Tanhai

बस रह गई तनहाई | Tanhai

बस रह गई तनहाई

( Bas reh gayi tanhai )

मिट्टी के घर
चूने की पुताई
गाय का रमहाना
गोबर से लिपाई
चूल्हे से उठता धुआं
खुशबू रोटी की आई
नीम के नीचे खटिया
अम्मा की चटाई
वो ठंडी हवा वो पुरवाई
नदिया का पानी
वह मंदिर की घंटी
छाछ की गिलसिया
गुड़ की डीगरिया
वो छूट गया वहीं
बस रह गई तनहाई
अम्मा का दुलार
हाथों से बनी मिठाई
बापू की धुनाई
बड़ी याद आई
शहर की धूल में
मै सब भूल गया
पेट की आग ने
रिश्तो से की बेवफाई

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

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प्रार्थना | Prarthana

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