पिता होते हैं महान

पिता होते हैं महान | Pita par poem

पिता होते हैं महान

( Pita hote hain mahaan ) 

पिता जी आप महान,
हम आपकी संतान ।
हम-सब के हैं अभिमान,
नित्य गाएं आपका ही गुणगान।
आपके कंधों पर बैठकर जाने दुनिया जहान,
मिली आप ही से है पहचान;
बनें हैं जो सभ्य इंसान।
पिताजी आप महान….
उंगली पकड़ हमें चलना सिखाए,
सारे नाज नखरे हमारे उठाए।
लिखना पढ़ना भी सीखाए,
सारे अनुभव हम पर लुटाए।
आपकी छोटी-छोटी बातें भी,
लग रहीं अब बड़े काम की।
उन्हीं के दम पर आज खड़े हैं,
अब उन्हीं बातों का ज्ञान-
अपनी संतानों को दे रहे हैं।
आपकी छत्रछाया सदा हमें मिलती रहे,
सदा सर्वदा आप प्रसन्न चित्त रहें।
गलती गर कोई हमसे हो जाए!
अबोध समझ हमें क्षमा करें,
डांटे समझाएं सुझाएं;
पर कभी न गुस्साएं।
सदा स्नेह आशीष ही हम-सब पाएं,
बड़ी फलदाई होतीं आपकी दुआएं।
ईश्वर से करें हम यही निवेदन,
प्रभु ! अभी बनाए रखें पिताजी का जीवन।
सपने में भी उन्हें कोई कष्ट न देना,
बदले में हमें ही जो चाहे सजा देना।
बस इतना करना एहसान,
प्रभुजी ! आप और पिता दोनों महान।
हम-सब आप ही की संतान।
सदा कृपा बरसाते रहना,
प्रकाश पुंज से नहलाते रहना।

 

 

नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें :

शाबाश कतर | Qatar par kavita

Similar Posts

  • चाहत | Chaahat

    चाहत ( Chaahat )    चाहत के मौन गलियारों में, नेह का मृदुल स्पंदन उर तरंग नवल आभा, प्रसून सदृश मुस्कान । परम स्पर्शन दिव्यता, यथार्थ अनूप पहचान । मोहक स्वर अभिव्यंजना, परिवेश सुरभि सम चंदन । चाहत के मौन गलियारों में, नेह का मृदुल स्पंदन ।। अनुभूति सह अभिव्यक्ति , मिलन अहम अभिलाषा ।…

  • राष्ट्रीय युवा दिवस : स्वामी विवेकानंद

    राष्ट्रीय युवा दिवस : स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद महान।सब करते उनका सम्मान।।यह युवा दिवस उनके नाम।हिंदुस्तान की थे वो शान।। देश की संस्कृति को बचाया।हिंदुस्तान का मान बढ़ाया।।सच रहा पर वो सदा चले।ज्ञान का पाठ सबको पढ़ाया।। गरीब की मदद करो बताया।दिलों में देश का प्रेम जगाया।।प्यार स्वामी विवेकानंद जी ने।देश हित मार्ग सबको दिखाया।।…

  • आरंभ ही अंत है | Aarambh hi Ant Hai

    आरंभ ही अंत है ( Aarambh hi ant hai )    मत सोच ये कि तूने क्या किया है, जो पाया उसमें भी कुछ खोया है, हर हार में भी तेरी जीत है, कितना भी सुलझा ले खुद को तू, तुझे नीचा दिखाना यही दुनियां की रीत है, तू गिरकर संभलने के भरसक प्रयास कर,…

  • बदगुमानी के धागे | Badgumani ke Dhage

    बदगुमानी के धागे ( Badgumani ke Dhage )   बदगुमानी के कुछ धागे गुथे-गुथे स्मृतियों के मोती बिखरे हुए जैसे किसी मियाद के किसी पृष्ठ में रखा सूखा गुलाब कोई अतीत-सा प्रतिचित्र कुछ चंद नज़्म कहीं रूठी-सी आधी अधूरी-सी। अनायास लिखते-लिखते कहीं से कोई सदा मन के शांत कोने में गुजर जाती है। ये तन्हा-सा…

  • ध्यान आपका ही धरता हूं | Kavita Dhyan Aapka hi Dharta Hoon

    ध्यान आपका ही धरता हूं ( Dhyan aapka hi dharta hoon )    मैं हर जगह बस छवि आपकी, नैनों में देखा करता हूं। तारणहारा तुम हो भगवान, ध्यान आपका ही धरता हूं।। अज्ञानी हूं अनजाना हूं, दोष भरें हैं घट में मेरे। गुरुवर तुम बिन कौन सहायक, नाम रटूं मैं सांझ सवेरे। उलझा विषियन…

  • क़ुबूलनामा | Qubool Nama

    क़ुबूलनामा ( Qubool nama ) प्यार छुपाना क्यों बताती क्यों नहीं, अपने जज़्बात तुम जताती क्यों नहीं, मिलना न मिलना बात है मुकद्दर की अपना हूँ एहसास कराती क्यों नहीं। इश्क़ में आँसू नहीं हम चाहते है खुशी, बात ये अपनों को समझाती क्यों नहीं। दुश्मन है जो भी हमारी मोहब्बत के, बग़ावत में आवाज़…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *