सनम ख़त का मेरे ज़वाब दें
सनम ख़त का मेरे ज़वाब दें

सनम ख़त का मेरे ज़वाब दें !

 

सनम ख़त का मेरे ज़वाब दें!

मुहब्बत का तू वो गुलाब दें

 

छोड़ो भी ये नाराज़गी मगर

लब पे मुस्कुराहट ज़नाब दें

 

न दें बेवफ़ाई की यादें तू

वफ़ा की कभी तो क़िताब दें

 

यहां वरना बदनाम होगे हम

दिल के राज़ को तू नक़ाब दें

 

लबों पे हसीं दें मुहब्बत की

न आंखों में तू रोज़ आब दें

 

ठुकरा बेदिली से न आज़म को

सनम प्यार का तू गुलाब दें

 

 

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शायर: आज़म नैय्यर

( सहारनपुर )

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