hindi poetry

  • प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद | Kavita

    प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद ( Pratham pujya aradhya gajanand )   बुद्धि विधाता विघ्नहर्ता, मंगल कारी आनंद करो। गजानंद गौरी सुत प्यारे, प्रभु आय भंडार भरो।   प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद, हो मूषक असवार। रिद्धि-सिद्धि संग लेकर आओ, आय भरो भंडार।   गणेश देवा गणेश देवा,जन खड़े जयकार करे। लंबोदर दरबार निराला, मोदक छप्पन भोग…

  • प्रथम पूज्य आराध्य गजानन | Kavita

    प्रथम पूज्य आराध्य गजानन ( Pratham pujy aradhy gajanan )   आओ मिल करते अभिनंदन। देव अग्रज गणपति को वंदन।।   ज्ञान के दाता बुद्धि विधाता, चौड़ा मस्तक हमें सिखाता, दर्शन दो प्रभु द्वार खड़े हैं, पार्वती शिव के हो नंदन। देव अग्रज गणपति को वंदन।।   गज सा बदन लिए हो भारी। मूषक पर…

  • बेटी | Kavita

    बेटी ( Beti )   बेटी- है तो, माँ के अरमान है, बेटी- है तो, पिता को अभिमान है! बेटी- है तो, राखी का महत्त्व है, बेटी- है तो, मायका शब्द है!   बेटी- है तो, डोली है, बेटी- है तो, बागों के झुले हैं! बेटी- है तो, ननद- भाभी की ठिठोली है! बेटी- है…

  • शिक्षक | Shikshak Par Kavita

    शिक्षक ( Shikshak )   ये सच है जन्म पोषण परिवार दे देते हैं। शिक्षक उसे सफलता का द्वार दे देते हैं।। जीवन‌ के मनोरथ सकल सिद्ध तुम्हारे हों, यश  कीर्ति  बढ़े  ऐसा संस्कार दे देते हैं।। आने का प्रयोजन भी कुछ शेष न रह पाये, अन्त: तिमिर में सूर्य सा उजियार दे देते हैं।।…

  • गुरुर ब्रहमा गुरुर विष्णु | Teacher’s Day Par Kavita

    गुरुर ब्रहमा गुरुर विष्णु ( Gurur Brahma Gurur Vishnu )   जहाँ सिर श्रृद्धा से झुक जाते है अपने शिक्षक सभी याद आते हैं माँ मेरी प्रथम शिक्षिका है मेरी जीवन की वही रचियेता है पिता से धेर्य सीखा और सीखी स्थिरता चुपचाप जिम्मेदारी वहन करना और मधुरता दादी दादा नानी नाना से सीखा मिलजुल…

  • गुरु कुम्हार | Kavita

    गुरु कुम्हार ( Guru kumhar )   गुरु कुम्हार शिष् कुंभ है गढ़ी गढ़ी कांठै खोट। अंतर हाथ सहार दे बाहर बाहे चोट। हर लेते हो दुख सारे खुशियों के फसल उगाते हो। अ से अनपढ़ ज्ञ से ज्ञानी बनाते हो। चांद पर पैर रखने की शिक्षा भली-भांति दे जाते हो। नेता, अभिनेता, डॉक्टर, इंजीनियर,…

  • साहिल- तेरे लिए | Hindi Ghazal

    साहिल- तेरे लिए ( Sahil- tere liye )   मन के अरमान मेरे बहकने लगे, तुम चले आओ अब मेरे आगोश में।   बिन तुम्हारे है सूनी, प्रणय वाटिका, रिक्तता सी है मेरे प्रणय कोश में।।   तुम मिले मुझको जब, मैं दिवानी हुई, जो मेरे पास था छोड़ कर आ गई।   प्रीत बाबुल…

  • सौतन | Kavita

    सौतन ( Sautan )   कर में सौतन देके गये ब्रजनाथ राधिका रानी के। खेलते रही अधर पर प्रिय के राज किये मनमानी के।।१   गये श्याम जबसे मथुरा हैं भूल गये गोकुल नगरी, घटा कालिंदी का जल इतना लगती है उतरी उतरी। चले गये चितचोर नैन जलधार बहे राधारानी के।। २   छायी खुशी…

  • जगाने कौन आया है | Geet

    जगाने कौन आया है ( Jagane kaun aaya hai )   भरी बरसात में मुझको जगाने कौन आया है, अंधेरी रात में दीपक जलाने कौन आया है।   ये कैसा कहर कुदरत का ये कैसा शहर मुर्दों का, खुशियों से कहीं ज्यादा लगे प्रभाव दर्दों का।   जगाओ चेतना अब तो बढ़ चलो आमरण सब…

  • मोहब्बत का जैसे असर लग रहा | Ghazal

    मोहब्बत का जैसे असर लग रहा ( Mohabbat ka jaise asar lag raha )   खूबसूरत सुहाना सफर लग रहा। मोहब्बत का जैसे असर लग रहा।।   राह -ए -हयात जिस पर मैं थक जा रही थी। उस पर चलती रहूं उम्र भर लग रहा।।   ख्वाबों में अब तक जो मेरे आता रहा। रूबरू…