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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • गर है लिखने का शौक
    कविताएँ

    गर है लिखने का शौक | Kavita

    ByAdmin May 24, 2021May 24, 2021

    गर है लिखने का शौक ( Gar hai likhne ka shauq )   गर है लिखने का शौक तो कविता चुपचाप चली आती है। टूटे-फूटे शब्दों में भी भावनाएं निकल जाती है। हम तो मिश्रित भाषी हैं कभी हिंदी कभी सिंधी कभी पंजाबी कभी गुजराती निकल जाती है। भाषा के झरोखों से दिल की ऋतु…

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  • किसी जादू टोने का ही असर है
    शेरो-शायरी

    किसी जादू टोने का ही असर है | Ghazal

    ByAdmin May 23, 2021May 23, 2021

    किसी जादू टोने का ही असर है ( Kisi Jadoo tone ka asar hai )   किसी जादू टोने का ही असर है! परेशां इसलिए जीवन मगर है   बहुत भेजे उसके कासीद घर को नहीं आयी कोई उसकी ख़बर है   नजर आया नहीं मुझको कहीं भी उसी को ढूंढ़ती मेरी नजर है  …

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  • कौन हूँ मैं?
    कविताएँ

    कौन हूँ मैं | Kavita

    ByAdmin May 23, 2021

    कौन हूँ मैं? ( Kaun hoon main kavita )   सहमी सहमी कमजोर नहीं हूं भीगी भीगी ओस नहीं हूं आसमान पर उड़ने वाली चंचल चितवन चकोर नहीं हूँ   कोमल कच्ची डोर नहीं हूं अनदेखी से उड़ने वाली शबनम सम छोटी बूँदों जैसी खुशबू भीनी हिलौर नहीं हूं   कुछ जुमलों से डर जाउंगी…

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  • नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना
    कविताएँ

    नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना | Kavita

    ByAdmin May 22, 2021May 22, 2021

    नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ( Naina bawre dhoondhe meet purana )   नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना पल-पल ढूंढे बीता सावन ढूंढे बीती रतिया नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ?☘️? जिन बगिया में फूल खिले थे जिनमें बीते सावन जिस घर में था संग तुम्हारा ढूंढे वोही आँगना नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ?☘️?…

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  • Jab pyar ka
    शेरो-शायरी

    जब प्यार का गाया मैंने राग है | Ghazal

    ByAdmin May 22, 2021May 23, 2021

    जब प्यार का गाया मैंने राग है  ( Jab pyar ka gaya maine raag hai )   जब  प्यार  का  गाया  मैंनें  राग़  है देखो भी खिल उठा फ़ूलों का बाग़ है   की  नाम  से  तेरे  तू  देखले  सनम उल्फ़त का जल रहा दिल में चराग़ है   वो चोट दें गया दिल पे…

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  • Main hun paryavaran
    कविताएँ

    पर्यावरण देता हिदायत || Kavita

    ByAdmin May 22, 2021May 22, 2021

    पर्यावरण देता हिदायत ( Paryavaran deta hidayat )   मैं  पर्यावरण हूं,  तुम सब का आवरण हूं। रख लोगे गर मुझे सुरक्षित , हो जाओगे तुम भी सुरक्षित। मैं करू सहन अब  कितना? होता न सहन अब इतना। तुम मानव की गलती पर , मैं कुढ़ कुढ़ रोता हूं। मेरी एक ही गलती पर,  देखो…

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  • संतोष
    कविताएँ

    संतोष | Santosh par Kavita

    ByAdmin May 22, 2021February 8, 2023

    संतोष ( Santosh )   वक्त और हालात हमें सिखा रहे कई बात संतोष सुख का सागर आनंद मिले दिन रात   दमके सुंदर चेहरा होंठों की मुस्कानों से खुशियां मिलती हृदय को विरद बड़ाई कानो से   समदर्शी समभाव भरा सहनशीलता भरपूर धीरज धर्म संतोष हो घर खुशियां बरसे हजूर   जीवन में आनंद…

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  • जिंदगी
    कविताएँ

    जिंदगी | Kavita

    ByAdmin May 21, 2021

    जिंदगी ( Zindagi )   मेरी जिंदगी से पूछा मैंने एक रोज जीने का वह तरीका जो घुटन पीड़ा और दर्द से हो बिल्कुल अछूता जिंदगी के पास नहीं था कोई जवाब मुस्कुराकर वह बोली बताती हूं तुझे सलीका बहुत जिया अपने लिए जीवन जी कर देखो जीवन पराया दो कदम बढ़ाओ तुम किसी निर्बल…

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  • तुम्हारे संतान सदैव सुखी रहें
    कविताएँ

    तुम्हारे संतान सदैव सुखी रहें | Lambi Kavita

    ByAdmin May 20, 2021May 20, 2021

    तुम्हारे संतान सदैव सुखी रहें ( Tumhare santan sadaib sukhi rahe )   सभ्यता और संस्कृति के समन्वित सड़क पर निकल पड़ा हूँ शोध के लिए झाड़ियों से छिल गयी है देह थक गये हैं पाँव कुछ पहाड़ों को पार कर सफर में ठहरी है आत्मा बोध के लिए बरगद के नीचे बैठा कोई बूढ़ा…

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  • हे जग के करतार
    कविताएँ

    हे जग के करतार | Jag ke Kartar

    ByAdmin May 20, 2021October 9, 2023

    हे जग के करतार ( He jag ke kartar )   हे जग के करतार, जग का पालनहारा, लौटा दो मुस्कान लबों की, सुनो सांवरा प्यारा ।   घट घटवासी अंतर्यामी, हाल पता है सारा, मंझधार में डूबी नैया, प्रभु लगा दो किनारा।   कुदरत कई रंग बदलती, क्यों लीला करते हो, सबको जीवन देने…

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