प्रथम पूज्य आराध्य गजानन

प्रथम पूज्य आराध्य गजानन | Kavita

प्रथम पूज्य आराध्य गजानन

( Pratham pujy aradhy gajanan )

 

आओ मिल करते अभिनंदन।
देव अग्रज गणपति को वंदन।।

 

ज्ञान के दाता बुद्धि विधाता,
चौड़ा मस्तक हमें सिखाता,
दर्शन दो प्रभु द्वार खड़े हैं,
पार्वती शिव के हो नंदन।
देव अग्रज गणपति को वंदन।।

 

गज सा बदन लिए हो भारी।
मूषक पर तुम करो सवारी।
वाहन छोटा तन है मोटा,
राज छुपा मन है स्पंदन ।
आओ मिल करते अभिनंदन।।

 

सूक्ष्म चिंतन करते रहना ।
परख करेंगे छोटे नयना।
एकदंत की बनी लेखनी,
भव के काटो सारे बंधन।।
देव अग्रज गणपति को बंदन।।

 

बड़ी सूंड और कर्ण विशाला,
उदर भरा रहे हरदम जाला।
रिद्धि-सिद्धि संग आप पधारो,
जड़मति हम तुम हो जी चंदन।।
आओ मिल करते अभिनंदन।।

?

कवि : सुरेश कुमार जांगिड़

नवलगढ़, जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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