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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • पापी पेट की खातिर
    कविताएँ

    Kavita Papi pet ke khatir | पापी पेट की खातिर

    ByAdmin April 15, 2021February 9, 2023

    पापी पेट की खातिर ( Papi pet ke khatir )   वो चिड़िया रोज सवेरे है आती करने चीं चीं चीं चीं मधुर स्वर लहरियां उसकी मेरे मीठे स्वप्न पर,भारी है पड़ती। जाग जाता हूं फटाफट उसके लिए दाना पानी रख आता हूं फुदक फुदककर है खाती कभी जलपात्र में नहाती मानो मुझे हो रिझाती…

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  • मुक्तक
    मुक्तक

    Muktak | मुक्तक

    ByAdmin April 15, 2021December 3, 2022

    मुक्तक ( Muktak )   निर्भय  रहकर  जो  जीवन जीता है धीरज धरकर जो गमों के घूंट पीता है कर्म  प्रधान है इस चराचर जगत में आत्मा  अजर  अमर  कहती गीता है   वक्त और हालात जिंदगी जीना सिखाते हैं कौन  अपना  कौन  पराया  सब बताते हैं संघर्षों से ही फौलाद बनते हैं इरादे मन…

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  • मय दानव
    कविताएँ

    May Danava | मय दानव (महाभारत)

    ByAdmin April 15, 2021April 15, 2021

    मय दानव ( महाभारत ) ( May Danava  )   खाण्डव वन में मय दानव ने, इन्द्रप्रस्थ रच डाला। माया से उसने धरती पर,कुछ ऐसा महल बनाया।   अद्भुत उसकी वास्तु शिल्प थी,कुछ प्रतिशोध भरे थे, जिसके कारण ही भारत में, महाभारत युद्ध कराया।   कौरव ने जब खाण्डव वन को, पाण्डवों को दे डाला।…

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  • बेरोजगारी और युवाओं में आक्रोश
    निबंध

    Berojgari par nibandh | बेरोजगारी और युवाओं में आक्रोश

    ByAdmin April 14, 2021December 7, 2022

    निबंध : बेरोजगारी और युवाओं में आक्रोश ( Unemployment and youth outrage: Essay In Hindi ) बेरोजगारी आज हमारे देश के लिए एक अभिशाप बन गई है और इसका बने रहने से विकास आनंदमय नही बन सकता है। इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में चाहे वह विकसित हो या विकासशील या फिर अल्पविकसित, बेरोजगारी की समस्या…

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  • एक पेड़
    कविताएँ

    Kavita | एक पेड़

    ByAdmin April 14, 2021April 14, 2021

    एक पेड़ ( Ek Ped )   कभी धूप कभी पानी मे ,देती हमें शीतल छाया । आजा आराम करले संगी ,चल रही मंद मंद हवा ।।   जब  होती  तेज  धूप ,चिंता  हमारी  कम करती । मंजिल तक पहुँचने मे ,मदद हमारी हमेशा करती ।। देती हमें कीमती चीजे ,कभी न स्वार्थ वो दिखलाती…

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  • अग्निसुता
    कविताएँ

    Agnisuta par Kavita | अग्निसुता

    ByAdmin April 14, 2021February 9, 2023

    अग्निसुता ( Agnisuta )   द्रौपदी  ने  खोले  थे  केशु, जटा अब ना बांधूंगी। जटा पर दुःशासन का रक्त, भीगों लू तब बाधूंगी। मेरे प्रतिशोध की ज्वाला से,जल करके नही बचेगे, मै कौरव कुल का नाश करूगी, केशु तभी बाधूंगी।   धरा पर नारी को कब तक सहना,अपमान बताओं। पुरूष की भरी सभा मे,द्रोपदी की…

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  • वह बचपन की याद पुरानी
    कविताएँ

    Kavita | वह बचपन की याद पुरानी

    ByAdmin April 14, 2021

    वह बचपन की याद पुरानी ( Woh bachpan ki yaad purani ) दही  बिलोती  दादी नानी नहीं रही वह कथा कहानी कहां  गई  पीपल की छांव वो बचपन की याद पुरानी   सावन  के  झूले  कहां  अब कहां बरसता टिप टिप पानी बहुत सुहानी लगती हमको वो  बचपन  की  याद पुरानी   निकर पहन स्कूल…

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  • नेहरू जी बताएंगे
    व्यंग्य

    Vyang | नेहरू जी बताएंगे ! ( व्यंग्य )

    ByAdmin April 14, 2021

    नेहरू जी बताएंगे ! ( व्यंग्य ) ( Nehru Ji Batayenge )   वादे के मुताबिक ही हम काम कर रहे हैं, क्यों बेकार में फरियाद कर रहे हैं। सबको मिलेगी जगह शमशान में, क्यों इतना हैरान हो रहे हैं। आपने जो चाहा था,उसी पर काम कर रहे हैं, अयोध्या में बन रहा है, वाराणसी…

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  • दिल हुआ आपका दिवाना है
    शेरो-शायरी

    Romantic Ghazal | दिल हुआ आपका दिवाना है

    ByAdmin April 14, 2021April 15, 2021

    दिल हुआ आपका दिवाना है ( Dil Hua Aapka Deewana Hai )   दिल हुआ आपका दिवाना है। धड़कनों में तुझे बसाना है।। तेरे  दम  से  वजूद  है  मेरा। सांस लेना तो इक बहाना है।। कम नहीं झील से तेरी आंखें। डूब  के  ही  सुकून  पाना है।। भूल सकता नहीं नशा हरगिज़। जो  तेरा  आँख…

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  • बाल साहित्य रचना
    बाल साहित्य

    हम नन्हे बच्चे हैं | बाल साहित्य रचना

    ByAdmin April 14, 2021September 24, 2023

    बाल साहित्य रचना ( Bal Sahitya Rachna )   हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं तुतलाती तुतलाती बोली मन के सच्चे हैं बढ़  जाएंगे  कदम  हमारे  खुले आसमान में अच्छे काम करेंगे हम भी भारत मां की शान में तूफानों  से  टकराना  तो  खूब  मन को भाता है आगे बढ़ना और संभलना यह…

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