hindi poetry

  • Kavita | पत्रकार हूँ पत्रकार रहने दो

    पत्रकार हूँ पत्रकार रहने दो ( Patrakar Hoon Patrakar Rahne Do ) ******* लिखता हूं कलम को कलम कागज़ को काग़ज़ ग़ज़ल को ग़ज़ल महल को महल तुम रोकते क्यों हो? टोकते क्यों हो? चिढ़ते क्यों हो? दांत पीसते क्यों हो? मैं रूक नहीं सकता झुक नहीं सकता बिक नहीं सकता आजाद ख्याल हूं अपनी…

  • Vriksh Ki Peeda | वृक्ष की पीड़ा

    वृक्ष की पीड़ा ( Vriksh Ki Peeda )    काटकर मुझे सुखाकर धूप में लकड़ी से मेरे बनाते हैं सिंहासन वार्निश से पोतकर चमकाते हैं वोट देकर लोग उन्हें बिठाते हैं वो बैठ कुर्सी पर अपनी किस्मत चमकाते हैं, बघारते हैं शोखी, इठलाते हैं; हर सच्चाई को झुठलाते हैं। मोह बड़ा उन्हें कुर्सी का नहीं…

  • Shiv Stuti | शिव-स्तुति

    शिव-स्तुति ( Shiv Stuti ) ऐसे हैं गुणकारी महेश। नाम ही जिनका मंगलकारी शिव-सा कौन हितेश।।   स्वच्छ निर्मल अर्धचंद्र हरे अज्ञान -तम- क्लेश। जटाजूट में बहती गंगा पवित्र उनका मन-वेश।।   त्रिगुण और त्रिताप नाशक त्रिशूल धारे देवेश।। त्रिनेत्र-ज्वाला रहते काम कैसे करे मन में प्रवेश।।   तमोगुणी क्रोधी सर्प, रखते वश, देते संदेश।…

  • Kavita | नाम नही

    नाम नही ( Naam Nahi )   संघर्षो  के  रूग्ण धरातल, पे अब उनका नाम नही। जाने कितने कटे मरे पर, कही भी उनका नाम नही।   ये आजादी चरखे के, चलने से हमको नही मिली, लाखों ने कुर्बानी दी पर, कही भी उनका नाम नही।   बूंद बूंद मिलती है तब ये, सागर विस्तृत…

  • Kavita | ये क्या हो रहा है

    ये क्या हो रहा है  ( Ye Kya Ho Raha Hai )     घर से बाहर निकल कर देखिए- मुल्क़ में ये क्या हो रहा है, सबका पेट भरने वाला आजकल सड़कों पर भूखे पेट सो रहा है । मुल्क़ में ये…   खेतों की ख़ामोशियों में काट दी जिसने अपनी उम्र सारी, बुढ़ापे…

  • Ghazal | कैसा दौर जमाने आया

    कैसा दौर जमाने आया ( Kaisa Daur Jamane Aya )   कैसा   दौर   जमाने   आया। लालच है हर दिल पे छाया।।   बात  कहां  वो अपनेपन की। सब कुछ लगता आज पराया।।   कोई  सच्ची  बात  न  सुनता। झूठ सभी के मन को भाया।।   कौन किसी से कमतर बोलो। रौब  जमाते  सब  को  पाया।।…

  • Kavita अनमोल धरोहर

    अनमोल धरोहर ( Anmol Dharohar )   बेटी हैं अनमोल धरोहर, संस्कृति और समाज की। यदि सभ्यता सुरक्षित रखनी, सींचो मिल सब प्यार से ।।   मां के पेट से बन न आई, नारी दुश्मन नारी की । घर समाज से सीखा उसने, शिक्षा ली दुश्वारी से।।   इच्छाओं को मन में अपने, एक एक…

  • Kavita धीरे-धीरे

    धीरे-धीरे ( Dhire Dhire )     साजिश का होगा,असर धीरे-धीरे। फिजाँ में घुलेगा ,जहर धीरे-धीरे।   फलाँ मजहब वाले,हमला करेंगे, फैलेगी शहर में,खबर धीरे-धीरे।   नफरत की अग्नि जलेगी,हर जानिब, धुआँ-धुआँ होगा,शहर धीरे-धीरे।   मुहल्ला-मुहल्ला में,पसरेगा खौप, भटकेंगे लोग दर,बदर धीरे-धीरे।   सियासत के गिद्ध,मँडराने लगेंगे, लाशों पर फिरेगी,नज़र धीरे-धीरे। कवि : बिनोद बेगाना जमशेदपुर, झारखंड…

  • Kavita Bitiya Rani | Hindi Kavita – बिटिया रानी

    बिटिया रानी ( Bitiya Rani )     बिटिया जब डाँट लगाती है , वो दिल को छू जाती है l   बिटिया जब दुलराती है , मन को बहुत लुभाती है l   बिटिया जब हंसती है , रोम रोम पुलकित हो जाता है l   बिटिया के रोते ही , तन मन सब…

  • Kavita On Chandrashekhar Azad -चन्द्रशेखर आजाद को श्रद्धा सुमन

    चन्द्रशेखर आजाद को श्रद्धा सुमन ( Chandrashekhar Azad Ko Shradha Suman ) भारत  भूमि  जब  जब  सम्मान  से  सिर झुकायेगी हर मुकाम पर हिन्द को चन्द्रशेखर की याद आयेगी   ऐसा किया ऊँचा मस्तक भारत गौरव के अभिमान का धूल चटाकर प्राण हरे खुद दृश्य सन 31 के सग्राम का   आजाद  हिंद  फौज  से…