Man Maleen

निंदा से मन मलीन | Man Maleen

निंदा से मन मलीन

( Ninda se man maleen ) 

 

करना चाहो जगत में पुण्य के सब काम करो।
निंदा करके तुम खुद को यूं ना बदनाम करो।

क्यों मन मलीन करते हो क्या ठहरा पानी है।
निंदा करना नीचता की बस एक निशानी है।

क्यों कलह करते हो तुम खड़ी दीवार ढहाते हो।
रिश्तो की नाजुक डोर को क्यों आग लगाते हो।

क्या रस आता है तुम्हें क्यों मन मलीन करते हो।
फूट डालने का पाप सर पर भार क्यों धरते हो।

आग अगर लगी तो लपटें कल उधर भी आएगी।
निंदा की भीषण ज्वाला लंका सारी जल जाएगी।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मानव एक दूत है | Manav par Kavita

Similar Posts

  • कैसे लिखू | Kaise Likhoon

    कैसे लिखू ( Kaise Likhoon )   कैसे लिखू प्रेम गीत जब वर्दी खून से भीगे है कैसे देखूं बसंत के फूल जब आंख अश्रु से भीगे हैं कैसे भेजूं मैं प्रियसी को फूल जो मेरे भाई को चढ़ने है कैसे लिखू प्रेम गीत जब हृदय का रोना जारी है कैसे गाऊं मै प्रेम गीत…

  • वंदन माता शारदे

    वंदन माता शारदे प्रफुल्ल ज्ञानरूपिणी, प्रवीण मातु शारदे।विधायिनी सुवादिनी, सरस्वती उबार दे।। निरंजना प्रभामयी, महाश्रया सुवासिनी।सुपूजितां महाभुजा, मनोरमा सुभाषिनी।।करें प्रणाम श्रीप्रदा, प्रबुद्ध भारती सदा।उतारते प्रियंवदा, सुजान आरती सदा।।सुबोध माँ प्रशासनी, सुभक्ति माँ अपार दे। अकूत शास्त्ररूपिणी, करो कृपा महाफला।अनंत प्रेम दायिनी, सुहासिनी महाबला।।नमो दयालु शारदे, स्वयंप्रभा दिवाकरी।प्रशस्त मातु पंथ भी,सुखारिणी सु-अंबरी।।पयोधि ज्ञान दायिनी, नमामि माँ…

  • मगरमच्छ के आंसू | Kavita magarmach ke aansoo

    मगरमच्छ के आंसू ( Magarmach ke aansoo )     दिखावे की इस दुनिया में लोग दिखावा करते हैं घड़ियाली आंसू बहाकर जनमन छलावा करते हैं   मगरमच्छ के आंसू टपकाते व्यर्थ रोना रोते लोग अपना उल्लू सीधा करते मतलब से करते उपयोग   भांति भांति के स्वांग रचाते रंग बदलते मौसम सा बात बात…

  • रिश्ते-आम कह दूॅ क्या?

    रिश्ते-आम कह दूॅ क्या? सुनहरी याद को जाम कह दूँ क्या? इस ह्दय को शमशान कह दूँ क्या ।।1। अब प्रतीक्षा सीमा से ज्यादा हो गई, अवतार कल्कि समान कह दूँ क्या ।।2। रोग पुराना होकर भी पुराना कहाँ? दवा तारीफ की सरेआम कह दूँ क्या ।।3। रास्ते भी मंजिल से खूबसूरत बन जाते, प्रेमी…

  • फागुन | Kavita phagun

    फागुन ( Phagun )   फागुन की दिन थोड़े रह गए, मन में उड़े उमंग। कामकाज में मन नहीं लागे, चढ़ा श्याम का रंग।   रंग  बसंती  ढंग  बसंती,  संग  बसंती  लागे। ढुलमुल ढुलमुल चाल चले,तोरा अंग बसंती लागे।   नयन से नैन मिला लो हमसे, बिना पलक झपकाए । जिसका पहले पलक झपक जाए,…

  • मोर छत्तीसगढ़ महतारी | Mor Chhattisgarh Mahtari

    मोर छत्तीसगढ़ महतारी ( Mor Chhattisgarh Mahtari )    मोर छत्तीसगढ़ महतारी हावय सबले महान, एकर कोरा मा खेलय का लईका का सियान। हमर राज्य के सुख सम्पदा हा सबके मन ला भावय, एक बार जेन आगे ईहां नई फेर कभू छोड़के जावय। हमर छत्तीसगढ़िया भुईयां हा कहाथे धान के कटोरा, दुसर के मदद करे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *