Rifle par Kavita

राइफल हमारी साथी | Rifle par Kavita

राइफल हमारी साथी

( Rifle hamari sathi ) 

 

यही हमारी एक सच्ची साथी,
दुश्मन का यह संहारक साथी।
हार को जीत यह बना देती है,
हमेशा हमारे संग रहती साथी।।

रायफल नाम दिया है इसको,
रखतें जवान हाथों में इसको।
इसके बिना हम रहते है अधूरे,
और हमारे बिना ये भी अधूरी।।

रात एवं दिन रहते है हम साथ,
बगल में लेकर सोते हम रात।
ख़ुद से ज्यादा प्यार इसे करते,
सफाई का विशेष ध्यान रखते।।

अपने आप यह चलती नही है,
गलती पर यह छोड़ती नही है।
निकली गोली वापस न आती,
हीट हुआ तो फिर ढ़ेर वही है।।

जब तक करेंगें वतन की सेवा,
छोड़ेगें ना इसको हम अकेला।
ऐसे रखते है जैसे हमारा अंग,
दुश्मनों का करती ये विधवंश।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • धन्य है वह अयोध्या नगरी | Ayodhya par kavita

    धन्य है वह अयोध्या नगरी ( Dhanya hai wah ayodhya nagari )   धन्य है वह अयोध्या नगरी जहां जन्में थें श्रीराम, भरत लक्ष्मण और शत्रुघ्न के बड़े भ्राता श्रीराम। सबको गले लगाया अद्भुत अद्भुत किए थें काम, मर्यादा पुरूषोत्तम कहलाएं वो भगवान श्रीराम।।   धर्म का पाठ पढ़ाकर आपने दिया सब को ज्ञान, ज़रुरतमंद…

  • औघड़ दानी | Aughad dani par kavita

    औघड़ दानी ( Aughad dani )   जब कोई ना हो सहारा रिश्तो के बंधन से हारा फिरता जब तू मारा मारा देता एक ही साथ तुम्हारा औघड़ दानी बाबा प्यारा जिसने भवसागर को तारा मिले नदी को जैसे किनारा वह हरता है संकट सारा वह जाने कष्ट है हमारा करता जीवन में उजियारा जो…

  • बरसात का आगमन | Kavita Barsaat ka Aagman

    बरसात का आगमन ( Barsaat ka Aagman ) एक गौरैया बारिश में अपने पंख फैलाकर जब नहाती है तब सूचना देती है वह बारिश के आगमन का। और बादल आपस मे टकराकर टूटते है, बिखरते ही अपनी बूंदो को इस धरा पर दूर किसी बस की खिड़की में तब झाँकता दिखलाई देता है एक धुंधला-सा…

  • उजाड़ो न दुनिया | Ujado na Duniya

    उजाड़ो न दुनिया ! ( Ujado na duniya )    पैग़म्बरों की जमीं,अम्न बोते चलो, जंग को जहां से बचाते चलो। बंट गई है दुनिया आज दो धड़ों में, लगी आग को तुम बुझाते चलो। फासला बढ़ा है लोगों के अंदर, दिल की दूरियाँ को घटाते चलो। नहीं थम रहे हैं आँसू जहां के, उदासी…

  • सिया के राम | Poem Siya Ke Ram

    सिया के राम ( Siya Ke Ram )   सिया के राम जन्म लेकर, पतित का नाश करेगे अब। ताड़का खर दूषण के संग, नाराधम मारेगे वो अब।   धरा पर पाप बढा जब,नारायण राम रूप सज धज, मनोहर रूप भुजा कोदंड, धरा से पाप मिटेगा अब।   प्रकट भयो नवमी को श्रीराम,पूर्णिमा जन्म लिए…

  • हे जग के करतार | Jag ke Kartar

    हे जग के करतार ( He jag ke kartar )   हे जग के करतार, जग का पालनहारा, लौटा दो मुस्कान लबों की, सुनो सांवरा प्यारा ।   घट घटवासी अंतर्यामी, हाल पता है सारा, मंझधार में डूबी नैया, प्रभु लगा दो किनारा।   कुदरत कई रंग बदलती, क्यों लीला करते हो, सबको जीवन देने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *