Poem in Hindi on Corona

हिरण्यकश्यप बना कोरोना | Poem in Hindi on Corona

हिरण्यकश्यप बना कोरोना

( Hiranyakashyap bana corona ) 

 

में हूँ वैश्विक महामारी यह कोविड़,
चाईना से आया हूँ में यह कोविड़।
ख़ुद को ऐसा सब बनाओं शोलिड़,
पास नही आऊंगा में यह कोविड़।।

यह दूरी सबसे आप बनाकर रहना,
सुरक्षा उपाय ऐसा अपनाते रहना।
ज्यादा भीड़-भाड़ में कोई न जाना,
भक्त प्रहलाद बनकर दिखलाना।।

आज सभी जगहों पर में हूँ फैला,
चारों तरफ ही मेरा यह नाम चला।
आज हिरण्यकश्यप में बन बैठा,
कोई मार ना सके चाहें हो कैसा।।

ना प्रातः में मरू ना संध्या मरू,
ना दिन में मरू ना रात में मरू।
ना जल में मरू ना थल में मरू,
नही घर में मरू ना ही बाहर मरू।।

ना देवों से मरू ना दानवों से मरू,
न आकाश में मरु न पाताल मरू।
ना नर से मरू ना जानवर से मरू,
ना अस्त्र से मरू ना शस्त्र से मरू।।

अब आऐ स्वयं नरसिंह अवतार,
और रोके दे यहां पर यें नरसंहार।
उदय फिर ये एक कविता है लाया,
सुरक्षाएं अपनाएं बहना व भईया।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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