• याद आता है

    याद आता है   सर्दी की गुनगुनी धूप में वो तेरा पार्क में बैठ तेरा अपनी आँखों से मुझे अनिमेष तकना और मेरा हाथ थामना याद आता है……   तुम्हारा मेरी हथेलियों में अपना हाथ थमा देना अपनी उंगलियों को मेरी उंगलियों में उलझा देना और फ़िर धीरे धीरे अपनी उंगलियों से मेरी हथेली पर…

  • करवा चौथ | Hindi poem On karwa chauth

    करवा चौथ ( Hindi poem On karwa chauth )   चाँद का कर लूं सनम दीदार मैं प्यार से जो बंधा करवा चौथ है   उसकी चूड़ी उसकी देखो बिंदिया  मुस्कुराती  सूरत करवा चौथ है   हो गया दीदार अपनें चाँद का प्यार का आया वो करवा चौथ है   सज गयी है चाँद की …

  • पढ़ें लिखे मुख्यमंत्री का फायदा

    पढ़ें लिखे मुख्यमंत्री का फायदा ******** जनता का देश का है फायदा ही फायदा जो पुल सड़क निर्माण में करोड़ों है बचाया वादा जो किया निभाया आम आदमी में एक उम्मीद जगाया बेटा बन बुजुर्गो का रखा ख्याल पहुंचाया घर राशन हर हाल जो कहे सो करे! जनता के लिए सड़क पर भी आ लड़े…

  • पढ़ पाऊँ

    पढ़ पाऊँ   हमेशा से ही मेरी हरसत रही है ये कि मैं भी कभी देखूँ किसी को सामने बैठा कर उसकी झील सी आँखों में अपने को डुबो कर….! एक ख्वाहिश ही रही कि उसकी आँखों को पढ़ पाऊँ क्या लिखा है उसके दिल में क्या चाहत है उसकी क्या दर्द है उसकी आँखों…

  • सितम जब वो मेरे सह गयी

    सितम जब वो मेरे सह गयी     सितम जब वो मेरे सह गयी बात सीधे जिगर तक गयी।। दूसरों से गिला कुछ नहीं, मुझको अपनी नज़र लग गयी।। इश्क करने चला था मगर, बात ख्वाबों में ही रह गयी।। आंसू सम्भले नहीं बह गये, जाने धीरे से क्या कह गयी।। हमने रोका बहुत न…

  • थोड़ा उदास हूँ

    थोड़ा उदास हूँ   पिछले कई दिनों से मन थोड़ा #उदास रहने लगा है समझ नहीं आ रहा कि क्या करें हम एक ही बात बार-बार #मन में हर बार आ रही है कि हर बार मेरे ही साथ ऐसा क्यूँ होता है..?   उन्हीं की बातों को #दिल से लगाकर विचारों की #मथनी चलती…

  • मन जीता जग जीता | Man Jeeta

    मन जीता,जग जीता ( Man jeeta jag jeeta )    मन की मुराद होत न पूरी अनन्त का है सागर, एक बाद एक की चाहत होता रहता उजागर। चंचल मन चलायमान सदैव चितवत चहुंओर, चाहत ऐसे सुवर्ण सपनें जिसका न है ओर। मन के वश में हो मानव इधर-उधर धावत है, सुख त्याग,क्लेश संजोए, समय…

  • गुलो-गुलजार करती है दिलों को सार की बातें

    गुलो-गुलजार करती है दिलों को सार की बातें     गुलो-गुलजार  करती है  दिलों को सार की बातें। जुबां से फूल झरने दो  करो बस प्यार की बातें।।   दिलों  को   बांटते  हैं  जो  रहे  वो  दूर ही हमसे। पङी  इक ओर रहने दो  सभी तकरार की बातें।।   मुसलमां  है  न  हिंदू  है  करे …

  • शायद हम बच्चे हो गए

    शायद हम बच्चे हो गए   शायद हम बच्चे हो गए शायद अब हम बच्चे हो गए       क्यूंकि      अब बच्चे बड़े हो गए…. अब न सुबह जल्दी       उठने की हड़बड़ी….. न जल्दी खाना     बनाने की फरमाइशें…. न बजट की खींचातानी    न कल की चिंता…..  न तर्क करता कोई      न…

  • गुडडू के नाम पत्र

    गुडडू के नाम पत्र मेरा और तुम्हारा साथ करीब 2 वर्ष पुराना है। मुझे याद है जब तुम पहली रात को मुझे मिली थी। तुम पहली नजर में ही मुझे पसंद आ गयी थी। यद्यपि तुम संवेदनशील और आत्मनिर्भर हो; नवम्बर तो तुम झेल जाती हो परंतु दिसम्बर की हाड़ कंपा देने वाली ठंड में…