    ByAdmin May 31, 2021March 15, 2023

    सीमाएं ( Seemayen )   सीमाओं  की भी  एक सीमा,खींचे चित्र चितेरे, समय की गति को बांध न पाए,सीमाओं के घेरे।   सूर्य चन्द्रमा बंधे समय से ,सृष्टि करे प्रकाशित। शिक्षा  देते  मुस्काने की,जीवन करो सुवासित।   कहते रेखाएं न खींचो,वसुधा सकल परिवार। हम सीमाओं से बाहर है ,देते प्रभा एकसार।   जाति धर्म और…

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  • आइए प्रभु आइए
    छंद

    आइए प्रभु आइए | Chhand

    ByAdmin May 29, 2021October 12, 2022

    आइए प्रभु आइए ( Aaiye Prabhu Aaiye ) मनहरण घनाक्षरी छंद   लबों की हो मुस्कान भी पूजा और अजान भी अंतर्यामी प्रभु मेरे दौड़े-दौड़े आइए   जग पालक स्वामी हो हृदय अंतर्यामी हो हाल सारा जानते देर ना लगाइये   पलके अब खोल दो सबको आ संबल दो पीर भरे मेंघ छाये विपदा निवारिये…

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  • Waqt mile to
    शेरो-शायरी

    व़क्त मिले तो आँखों से आँखें मिलाना तू कभी | Ghazal

    ByAdmin May 29, 2021May 29, 2021

    व़क्त मिले तो आँखों से आँखें मिलाना तू कभी ( Waqt mile to aankhon se aankhen milana tu kabhi )   व़क्त मिले तो आँखों से आँखें मिलाना तू  कभी ! खीर  खाने  प्यार की तू मेरे घर आना तू  कभी   प्यार  के तू बांटना हर शख़्स को गुल देखले साथ नफ़रत का नहीं…

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  • हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं
    कविताएँ

    हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं | Bal Sahitya Rachna

    ByAdmin May 29, 2021February 7, 2023

    हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं ( Bal Sahitya Rachna )   हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं तुतलाती तुतलाती बोली मन के सच्चे हैं   बढ़ जाएंगे कदम हमारे खुले आसमान में अच्छे काम करेंगे हम भी भारत मां की शान में   तूफानों से टकराना तो खूब मन को…

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  • संभव हो तो
    कविताएँ

    संभव हो तो | Kavita Sambhav ho to

    ByAdmin May 29, 2021February 7, 2023

    संभव हो तो ( Sambhav ho to )   संम्भव हो तो कुछ बातों पे, मेरे मन की करना। सूर्ख रंग के परिधान पर तुम,कमरबन्द पहना।   लट घुघरालें एक छोड़ कर, जूडें को कस लेना, लाल महावर भरी पैजनी,थम थम करके चलना।   काजल की रेखा कुछ ऐसी, जैसी लगे कटारी। बिदिया चमकें ऐसे…

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