संभालते क्यों हो

संभालते क्यों हो | Ghazal Sambhalte Kyon Ho

संभालते क्यों हो

( Sambhalte Kyon Ho )

हजारों ऐब वो मुझ में निकालते क्यों हैं
मैं गिर रहा हूँ तो मुझको संभालते क्यों हैं

दिखा है जब भी अंधेरा उन्हें मेरे घर में
चिराग़ आके हमेशा वो बालते क्यों हैं

किसी की बात चले या किसी से हो शिकवा
हरेक तंज़ वो मुझ पर ही ढालते क्यों हैं

जवाब आप ने अब तक नहीं दिया मुझको
मेरे सवाल को हर बार टालते क्यों हैं

ज़माने वालों की फ़ितरत समझ नहीं आती
ज़रा सी बात को इतना उछालते क्यों हैं

वो जब भी लड़ते हैं हमने ये उनसे पूछा है
हमारे ख़्वाब निगाहों में पालते क्यों हैं

वो जब भी मिलते हैं मुझ से कहीं तो ऐ सागर
मेरी निग़ाहों को पहले खंगालते क्यों हैं

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

सूरज निकाल देता है | Ghazal Suraj Nikal Deta Hai

Similar Posts

  • क्या लिखूं मैं | Ghazal Kya Likhun Main

    क्या लिखूं मैं ( Kya Likhun Main ) क्या लिखूं मैं शाइरी में दर्द आंसू ज़िंदगी में वो नज़र आया नहीं है खूब ढूँढ़ा हर गली में भूल जा तू याद उसकी रख नहीं आँखें नमी में इस कदर बेरोज़गारी ज़ीस्त गुज़रे मुफलिसी में हाथ उससे तू मिला मत है दग़ा उस दोस्ती में दोस्त…

  • नये इस साल में | Naye is Saal Mein

    नये इस साल में ( Naye is saal mein )    प्यार के कुछ गुल खिलेंगे अब नये इस साल में दिल मिलेंगे मुस्कुरा के जब नये इस साल में। आज की तारीख़ खुशियां ला रहा अबके नई गा रहे दिलकश तराने लब नये इस साल में। रंजिशें रखके भला कैसे चलेगी जिंदगी बात सारी…

  • जाने क्यों बेख़बर नहीं आती

    जाने क्यों बेख़बर नहीं आती जाने क्यों बेख़बर नहीं आतीढ़ाने मुझपर कहर नहीं आती ताकते क्यों हो तुम गली उसकीआजकल वो नजर नहीं आती मैं हूँ मजबूर आज जीने कोयाद वह इस कदर नहीं आती देखकर हार बैठा दिल जिसकोवो भी लेने ख़बर नहीं आती तू उसे खोजता है क्यों दर दरवो कभी इस डगर…

  • गुजारा है आजकल | Gujara hai Aajkal

    गुजारा है आजकल ( Gujara hai aajkal )    चुपचाप रहोगे तो गुजारा है आजकल बर्बाद ये निज़ाम ही सारा है आजकल। हर आदमी की शख़्सियत में राज सौ छिपे कैसे बताएं कौन हमारा है आजकल। कमबख़्त दिल है ढीठ तलबग़ार उन्हीं का उनपर ही दिलो जान से हारा है आजकल। मशहूर हैं जनाब जमाने…

  • तूफान उठाया है

    तूफान उठाया है इस दिल के समुंदर में तूफान उठाया हैमासूम निगाहों ने जब तीर चलाया है वो दिल के दरीचों से नज़दीक लगा इतनाइक पल में उसे हमने हमराज़ बनाया है ताउम्र रहे रौशन दहलीज़ तेरे घर कीयह दीप मुहब्बत का यूँ हमने जलाया है तुमने जो किया दिल को उम्मीद से वाबस्ताइक ताजमहल…

  • बस हमें ख़बर नहीं | khabar Shayari

    बस हमें ख़बर नहीं ( Bas hamen khabar nahin )    देख पाये जो उसे ,ऐसी हर नज़र नहीं हर जगह है वो ख़ुदा ,बस हमें ख़बर नहीं सब मरेंगे एक दिन ,बात है ये लाज़मी कोई इस जहान में, दोस्तो अमर नहीं दिल मिला है गर तुझे ,तो मिलेगा दर्द भी दर्द से तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *