हिंदी कविता

  • सावन | Sawn par Kavita

    सावन ( Sawan ) सावन सरस सुखमय सुधा बरसा रहा, कलियन के संग मधुकर बहुत हर्षा रहा।।   नभ मेघ गर्जत दामिनी द्युतिया रही, प्रिय कंत केहि अपराध बस न आ रहा।।   ज्येष्ठ की सूखी धरा तरुणित हुयी, मोरनी संग मोर बहु सुख पा रहा।।   बारिश की शीतल बूंदें तन जला रही, हे…

  • रिश्तों का सच | Kavita

    रिश्तों का सच ( Rishton ka sach )   स्वार्थ से परिपूर्ण रिश्ते,इस जहां में हो गए है, पुष्प थे जो नेह के वो, शूल विष के बो गए है।   प्रेम से अपनी कहानी, जो सुनाते हैं हमें, हमने जब अपनी कही तो, कोह हमसे हो गए है।   फूल मेरे बाग से चुन,आशियां…

  • बलिदान | Kavita

    बलिदान ( Balidan )   क्या है आजादी का मतलब देश प्रेम वो मतवाले लहू बहाया जिन वीरों ने बलिदानी वो दीवाने   मातृभूमि पर मिटने वाले डटकर लोहा लेते थे देश भक्ति में ऐसे झूले फांसी तक चढ़ लेते थे   जलियांवाला बाग साक्षी अमर कथा उन वीरों की वंदे मातरम कह गए जो…

  • श्याम रंग नीला है या काला | Kavita

    श्याम रंग नीला है या काला ( Shyam rang neela hai ya kala ) श्याम रंग नीला है या काला,बताओ कैसा है नन्दलाला। पीताम्बर तन मोर मुकुँट सर, लकुटी कमरिया बाँधा।   कमल नयन कर मुरली शोभित, गले बैजन्ती माला। सूरदास बालक सम देखे, जग में श्याम निराला।   श्याम रंग नीला है या काला……..

  • राम दरबार | Kavita

    राम दरबार ( Ram darbar )   अमरावती  पृथ्वी  पे  जैसे, इन्द्र का दरबार। अद्भुत सुहाना सरस हो, श्रीराम का दरबार।   भवहीन तन आनंद मन,सौन्दर्य नयनभिराम, श्रीराम का मन्दिर जहाँ, मन जाए बारम्बार।   साकेत दमके पुनः पथ, दर्पण का हो एहसास। श्रीराम जी आए है जैसै, तन में थम गयी सांस।   तोरण…

  • सावन सुहाना आया | छंद

    सावन सुहाना आया | Chhand ( Sawan suhana aya ) (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   सावन सुहाना आया, आई रुत सुहानी रे। बरसो बरसो मेघा, बरसाओ पानी रे।   बदरा गगन छाए, काले काले मेघा आये। मोर पपीहा कोयल, झूमे नाचे गाए रे।   रिमझिम रिमझिम, बरखा बहार आई। मौसम सुहाना आया, हरियाली छाई…

  • कुछ जाने अनजाने रिश्ते | Kavita

    कुछ जाने अनजाने रिश्ते ( Kuch jaane anjaane rishte )   कुछ जाने अनजाने रिश्ते, कुछ दिल से पहचाने रिश्ते। कुछ कुदरत ने हमें दिया है, कुछ हमको निभाने रिश्ते।   रिश्तो की पावन डगर पर, संभल संभल कर चलना है। सदा लुटाना प्यार के मोती, संस्कारों में हमें ढलना है।   माता पिता गुरु…

  • ओढ़कर धानी चुनरिया | Thesahitya Special

    ओढ़कर धानी चुनरिया ( Odh Ke Dhani Chunariya )   ओढ़कर  धानी  चुनरिया, धरा यू हरसा रही। काली घटाएं नीले अंबर, व्योम घिरकर छा रही।   आ गया सावन सुहाना, गीत कोयल गा रही। वन उपवन पर्वत नदियां, भावन घटायें छा रही।   मादक सरितायें बहती, सागर मिलन को जा रही। बलखाती सी बहती धारा,…

  • शब्द | Hindi Poetry

    शब्द ( Shabd )   मेरे शब्दों की दुनिया में, आओं कभी। स्वर में कविता मेरी, गुनगुनाओ कभी। बात दिल की सभी को बता दो अभी।   मेरे शब्दों की दुनिया में…….. ये जो  रचना  मेरी  देगी  जीवन तभी। लय में सुर ताल रिद्धम में बाँधो कभी। अपने भावों को इसमें मिलाओ कभी।   मेरे…

  • तुम मेरे हो | Geet

    तुम मेरे हो ( Tum mere ho )   तुम मेरे हो तुम मेरे हो, सुंदर शाम सवेरे हो। जीवन की बगिया में तुम, खिलते फूल घनेरे हो।   मुस्कानों से मोती झरते, प्रेम उमड़ता सागर सा। महक जाता दिल का कोना, प्रेम भरी इक गागर सा।   मधुबन मन का खिलता जाता, प्रियतम तुम…