Pradhan par Kavita

प्रधान | Pradhan par Kavita

प्रधान

( Pradhan ) 

 

गांव में होता यह प्रधान का पद,
मुखियां गांव का होता यह पद !
पांच साल यह जन सेवा करता,
गांवों का विकास यही करवाता !!

काम होते है सब इनके ही हाथ,
देख-रेख एवं समय के अनुसार !
जो कोई करता है अच्छा काम,
सम्मानित करता उसको ये गांव !!

गांवों में होते रहते अनेकों काम,
और काम से होती यह पहचान !
भाई-बंदी का कोई काॅलम नही,
चाहें वह हो प्रधान का ही भाई !!

कोई भी गांव में होते है परेशान,
कागज, पट्टा, वृहद पेंशन काम !
बनाते पंच, सरपंच प्रधान काम,
चाहें समय लगे यह सुबह-शाम ‌!!

रोड़ और नाले, कुंआ व तालाब,
बारह महीनें चलता रहता काम !
मज़दूर मजदूरी करते सब लोग,
गांव की उन्नति चाहतें सब लोग !!

क्या आया गया रहें सब रिकाॅर्ड़,
पेपर, फाईले, कम्प्यूटर रिकाॅर्ड़ !
कोई इनमे कर सकते नही छल,
अकाउंट में जाता पैसा निश्छल !!

आज सारा सच बता रहें है हम,
करें भलाई सभी भाई मिलकर !
जनता का पैसा जनता कमाई,
प्रधान को सत्ता जनता दिलाई !!

सारा सच गणपत कहता आज,
सहयोग करें सब मिलकर राज !
नही लेना कोई यें ग़रीब बद्दुआ,
करीब से देखो हर एक समाज !!

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

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