Parvarish Par Muktak

परवरिश | Parvarish Par Muktak

परवरिश

( Parvarish )

 

पालते लाड प्यार से, ममता दुलार से।
खुशियों बहार से, मीठी पुचकार से।
रखे औलाद को, दुनिया में मां बाप।
आंखों का तारा हमे, दिलों के तार से।

शिक्षा संस्कार से, अपनापन प्यार से।
रिश्तो में प्रेम घोले, मधुर व्यवहार से।
चलना सिखाते हैं, जीवन की राहों पे।
मंजिलें दिखाते वो, ज्ञान के भंडार से।

मुस्कानों के मोती से, मधुरम फुहार से।
जीना सिखाते हमे, जीवन के सार से।
ठंडी छांव शीतलता, मुश्किलों तूफां में।
सर पर हाथ रख देते, मां बाप प्यार से।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

ठिठुरन | Thithuran par chhand

 

Similar Posts

  • Muktak | मुक्तक

    मुक्तक ( Muktak )   निर्भय  रहकर  जो  जीवन जीता है धीरज धरकर जो गमों के घूंट पीता है कर्म  प्रधान है इस चराचर जगत में आत्मा  अजर  अमर  कहती गीता है   वक्त और हालात जिंदगी जीना सिखाते हैं कौन  अपना  कौन  पराया  सब बताते हैं संघर्षों से ही फौलाद बनते हैं इरादे मन…

  • जिंदगी किरदार से ज्यादा कुछ नहीं | Zindagi Kirdar

    जिंदगी किरदार से ज्यादा कुछ नहीं ( Zindagi Kirdar se jyada kuchh nahin )   जिंदगी किरदार से ज्यादा कुछ नहीं। बंदगी प्रभु प्यार से ज्यादा कुछ नहीं। रंगमंच यह दुनिया का भव सागर है। झूठा है यह संसार ज्यादा कुछ नहीं। नश्वर यह तन काया ज्यादा कुछ नहीं। झूठी है ये मोह माया ज्यादा…

  • मुक्तक मां | Muktak Maa

    मुक्तक मां ( Muktak Maa)   मां की तरफ़ से सुन लो ये पैगाम आया है उसी पैग़ाम पर यारों हमारा नाम आया है, लिखूंगा मैं वतन ख़ातिर वतन पर जान दे दूंगा, वतन के ही हिफ़ाजत का मुझे ये काम आया है।   झूठ का मै दम दिखाना चाहता हूं, सबके दिल का गम…

  • घुंघट | Muktak in Hindi

    घुंघट ( Ghoonghat )    शर्म दर्शाता नारी घूंघट सुंदरता का आवरण बुजुर्गों के सम्मान की छवि मर्यादा का चरण सनातन संस्कृति में रिवाज मुगलकाल पनपा उग्र शासक भय से कुरीतियों का किया वरण   पद्मिनी का जौहर साक्षी आन बान शान का घूंघट बन गया था प्रतीक नारी के सम्मान का आलोकित हो उजियारा…

  • खुशनसीब | Khushnaseeb

    खुशनसीब ( Khushnaseeb )    खुशनसीब होते वो लोग जो हंसकर जी लिया करते हैं। भोली मुस्कान रख चेहरे पर दिल जीत लिया करते हैं। जवानी के मद में अंधा बिल्कुल भी नहीं होते कभी वो। शुभ कर्म और व्यवहार से जीवन गुजार लिया करते   जवानी ( Jawani )   जवानी के मद में…

  • चांद | Chand par muktak

    चांद मुक्तक  ( Chand Muktak )   चांद तारे बिछा देंगे हम राह में कुछ नया कर दिखा देंगे चाह में आओ मिलों हमसे मुस्कुरा कर गगन छू लेंगे हम आपकी पनाह में   बस जाओ मेरे दिल में, चमका दो किस्मत का तारा। महका दो जीवन की बगिया, खिला दो पुष्प ये प्यारा।  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *