• दीवार | Deewar

    विशाल का फोन आया कमल पर कार्यक्रम की आप को पता है आप के घर के पीछे ऊंची दीवार बन गया है, कमल ने कहा कि नहीं मे तो बैंक मे हू। कमल तेजी से घर आता है और पीछे जाकर दीवार देखकर नर्वस हो जाता है और शोच ने लगा कि मेरी रानी कविता…

  • मानव यही धर्म | Manav Yahi Dharm

    मानव यही धर्म ‘मानव’ यही रहा है धर्म पुराना,धर्म का न कोई अलग निशाना;न देखा ‘अल्लाह’ को किसी ने,नहीं ‘गॉड’ से भी पाया किसी ने | इंसान ने ही भगवान बनाया,भगवान एक ही आद्य या अंत;अब तो मिटा दिया करो सभी,दिवार जात-पात या धर्म-पंथ | धर्म भेद को भूलाकर सभी,एक साथ रहो मिलकर अभी;धर्म कलह…

  • डा. तरुण राय ‘कागा’ जी

    डा. तरुण राय ‘कागा’ जी रेतीले धोरों की माटी का सच्चा सपूत,कला-साहित्य का जो रखे अद्भुत रूप।चौहटन की धरती से उठाया परचम,डा. तरुण राय ‘कागा’, नाम हुआ अमरतम। कभी कविताओं में बहाए भावनाओं के रंग,कभी विधायक बन सजाए जनता के संग।साहित्य से राजनीति तक सफर किया विशाल,हर क्षेत्र में दिखी आपकी अद्वितीय मिसाल। कलम से…

  • बता गये आँसू | Bata Gaye Aansu

    बता गये आँसू हाले – दिल सब बता गये आँसूजब भी आँखों में आ गये आँसू जब्ते- ग़म करना भी नहीं आसांअपनी फ़ितरत जता गये आँसू दूर तक कैसे चलते खारों परहौसला सब डिगा गये आँसू हमसफ़र जब गले से लग रोयेइक ख़ुशी सी जगा गये आँसू कौन अपना है या पराया हैदुनियादारी सिखा गये…

  • इमली का पेड़ | Imali ka Ped

    इमली का पेड़ वो चुपचाप खड़ाबूढ़ा इमली का पेड़पाठशाला प्रांगण मेंदो मंजिला इमारत के सामनेध्यानमग्नबुद्ध की तरहमानो सत्य का ज्ञान पाकरदे रहा संदेश मानवता कोजड़ता छोड़ोया ऋषि की भांति तपस्या में लीनजिसने सीख लिया सम रहनाइस सावन मेंनहीं आई नवीन पत्तियांफिर भी बाँटता रहताखड़खड़ाती इमली के फलअब उसे नहीं लगता डरआंधी -तूफान सेजैसे उसने समझ…

  • प्रसिद्ध दिव्यांग साहित्यकार सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ को काम आया आत्मविश्वास

    कुछ बच्चे प्रारम्भ से ही शारीरिक और मानसिक विकलांगता का शिकार हो जाने के कारण बचपन के अतुलित आनन्द से वंचित रह जाते हैं। उनके लिए बचपन के ये मधुर क्षण, दूर के सुहाने ढोल बनकर रह जाते हैं। कुछ इसी प्रकार की कठोर परिस्थितियों का सामना सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ को भी करना पड़ा। सुरेश…

  • मेरा घर मर रहा है

    ये है वह दरवाजा जो कि माँ और बाबूजी के हाथों सैकड़ो बार खुला बन्द हुआ.. ये जो रंग लगा है न यह मेरे हाथों से ही लगा हुआ है.. एक कमरे का घर था वो। छोटा सा कमरा मगर बहुत बड़े मन के माता पिता और बहुत प्यारे प्यारे भाई बहनों की शरारतों ओर…

  • सुनो तो | Suno to

    सुनो तो आज आ रही है हिचकियां सुबह से न जाने क्यों,कल से ही दोनों नयन फड़क रहे हैं न जाने क्यों।दोनों नयन फड़कता है समझ में नहीं आता मेरे,मन मेरा कह रहा है वह आएगी न जाने क्यों।। दब गई है चिट्टियां मोबाइल के इस दौर में,प्यार भी तो घट गया मोबाइल के इस…

  • देखते है | Dekhte Hain

    ( ऐसे तो कितने ही सारे अतुल सुभाष है जिन्हें कोई जानते नहीं है, उनमें से कुछ दुनिया में आज भी मौजूद है कुछ इस दुनिया से जा चुके हैं!! ) देखते है देखते है अब कौन हो हल्ला करेगा।देखते है अब कौन कैंडल जलाएगा। निर्दोष पुरुष बेमौत मरा है यह देखो,कौन जो खिलाफ आवाज़…

  • यहाँ चंचल नयन वाली कहाँ है

    यहाँ चंचल नयन वाली कहाँ है दिखाओ वह घटा काली कहाँ हैयहाँ चंचल नयन वाली कहाँ है जुबाँ उसकी सुनों काली कहाँ हैदरख्तों की झुकी डाली कहाँ है गुजारा किस तरह हो आदमी काजमीं पर अब जगह खाली कहाँ है जिसे हम चाहते दिल जान से अबहमारी वो हँसी साली कहाँ है मिलन अब हो…