Hindi poetry on life

  • Ghazal | बिना तेरे

    बिना तेरे  ( Bina Tere )   बिना तेरे अब हमसे और अकेले जिया नहीं जाता । तुम्हें भूल जाने का गुनाह भी तो हमसे किया नहीं जाता । माना कि मेरे इश्क़े- इज़हार से परेशाँ रहने लगे हो तुम; पर अपनी पाक मोहब्बत को गुनाह, हमसे कहा नहीं जाता । सीने में चुभन,आँखों में…

  • Kavita | पत्रकार हूँ पत्रकार रहने दो

    पत्रकार हूँ पत्रकार रहने दो ( Patrakar Hoon Patrakar Rahne Do ) ******* लिखता हूं कलम को कलम कागज़ को काग़ज़ ग़ज़ल को ग़ज़ल महल को महल तुम रोकते क्यों हो? टोकते क्यों हो? चिढ़ते क्यों हो? दांत पीसते क्यों हो? मैं रूक नहीं सकता झुक नहीं सकता बिक नहीं सकता आजाद ख्याल हूं अपनी…

  • Ghazal | क्या खता थी नजर मिलाना था

    क्या खता थी नजर मिलाना था ( Kya Khata Thi Nazer Milana Tha )     क्या  ख़ता  थी  नजर मिलाना था, लेके  खंजर  खड़ा  ज़माना  था।। हादशा   हुआ   तो   हुआ   कैसे, कुछ ही लोगों का आना जाना था‌।। मैं ही खुशबू हूं उनके गुलशन की, उनका  हरदम  यही  बहाना था।। बहुत  सम्भाला  मगर  टूट…

  • Ghazal | कितनी हिम्मत वाली नारी है

    कितनी हिम्मत वाली नारी है ( kitni  Himmat Wali Nari Hai )     कितनी हिम्मत वाली नारी है मुश्किल से न कभी हारी है   संसार चलाती है यें लोगों देखो यें सबसे  न्यारी है   सम्मान करो नारी का ही लगती यें  तुलसी प्यारी है   देती ख़ुशबू प्यार भरी ही नारी फ़ूलों…

  • Kavita | ये क्या हो रहा है

    ये क्या हो रहा है  ( Ye Kya Ho Raha Hai )     घर से बाहर निकल कर देखिए- मुल्क़ में ये क्या हो रहा है, सबका पेट भरने वाला आजकल सड़कों पर भूखे पेट सो रहा है । मुल्क़ में ये…   खेतों की ख़ामोशियों में काट दी जिसने अपनी उम्र सारी, बुढ़ापे…

  • Ghazal | आदमी

    आदमी ( Aadmi )   हर  तरफ मजबूरियों में, रो  रहा है  आदमी। आंसुओं से जख़्मे दिल को,धो रहा है आदमी।   कौन किसके दर्द की,आवाज को सुनता यहॉं, डालकर  कानों  में  रूई,  सो  रहा है आदमी।   दौरे तूफॉं में चैन से,जीना कोई मुमकिन नहीं, भार  अपनी  ज़िंदगी  का, ढो रहा है आदमी।  …

  • Ghazal | कैसा दौर जमाने आया

    कैसा दौर जमाने आया ( Kaisa Daur Jamane Aya )   कैसा   दौर   जमाने   आया। लालच है हर दिल पे छाया।।   बात  कहां  वो अपनेपन की। सब कुछ लगता आज पराया।।   कोई  सच्ची  बात  न  सुनता। झूठ सभी के मन को भाया।।   कौन किसी से कमतर बोलो। रौब  जमाते  सब  को  पाया।।…

  • Ghazal || न जाने कौन सी बीमारी है

    न जाने कौन सी बीमारी है ( Na Jane Kaun Si Bimari Hai )     जिगर में दर्द अश्क जारी है। न जाने कौन सी बीमारी है।।   शुकून लाऊं तो लाऊं कैसे, हर तरफ बहुत पहरेदारी है।।   चार कंधों पर सज गया बिस्तर, क्या मेरे जाने की तैयारी है।।   मुहब्बत खेल…

  • Kavita अनमोल धरोहर

    अनमोल धरोहर ( Anmol Dharohar )   बेटी हैं अनमोल धरोहर, संस्कृति और समाज की। यदि सभ्यता सुरक्षित रखनी, सींचो मिल सब प्यार से ।।   मां के पेट से बन न आई, नारी दुश्मन नारी की । घर समाज से सीखा उसने, शिक्षा ली दुश्वारी से।।   इच्छाओं को मन में अपने, एक एक…

  • Kavita धीरे-धीरे

    धीरे-धीरे ( Dhire Dhire )     साजिश का होगा,असर धीरे-धीरे। फिजाँ में घुलेगा ,जहर धीरे-धीरे।   फलाँ मजहब वाले,हमला करेंगे, फैलेगी शहर में,खबर धीरे-धीरे।   नफरत की अग्नि जलेगी,हर जानिब, धुआँ-धुआँ होगा,शहर धीरे-धीरे।   मुहल्ला-मुहल्ला में,पसरेगा खौप, भटकेंगे लोग दर,बदर धीरे-धीरे।   सियासत के गिद्ध,मँडराने लगेंगे, लाशों पर फिरेगी,नज़र धीरे-धीरे। कवि : बिनोद बेगाना जमशेदपुर, झारखंड…