जिंदगी | Kavita
जिंदगी ( Zindagi ) मेरी जिंदगी से पूछा मैंने एक रोज जीने का वह तरीका जो घुटन पीड़ा और दर्द से हो बिल्कुल अछूता जिंदगी के पास नहीं था कोई जवाब मुस्कुराकर वह बोली बताती हूं तुझे सलीका बहुत जिया अपने लिए जीवन जी कर देखो जीवन पराया दो कदम बढ़ाओ तुम किसी निर्बल…










