Tabdeeli

तब्दीली | Tabdeeli

तब्दीली

( Tabdeeli )

 

आपके शब्द , नीयत और कर्म
समय की दीवार से टकराकर
लौटते ही हैं आप तक
यहां आपका बाली या सामर्थ्य कोई मायने नहीं रखता

मजबूर के मुंह से बोल नही फूटते
किंतु,उसकी आह जला देती है
किसी के भी सामर्थ्य को
वक्त किसी को माफ नही करता

चट्टानें भी ढह जाती हैं
धूप भी शाम मे बदल जाती है
सुबह तो होती है रात की भी
भटके राही भी पा लेते हैं मंजिल अपनी

कमजोर कोई नही होता
झुका देती है उसकी मजबूरी
दबी हुई डाली भी उठ जाती है ऊपर
प्रयास कभी व्यर्थ नहीं होता

टीले की ऊंचाई भी
जमीन की सख्ती पर ही निर्भर ही
वरना ,महलों को भी
खंडहर मे तब्दील होने मे
वक्त कहां लगता है

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

आधार | Aadhaar

Similar Posts

  • खुद का विश्वास | Khud ka Vishwas

    खुद का विश्वास ( Khud ka Vishwas ) इस जमाने में लड़ाई स्वयं लड़ना पड़ता है। गैरो के भरोसे तो सिर्फ धोख़ा ही मिलता है। इसलिए भरोसा रखो तुम अपने बाजूओं पर। कामयाबी चूमलेगी निश्चित ही तुम्हारे खुदके कदम।। बड़ा टेड़ा है ये जमाना हाथो से रोटी छीनता है। भुजाओं में है तगाद तो शूरवीर…

  • आग | Aag par kavita

     आग  ( Aag )   जीवन में आग का महत्व……|| 1.एक दम पवित्र एक दम तेज, देवों मे भी एक है | खुद मे हर चीज मिलाती, काम भी उसके नेक है | सुख-दुख मे काम आती, रोशनी उज्वलित होती है | अपनी छाप छोड़ती जब, अग्नी प्रज्वलित होती है | जीवन में आग का…

  • अपनें घर का वैद्य | Ghar ka Vaidya

    अपनें घर का वैद्य ( Apne ghar ka vaidya )   इन घरेलू नुस्खों को सब लोग आजमाकर देखना, अपने अपने घर का वैद्य आप ख़ुद ही बन जाना। हालात चाहें कैसे भी हो न बीमारियों से घबाराना, सवेरे जल्दी-उठकर हल्के व्यायाम ज़रुर करना।। खाॅंसी में काली-मिर्च और शहद मिलाकर चाटना, जलने पर मैथीदानें का…

  • घर की इज्जत, बनी खिलौना | Ghar ki Izzat

    घर की इज्जत, बनी खिलौना ( Ghar ki izzat, bani khilauna )    अब कहां कोई खेलता है, खिलौनों से साहब?? अब तो नारी की अस्मिता से खेला जाता है। यत्र पूज्यंते नार्याः, रमंते तत्र देवता, बस श्लोकों में ही देखा जाता है। तार तार होती हैं घर की इज्जत, बड़ी शिद्दत से खेल सियासत…

  • डॉ. मनमोहन सिंह का मान

    डॉ. मनमोहन सिंह का मान सादगी का स्वर, ज्ञान का था दीप।जिसने रच दिया, बदलाव का सीप।मनमोहन सिंह, वह नाम है अमर,जिनपर भारत देश को गर्व है प्रखर। गाह(पाक)के गाँव से उठकर चले।विद्या के दीप संग, तम को पले।कैम्ब्रिज,ऑक्सफोर्ड के ज्ञानी प्रणेता,भारत की माटी का वह अमूल्य रचयिता। आर्थिक संकट जब आया करीब।देश को मिला…

  • Geet | रंग गालो पे कत्थई लगाना

    रंग गालो पे कत्थई लगाना ( Rang Gaalon Par Kathai Lagana)   अबके  फागुन  में  ओ रे पिया भीग जाने  दो  कोरी चुनरिया मीठी मीठी सी बाली उमरिया भीग  जाने  दो  कोरी चुनरिया   हम  को  मिल  ना  सकें तेरे  रहमो  करम सात रंगों में डूबे सातो जन्म रंग गालो पे कत्थई लगाना धीमे धीमें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *