गणतंत्र दिवस : भारत का राष्ट्रीय पर्व
गणतंत्र दिवस : भारत का राष्ट्रीय पर्व

गणतंत्र दिवस : भारत का राष्ट्रीय पर्व पर निबंध 

 

प्रस्तावना -:

हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे भारत मे हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इसी दिन भारत मे भारत का अपना संविधान पूरी तरह से लागू किया गया था।

भारतवासी इसे आत्म गौरव और सम्मान के साथ जोड़कर देखते हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर सभी स्कूल – कॉलेजों एवं सरकारी कार्यालयों में झंडारोहण किया जाता है। इसके बाद इस मौके पर भाषण, निबंध लेखन, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है।

भारत में इसे राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन सभी धर्म और जाति के लोग एक होकर इस दिवस को मनाते हैं। इस मौके पर राष्ट्रीय अवकाश रहता है।

इतिहास :-

हमारे देश काफी समय तक ब्रिटिश शासन का गुलाम रहा है। भारतीय ब्रिटिश शासन द्वारा बनाए गए कानून को मानने के लिए विवश थे। भारत की आजादी के लिए विभिन्न लोगो ने अंग्रेजों स लंबा संघर्ष किया, जिन्हें अब स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाना जाता है।

लम्बे संघर्ष के बाद अंततः 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से भारत आजाद हो गया। तब भारत को अपने देशवासियों के लिए भारतीयों द्वारा बनाये गए संविधान की जरूरत हुई।

संविधान सभा द्वारा भारत के लिए अपना संविधान बनाया गया, जिसे बनाने में 2 साल 11 महीना 18 दिन का समय लगा। भारत का अपना संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया था। 26 जनवरी 1949 को संविधान को आंशिक रूप से लागू कर दिया गया था।

लेकिन पूर्ण रूप से संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। तब से ही 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। संविधान को पूर्ण रूप से 26 जनवरी को ही लागू करने के पीछे 26 जनवरी का ऐतिहासिक दिन है।

26 जनवरी 1930 के दिन ही कांग्रेस द्वारा पहली बार ब्रिटिश शासन से भारत के लिये पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी। इसीलिए जब हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 को बन कर तैयार हो गया तो ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसे संपूर्ण रूप से 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।

तब से इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। संविधान के लागू होने के साथ ही भारत वैश्विक पटल पर एक लोकतांत्रिक देश के रूप में स्थापित हो गया। आज हम कोई भी फैसला स्वतंत्र रूप से, हमारे संविधान और तांत्रिक लोकतंत्र व्यवस्था की वजह से ही ले पा रहे हैं।

गणतंत्र दिवस से जुड़े रोचक तथ्य :-
  • गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत के राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी देते हैं।
  • पहली बार गणतंत्र दिवस का समारोह दिल्ली के राजपथ पर 1955 को आयोजित किया गया था।
  • 26 जनवरी 1930 में कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी।
गणतंत्र दिवस समारोह :-

हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर देश की राजधानी दिल्ली में राजपथ पर कई तरह के भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन किसी विदेशी को अतिथि के रुप में आमंत्रित करने की प्रथा भी है।

कई बार एक से अधिक अधिक अतिथियों को भी आमंत्रित किया गया है। गणतंत्र दिवस के मौके पर सर्वप्रथम राष्ट्रपति द्वारा तिरंगा फहराया जाता है और फिर सभी लोग राष्ट्रगान गाते हैं।

झंडारोहण के बाद कई तरह के सांस्कृतिक और पारंपरिक झांकियां निकाली जाती हैं और विशेष परेड का कार्यक्रम आयोजित होता है।

परेड का आयोजन हमारे प्रधानमंत्री द्वारा राजपथ पर स्थित अमर जवान ज्योति पर पुष्प डालने के बाद किया जाता है। इस परेड में भारतीय सेना के रेजिमेंट, वायु सेना और नौसेना द्वारा भी हिस्सा लिया जाता है।

गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भारत के अपने सामरिक एवं कूटनीतिक शक्ति को भी प्रदर्शित करता है। इस मौके पर सैन्य प्रदर्शन के जरिये विश्व के समक्ष अपनी रक्षा शक्ति का प्रदर्शन करता है।

गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित होने वाला यह समारोह भारत की विदेशी नीति के दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि विभिन्न देशों के मुख्य अतिथियों को इस दौरान अतिथि के रुप में आमंत्रित किया जाता है और भारत को उन देशों के साथ संबंध को बढ़ाने का मौका मिलता है।

निष्कर्ष :-

भारत के संविधान को सबसे बड़ा लिखित संविधान के तौर पर जाना जाता है। गणतंत्र दिवस का पर्व हमारे देश को जोड़ने का काम करता है।

गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले समारोह में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के राज्यों की झांकियां देखने को मिलती है।

यह भारत की विभिन्नता को दिखाती है यह हर भारतीय को भिन्नता में एकता की डोर में पिरोने का काम करती है, जिस पर हर भारतीय गर्व करता है।

यह वह दिन है जब हमारा देश स्वतंत्रता रूप से वैश्विक मानचित्र पर अपनी पहचान बना कर एक गणतांत्रिक देश के रूप में स्थापित हुआ था। यही वजह है कि भारतभर में गणतंत्र दिवस धूमधाम से हर भारतीय द्वारा मनाया जाता है।

 

लेखिका : अर्चना 

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